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पंजाब कला भवन में सम्मांवाली डांग का मंचन
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चंडीगढ़। सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में आयोजित तीन दिवसीय नाट्य फेस्टिवल बुधवार को संपन्न हो गया। अंतिम दिन नाटक ‘सम्मावाली डांग’ का मंचन किया गया। इस नाटक का लेखन, निर्देशन साहिब सिंह ने किया और उसके साथ ही उन्होंने इस नाटक में सोलो एक्ट भी किया। साहिब सिंह द्वारा लिखे गए इस नाटक में किसानों की पीड़ा को दर्शाया गया है। इसमें किसानों का आक्रोश भी दिखाया गया है कि आखिर किस प्रकार से किसान अपना डंडा उठाने पर मजबूर हो जाता है।
नाटक में एक किसान चंडीगढ़ में धरना देने आता है और जब यहां से वापस जाता है तो पंजाब के सीएम को एक पत्र लिखता है। वह सीएम को अपनी सारी बातें बताता है। वह कहता है कि आखिरकार चंडीगढ़ में और उनके पंजाब में जमीन-आसमां का अंतर क्यों है। वह सीएम से कहता है कि उनके खेतों में इतनी समस्या है। फसल खराब हो जाती है। पानी नहीं मिलता है। इसके साथ ही कई अन्य समस्याएं हैं।
वह सीएम को लेटर में लिखता है कि गांव में तूफान आता है तो पेड़ गिर जाते हैं। बिजली के नंगे तार किसानों की जान तक ले लेते हैं, लेकिन उनकी आवाज फिर भी सरकार तक नहीं पहुंचती है। वह कहता है कि हम तो बाबा नानक को मानते हैं और उनके अलावा किसी को नहीं मानते हैं। नकली तो सरकार है जो कि नकली दवाएं और अन्य चीजों को रोक नहीं पाती है। अंत में वह कहता है कि हमारे पास तो अंतिम हथियार ‘सम्मावाली डांग’ ही है। हम वह ही उठा लेंगे।
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नाटक में एक किसान चंडीगढ़ में धरना देने आता है और जब यहां से वापस जाता है तो पंजाब के सीएम को एक पत्र लिखता है। वह सीएम को अपनी सारी बातें बताता है। वह कहता है कि आखिरकार चंडीगढ़ में और उनके पंजाब में जमीन-आसमां का अंतर क्यों है। वह सीएम से कहता है कि उनके खेतों में इतनी समस्या है। फसल खराब हो जाती है। पानी नहीं मिलता है। इसके साथ ही कई अन्य समस्याएं हैं।
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वह सीएम को लेटर में लिखता है कि गांव में तूफान आता है तो पेड़ गिर जाते हैं। बिजली के नंगे तार किसानों की जान तक ले लेते हैं, लेकिन उनकी आवाज फिर भी सरकार तक नहीं पहुंचती है। वह कहता है कि हम तो बाबा नानक को मानते हैं और उनके अलावा किसी को नहीं मानते हैं। नकली तो सरकार है जो कि नकली दवाएं और अन्य चीजों को रोक नहीं पाती है। अंत में वह कहता है कि हमारे पास तो अंतिम हथियार ‘सम्मावाली डांग’ ही है। हम वह ही उठा लेंगे।
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