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Chandigarh News: यात्री से 10 रुपये अतिरिक्त किराया वसूलने पर सीटीयू पर 5 हजार का हर्जाना
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चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बस में यात्रा कर रहे यात्री से 10 रुपये अधिक किराया वसूलने पर चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही याचिकाकर्ता से किराये के वसूले गए अतिरिक्त 10 रुपये भी वापस करने का आदेश दिया है। मामले में शिकायतकर्ता की ओर उपभोक्ता आयोग में दायर याचिका में लगाए आरोपों के तहत कोरोना काल के दौरान वह बस में सवार होकर डेराबस्सी से जीरकपुर जा रहा था। आरोपों के तहत बस कंडक्टर ने उससे 20 रुपये किराया वसूला, जबकि किराया 10 रुपये था। मामले में सामने आए तथ्यों को जांचने और दलीलों को सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने यात्री के पक्ष में फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए सीटीयू पर हर्जाना लगाया है।
हरियाणा के हिसार निवासी अशोक कुमार ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में दायर की गई याचिका में बताया कि कोरोना के दौरान वह सीटीयू की बस में सवार होकर डेराबस्सी से जीरकपुर जा रहा था। यात्री के आरोपों के तहत कंडक्टर ने उससे 10 रुपये के किराए की रकम की जगह 20 रुपये वसूले। शिकायतकर्ता ने उससे 10 रुपये अतिरिक्त किराए के तौर पर वसूले जाने की शिकायत सीटीयू अधिकारी से भी की थी, लेकिन उसकी शिकायत पर न तो कोई कार्रवाई की गई और न ही उसे जवाब दिया गया। इसके बाद यात्री ने अतिरिक्त किराया वसूल किए जाने को लेकर सीटीयू के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर कर दी।
मामले में सीटीयू की ओर से आयोग में दिए जवाब में कहा गया कि कोरोना काल में प्रशासक के सलाहकार के आदेशों पर बसों में केवल 50 प्रतिशत यात्रियों को बिठाया जा रहा था। इसलिए न्यूनतम किराया 20 रुपये तय किया था और सभी यात्रियों से समान किराया लिया था। सभी गैर एसी बसें पड़ोसी राज्यों की सहमति से 20 रुपये प्रति टिकट दर के साथ ट्राइसिटी में संचालित की जा रही थी। आयोग ने कहा कि यात्री से छोटी दूरी की यात्रा के लिए फ्लैट रेट पर किराया नहीं लिया जा सकता है।
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हरियाणा के हिसार निवासी अशोक कुमार ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में दायर की गई याचिका में बताया कि कोरोना के दौरान वह सीटीयू की बस में सवार होकर डेराबस्सी से जीरकपुर जा रहा था। यात्री के आरोपों के तहत कंडक्टर ने उससे 10 रुपये के किराए की रकम की जगह 20 रुपये वसूले। शिकायतकर्ता ने उससे 10 रुपये अतिरिक्त किराए के तौर पर वसूले जाने की शिकायत सीटीयू अधिकारी से भी की थी, लेकिन उसकी शिकायत पर न तो कोई कार्रवाई की गई और न ही उसे जवाब दिया गया। इसके बाद यात्री ने अतिरिक्त किराया वसूल किए जाने को लेकर सीटीयू के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर कर दी।
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मामले में सीटीयू की ओर से आयोग में दिए जवाब में कहा गया कि कोरोना काल में प्रशासक के सलाहकार के आदेशों पर बसों में केवल 50 प्रतिशत यात्रियों को बिठाया जा रहा था। इसलिए न्यूनतम किराया 20 रुपये तय किया था और सभी यात्रियों से समान किराया लिया था। सभी गैर एसी बसें पड़ोसी राज्यों की सहमति से 20 रुपये प्रति टिकट दर के साथ ट्राइसिटी में संचालित की जा रही थी। आयोग ने कहा कि यात्री से छोटी दूरी की यात्रा के लिए फ्लैट रेट पर किराया नहीं लिया जा सकता है।
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