मनरेगा घोटाले में दोषी आईएएस अफसरों पर हरियाणा सरकार मेहरबान, आरटीआई कार्यकर्ता ने पीएम को लिखा पत्र
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भ्रष्टाचार में जीरो टॉलरेंस पर अपनी टीआरपी बढ़ाने में जुटी भाजपा सरकार मनरेगा घोटाले के आगे बौनी साबित हो रही है। देश के जिस बढ़े घोटाले को लेकर हुड्डा सरकार में उंगली उठी, उसी घोटाले को लेकर वर्तमान भाजपा सरकार सरकार ने चुप्पी साध ली है। अब आलम यह है कि लोकायुक्त भी कार्रवाई न होने पर आहत हैं। मामले में कार्रवाई न होते देख आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को शिकायत पत्र लिखा है।
वर्तमान में चारों दोषी अफसर मलाईदार पदों पर तैनात हैं
कपूर ने प्रधानमंत्री व भाजपा अध्यक्ष से दोषी चारों आईएएस के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली भाजपा सरकार दागी आईएएस अधिकारियों को बचा रही है। उन्होंने मांग की है कि या तो चारों आईएएस पर तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज हो, वरना हरियाणा में विजिलेंस ब्यूरो व लोकायुक्त को भंग कर भ्रष्टाचार को कानूनी मान्यता दी जाए।
डीसी-एडीसी और वन अधिकारी डकार गए थे 25.14 करोड़
कपूर ने बताया कि वर्ष 2007-10 के बीच अंबाला में पेड़-पौधे लगाने, नर्सरी, हर्बल पार्क विकसित करने की मनरेगा परियोजना में घोटाला किया गया था। कुल 25.14 करोड़ रुपये को वन विभाग के अधिकारी व अंबाला के तत्कालीन डीसी व एडीसी डकार गए। घोटाले की जांच रिपोर्ट तत्कालीन डीजीपी (विजिलेंस) शरद कुमार ने 16 नवंबर 2012 को मुख्य सचिव हरियाणा को सौंपी थी।
जांच रिपोर्ट में वन विभाग के डीएफओ जगमोहन शर्मा, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर गोकुल शर्मा, राजेश राणा, प्रशांत शर्मा, विनोद कुमार, लक्ष्मण दास, दीपक अलहाबादी, तत्कालीन जिला उपायुक्त आईएएस समीर पाल सरो, मोहम्मद शाईन, रेणु फुलिया, सुमेधा कटारिया व आरपी भारद्वाज को भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया।
डीजीपी (विजिलेंस) ने जहां वन विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, गबन, जालसाजी का मुकद्दमा दर्ज करने की सिफारिश की, वहीं पांचों आईएएस के विरुद्ध सरकार को अपने स्तर पर कार्रवाई करने की रिपोर्ट दी। न तो तत्कालीन हुड्डा सरकार और न ही इस भाजपा सरकार ने किसी के विरुद्ध कोई कारवाई की।
वन विभाग के अधिकारियों पर गाज, आईएएस पर मेहरबानी
जांच में दोषी पाते हुए लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल ने 26 मई 2017 को चारों आईएएस पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आपराधिक मुकद्दमा दर्ज कराने व कार्रवाई की रिपोर्ट 90 दिन में हरियाणा सरकार से तलब की थी, जो आज तक नहीं भेजी गई, न ही कार्रवाई हुई। उल्टा, लोकायुक्त जांच में दोषी एचसीएस रेणु फुलिया व सुमेधा कटारिया को पदोन्नत कर आईएएस अधिकारी बना दिया गया। जबकि आईएएस अधिकारी आरपी भारद्वाज सेवानिवृत्त हो गए।
कार्रवाई न होने पर लोकायुक्त नाखुश
लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल भी आपराधिक मामला दर्ज न होने और कार्रवाई रिपोर्ट न भेजने पर नाखुश हैं। राज्यपाल को भेजी अपनी सालाना रिपोर्ट में भी उन्होंने इसका जिक्र किया है।