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हरियाणा: कैग ऑडिट के दायरे में नहीं ग्रामीण विकास निधि

Mon, 07 Sep 2020 05:26 PM IST
ajay kumar यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 07 Sep 2020 05:26 PM IST
सार

  • निधि के संग्रह व उपयोग पर विधायिका की भी निगरानी नहीं
  • तेरहवें वित्त आयोग की तरफ से जताई जा चुकी चिंता

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Rural Development Fund not under CAG audit
नियंत्रक महालेखा परीक्षक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा ग्रामीण विकास निधि कैग (नियंत्रक महालेखा परीक्षक) ऑडिट के दायरे में नहीं आती। यह निधि समेकित (कंसॉलिडेटिड) फंड से भी बाहर है। इसके धन संग्रह व उपयोग पर विधायिका की कोई निगरानी नहीं है। कैग इस मुद्दे को सरकार के समक्ष अनेक बार उठा चुका है, बावजूद इसके कोई उचित कदम नहीं उठाया गया।

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कैग के हाथ हरियाणा ग्रामीण विकास अधिनियम के कारण बंधे हुए हैं। चूंकि, इस अधिनियम ग्रामीण विकास निधि के ऑडिट का कोई प्रावधान नहीं है। कैग ने यह भी टिप्पणी की है कि सार्वजनिक व्यय को बजट से हटाकर नामांकित निधियों में डाला जा रहा है।
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ये विधानसभा की कमेटियों व नियंत्रक महालेखा परीक्षक के ऑडिट के अधीन आता ही नहीं। इस पर तेरहवें वित्त आयोग ने भी चिंता जताई है। ग्रामीण विकास प्रशासन बोर्ड को राज्य में समेकित निधि में लिए बिना फंड हस्तांतरित किए जा रहे हैं।
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विपणन व बिक्री में सुधार के लिए हुआ था गठन
सरकार ने कृषि उत्पादन को बढ़ाने, विपणन व बिक्री में सुधार के लिए हरियाणा ग्रामीण विकास अधिनियम, 1986 के अंतर्गत ग्रामीण विकास निधि विकास प्रशासन बोर्ड का गठन किया गया था। इसके तहत खरीदे व बेचे गए फलों पर उपकर वसूला जाता है।

इस राशि को बोर्ड सड़कों के विकास, डिस्पेंसरियों की स्थापना, जलापूर्ति, स्वच्छता प्रबंधन व गोदामों के निर्माण पर खर्च किया जाता है। 2011 से 2018 तक राजस्व प्राप्तियां 3766 करोड़ रुपये थी व 3122 करोड़ रुपये खर्च किए गए।


निधि की वसूली व खर्च पर संदेह
निधि की वसूली व खर्च को लेकर कैग आशंकित है। कितना पैसा आ रहा है, कहां खर्च हो रहा, इस पर कोई निगरानी नहीं है। न ही ऑडिट हो रहा। सरकार की निगरानी न होने से बोर्ड के क्रियाकलाप पर सवाल भी उठते रहे हैं।

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