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कलाकारों के जज्बे को सलाम.. लोगों के घर जाकर नाटक से बयां कर रहे कोरोना काल का दर्द
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नाटक संक्रमण का घर मे मंचन करते कलाकार।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। अलंकार थिएटर के कलाकार अनोखे तरीके से नाटक की कहानी को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। थिएटर ग्रुप ने नाटक ‘संक्रमण’ तैयार किया है। इसे ग्रुप के कलाकार चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला आदि जगह लोगों के घरों में जाकर परिवार के बीच मंचन कर रहे हैं। नाटक की कहानी कोविड के दौरान एक परिवार के संघर्ष की कहानी है।
अलंकार थिएटर के कलाकार चक्रेश ने कहा कि हमारी कोशिश है कि परिवार के सभी सदस्य साथ मिलकर इस नाटक को देखें। नाटक में पिछले सात महीनों में डॉक्टरों के संघर्ष, उनके जीवन, प्रशासन के कार्य, थाली बजाना-दीए जलाना, मजदूरों के पलायन, किसानों के संघर्ष आदि को शामिल करते हुए इन सब के बीच इस काल में परिवारों के संघर्ष और उनकी मानसिक अवस्था को बयां किया गया है। नाटक दिखाए जाने के दौरान सामाजिक दूरी का विशेष ध्यान रखा जाता है। एक घर में 7-8 सदस्यों को नाटक देखने की अनुमति देते हैं। इनके साथ ही 7 सदस्य नाटक मंडली के होते हैं। चक्रेश ने बताया अभी तक वो मोहाली और पंचकूला में कई शो कर चुके हैं। अब चंडीगढ़ और जीरकपुर में शो के लिए तैयारी कर रहे हैं।
कलाकारों के लिए नया अनुभव
चक्रेश ने बताया ऐसे घरों में जाकर परिवार के बीच नाटक का मंचन करना कलाकारों के लिए एक नया अनुभव है। इसके साथ ही बिना स्टेज लाइट्स के नाटक को सही ढंग से मंचित करने में परेशानी आती है। कलाकार घर में ही उपलब्ध कम लाइट्स के बीच ही ड्रामा करते हैं।
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अलंकार थिएटर के कलाकार चक्रेश ने कहा कि हमारी कोशिश है कि परिवार के सभी सदस्य साथ मिलकर इस नाटक को देखें। नाटक में पिछले सात महीनों में डॉक्टरों के संघर्ष, उनके जीवन, प्रशासन के कार्य, थाली बजाना-दीए जलाना, मजदूरों के पलायन, किसानों के संघर्ष आदि को शामिल करते हुए इन सब के बीच इस काल में परिवारों के संघर्ष और उनकी मानसिक अवस्था को बयां किया गया है। नाटक दिखाए जाने के दौरान सामाजिक दूरी का विशेष ध्यान रखा जाता है। एक घर में 7-8 सदस्यों को नाटक देखने की अनुमति देते हैं। इनके साथ ही 7 सदस्य नाटक मंडली के होते हैं। चक्रेश ने बताया अभी तक वो मोहाली और पंचकूला में कई शो कर चुके हैं। अब चंडीगढ़ और जीरकपुर में शो के लिए तैयारी कर रहे हैं।
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कलाकारों के लिए नया अनुभव
चक्रेश ने बताया ऐसे घरों में जाकर परिवार के बीच नाटक का मंचन करना कलाकारों के लिए एक नया अनुभव है। इसके साथ ही बिना स्टेज लाइट्स के नाटक को सही ढंग से मंचित करने में परेशानी आती है। कलाकार घर में ही उपलब्ध कम लाइट्स के बीच ही ड्रामा करते हैं।
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