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श्रीकृष्ण की माया से टैगोर में नरसी का उद्धार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 10 Jul 2014 02:32 PM IST
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सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा की ओर से सात दिवसीय सांग उत्सव के चौथे दिन बुधवार शाम टैगोर थिएटर-18 में धर्मबीर सांगी के निर्देशक में नरसी का भात सांग प्रस्तुत किया गया।
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सांग की कहानी शुरू होती है सेठ नरसी की जिंदगी से। नरसी भगवान पर भरोसा नहीं करता। नरसी का एक लड़का भी है जिसका नाम हरनंदी है। एक दिन नरसी गंगा में नहाने जाता है और वहां पर श्रीकृष्ण भगवान ब्राह्मण के रूप में उसे मिलते हैं।
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ब्राह्मण बने भगवान श्री कृष्ण नरसी से कहते हैं कि नहाने से पहले वह कुछ दान करें। नरसी इस पर इंकार कर नहाने से ही मना कर देता है। नरसी कुछ देर सोचता है और ब्राह्मण से कहता है कि वह एक पाई का दान करेगा और वह भी घर जाकर, तो कृष्ण कहते हैं कि ठीक है।
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श्री कृष्ण भगवान घर पहुंचते हैं तो नरसी मरने का ढोंग करता है, लेकिन ब्राह्मण बने कृष्ण भी उसके शव के पीछे शमशान भूमि पर पहुंच जाते हैं। नरसी के झूठ से गुस्साए श्रीकृष्ण भगवान नरसी को श्राप दे देते हैं और जिससे नरसी को माया से नफरत हो जाती है और नरसी 11 करोड़ की अपनी तमाम जायदाद दान कर देता है।
ऐसे में एक दिन नरसी की लड़की का भात आता है, लेकिन उसके भाई उसका भात भरने से मना कर देते हैं। इस पर श्री कृष्ण नरसी की मदद करते हैं और लड़की का भात भरते हैं।