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जज्बे को सलाम, विकलांग थे पर बन गए एडीसी
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 01 Feb 2015 04:19 PM IST
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मणिपुर काडर के आईएएस मणिराम शर्मा अब हरियाणा के आईएएस अधिकारियों के काडर में शामिल हो गए हैं। करीब दो सप्ताह पहले उनका काडर चेंज हुआ है और वे हरियाणा काडर में आ गए हैं। शनिवार को उनकी नियुक्ति महेंद्रगढ़ जिले के एडीसी के तौर पर सरकार ने कर दी है। अभी तक वे नियुक्ति की प्रतीक्षा में थे।
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राजस्थान के अलवर जिले के बंदीगढ़ गांव के रहने वाले मणिराम ने आईएएस में आने के लिए जो संघर्ष किया है, उसकी मिसाल दी जा सकती है। मणिराम का आईएएस बनने का सपना वर्ष 1995 में शुरू हुआ, जिसे पूरा होने में पंद्रह साल बीत गए।
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उन्होंने तीन बार आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन सौ प्रतिशत (डीफ) बधिर होने की वजह से डीओपीटी ने उन्हें नियुक्ति देने से इनकार कर दिया। उन्होंने 2005, 2006 और 2009 में आईएएस की परीक्षा उत्तीण की। 2006 में उन्हें बताया गया कि सौ प्रतिशत बधिर होने के कारण उनका सलेक्शन नहीं हो सकता।
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2009 में मणिराम ने एक बार फिर से हौसला जुटाया और आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन कान के आपरेशन के लिए आठ लाख की रकम की जरूरत थी। यह रकम किन लोगों ने इकट्ठी की और शर्मा का आपरेशन करवाया, यह उन्हें भी नहीं मालूम।
आखिरकार मणिराम शर्मा 2009 में आईएएस अधिकारी बन गए। उनके बैच के अधिकारी हरियाणा में इस समय डीसी हैं। संभवत: छह माह में मणिराम शर्मा हरियाणा में ही किसी जिले के डीसी लग जाएंगे। फिलहाल हरियाणा सरकार उनकी क्षमताओं का आंकलन कर रही है।
यूनिवर्सिटी में रहे टॉपर
कॉलेज में प्रवेश के दूसरे वर्ष में ही मणिराम शर्मा ने राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा उत्तीण कर र्क्ल्क के तौर पर नियुक्ति पाई। कठिन परिश्रम कर उन्होंने यूनिवर्सिटी में टॉप किया और नेट की परीक्षा उत्तीर्ण कर लेक्चरार की नियुक्ति पाई। संघर्ष बढ़ता रहा मणिराम परीक्षाएं उत्तीर्ण कर आगे बढ़ते रहे। अंतत: उन्होंने आईएएस की परीक्षा उत्तीण की और मुकाम हासिल किया।
गांव में स्कूल नहीं था
राजस्थान के गांव बंदीगढ़ में स्कूल नहीं था। वे पास के गांव में पांच किलोमीटर दूर पढ़ने जाते थे। लगन ऐसी थी कि दसवीं की परीक्षा में राज्य शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में पांचवा और बारहवीं की परीक्षा में सातवां स्थान हासिल किया।