{"_id":"609ee2468ebc3e36b04afc4a","slug":"salute-to-the-spirit-naveen-joins-kovid-duty-in-10-days-beating-corona-chandigarh-news-pkl413372948","type":"story","status":"publish","title_hn":"जज्बे को सलाम.. 10 दिन में कोरोना को मात दे कोविड ड्यूटी में जुटे नवीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जज्बे को सलाम.. 10 दिन में कोरोना को मात दे कोविड ड्यूटी में जुटे नवीन
विज्ञापन
चंडीगढ़। काम का जज्बा और जीतने का दृढ़ संकल्प हो तो कोरोना को हराना कोई मुश्किल काम नहीं। कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम के सदस्य और फायर ब्रिगेड कर्मचारी नवीन कुमार ने भी पत्नी, बेटी और भाई के साथ खुद के संक्रमित होने के बावजूद हार नहीं मानी। एकांतवास में उन्होंने नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट की ऑनलाइन शिक्षा ली और 10 दिन में कोरोना को हराकर फिर से टीम के साथ जुड़ गए।
फायरमैन नवीन कुमार पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान ही कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम के साथ जुड़ गए थे। बेहतर कार्य के लिए उन्हें प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है। नवीन ने बताया कि बीते 28 अप्रैल को उनकी पत्नी कोरोना संक्रमित हो गईं थीं। उसके बाद उन्होंने पूरे परिवार की कोरोना जांच कराया। 30 अप्रैल को जांच में नवीन, उनकी 8 साल की बेटी और भाई भी संक्रमित मिले। उसके बाद सभी एकांतवास में चले गए। घर में उनका बेटा और मां ही बचे थे, इसलिए खाने के लिए कुछ सहयोगियों ने मदद की। नवीन ने बताया कि वह पंजाब विश्वविद्यालय से डिजास्टर मैनेजमेंट का कोर्स कर रहे हैं। मौके का फायदा उठाते हुए नवीन ने ऑनलाइन कक्षाएं लीं। साथ ही सेमिनार में जुड़कर लोगों की सुरक्षा से संबंधित बारीकियां सीखीं। लगभग 10 दिन बाद उन्होंने अपना एकांतवास पूरा कर अपनी जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आने पर वह दोबारा कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम के साथ जुड़ गए हैं। उनके परिवार के अन्य सदस्य अपना 14 दिन का एकांतवास पूरा कर रहे हैं। नवीन ने कहा कि कोरोना के इस काल मे काफी कुछ सीखने को मिला है। जब लोगों को कोरोना होता है तो उन्हें कैसे हौसला दिया जाता है और स्वयं इससे पीड़ित होते हैं तो कैसे धैर्य रखा जाता है। नवीन ने बताया कि कोरोना से जीत में उनके सहयोगियों ने काफी मदद की।
विज्ञापन
फायरमैन नवीन कुमार पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान ही कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम के साथ जुड़ गए थे। बेहतर कार्य के लिए उन्हें प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है। नवीन ने बताया कि बीते 28 अप्रैल को उनकी पत्नी कोरोना संक्रमित हो गईं थीं। उसके बाद उन्होंने पूरे परिवार की कोरोना जांच कराया। 30 अप्रैल को जांच में नवीन, उनकी 8 साल की बेटी और भाई भी संक्रमित मिले। उसके बाद सभी एकांतवास में चले गए। घर में उनका बेटा और मां ही बचे थे, इसलिए खाने के लिए कुछ सहयोगियों ने मदद की। नवीन ने बताया कि वह पंजाब विश्वविद्यालय से डिजास्टर मैनेजमेंट का कोर्स कर रहे हैं। मौके का फायदा उठाते हुए नवीन ने ऑनलाइन कक्षाएं लीं। साथ ही सेमिनार में जुड़कर लोगों की सुरक्षा से संबंधित बारीकियां सीखीं। लगभग 10 दिन बाद उन्होंने अपना एकांतवास पूरा कर अपनी जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आने पर वह दोबारा कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम के साथ जुड़ गए हैं। उनके परिवार के अन्य सदस्य अपना 14 दिन का एकांतवास पूरा कर रहे हैं। नवीन ने कहा कि कोरोना के इस काल मे काफी कुछ सीखने को मिला है। जब लोगों को कोरोना होता है तो उन्हें कैसे हौसला दिया जाता है और स्वयं इससे पीड़ित होते हैं तो कैसे धैर्य रखा जाता है। नवीन ने बताया कि कोरोना से जीत में उनके सहयोगियों ने काफी मदद की।
विज्ञापन