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जाकिर हुसैन के 'गुलिस्तां' को लगी नजर, गुलाब देखने को तरसे पर्यटक
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 26 Oct 2017 01:48 PM IST
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रोज गार्डन चंडीगढ़
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जाकिर हुसैन के गुलिस्तां को ऐसी नजर लग गई है कि एक भी गुलाब नजर नहीं आता। लोग रोज गार्डन घूमने आते हैं, लेकिन निराशा ही हाथ लगती है। चंडीगढ़ को सिटी ब्यूटीफुल कहने की एकमात्र वजह है यहां की हरियाली और फूल-गुलाबों से भरे पड़े बाग बागीचे। यहां आने वाला सेक्टर-17 और 19, 22 की मार्केटों में खरीदोफरोख्त करने के बाद रोज गार्डन न आए ऐसा नहीं हो सकता। लेकिन इन दिनों रोज गार्डन अपन नाम से थोड़ा उलट नजारा पेश कर रहा है।
यहां से रोज यानि गुलाब गायब हो रहे हैं। शहर आने वाले पर्यटकों को यहां आकर कोई कोई गुलाब की पंखुड़ी देखने को नसीब होती है। बता दें कि इसी महीने से गुलाबों की कटिंग का काम चल रहा था। अब यहां आने वाले पर्यटकों को नवंबर से दिसंबर तक गुलाबों के दीदार होंगे। लगभग 42.25 एकड़ में फैले रोज गार्डन को देखने केलिए रोजाना हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।
गुलाबों को देखने और उनकी महक पाने केलिए वह दूर दूर से आ रहे हैं, उन्हें यहां पर सिर्फ ग्रीनरी और फाउंटेन के अलावा कुछ नहीं दिख रहा। रोज गार्डन में इन गुलाबों की देखभाल करने वालों ने बताया कि अभी ऑफ सीजन चल रहा है। इस महीने से इनकी कटिंग का काम चलता है। इसकी कटिंग का काम 15 दिन चलता है। इसके बाद अब कियारियों की गुड़ाई और इनमें खाद डालकर तैयार नई पौध केलिए तैयार किया जा रहा है।
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नवंबर के बाद यहां यह गार्डन गुलाबों से भर जाएगा। इनकी खूबसूरती देखते ही बनेगी। मुंबई से अपने परिवार और अन्य ग्रुप के साथ बुधवार को रोज र्गाडन पहुंचे शरद राय पेल्ली ने बताया कि वह खासतौर पर गुलाबों के दीदार करने के लिए रोज गार्डन पहुंचे थे, लेकिन यहां पर पहुंचकर उन्हें निराशा हाथ लगी। अन्य पर्यटक किन्नी ने कहा कि चंडीगढ़ घूमने के लिए पहुंचे है। सबसे पहले रोज गार्डन को ही देखने का प्लान बनाया। यहां पहुंचकर हमें बताया गया कि नवंबर और दिसंबर में जाकर गुलाब दिखाई देंगे।
ये है इसकी खासियत
- साल 1967 में बना था रोज गार्डन
- चंडीगढ़ के पहले कमिश्नर डॉ. एमएस रंघावा ने किया था नामकरण हुआ।
- कई एकड़ वर्ग में फैले रोज गार्डन में 830 गुलाब की किस्में
- रोजाना देखभाल के लिए जुटते हैं 50 माली
- एशिया के सबसे बड़ा रोज गार्डन होने का रुतबा
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यहां से रोज यानि गुलाब गायब हो रहे हैं। शहर आने वाले पर्यटकों को यहां आकर कोई कोई गुलाब की पंखुड़ी देखने को नसीब होती है। बता दें कि इसी महीने से गुलाबों की कटिंग का काम चल रहा था। अब यहां आने वाले पर्यटकों को नवंबर से दिसंबर तक गुलाबों के दीदार होंगे। लगभग 42.25 एकड़ में फैले रोज गार्डन को देखने केलिए रोजाना हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।
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गुलाबों को देखने और उनकी महक पाने केलिए वह दूर दूर से आ रहे हैं, उन्हें यहां पर सिर्फ ग्रीनरी और फाउंटेन के अलावा कुछ नहीं दिख रहा। रोज गार्डन में इन गुलाबों की देखभाल करने वालों ने बताया कि अभी ऑफ सीजन चल रहा है। इस महीने से इनकी कटिंग का काम चलता है। इसकी कटिंग का काम 15 दिन चलता है। इसके बाद अब कियारियों की गुड़ाई और इनमें खाद डालकर तैयार नई पौध केलिए तैयार किया जा रहा है।
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नवंबर के बाद यहां यह गार्डन गुलाबों से भर जाएगा। इनकी खूबसूरती देखते ही बनेगी। मुंबई से अपने परिवार और अन्य ग्रुप के साथ बुधवार को रोज र्गाडन पहुंचे शरद राय पेल्ली ने बताया कि वह खासतौर पर गुलाबों के दीदार करने के लिए रोज गार्डन पहुंचे थे, लेकिन यहां पर पहुंचकर उन्हें निराशा हाथ लगी। अन्य पर्यटक किन्नी ने कहा कि चंडीगढ़ घूमने के लिए पहुंचे है। सबसे पहले रोज गार्डन को ही देखने का प्लान बनाया। यहां पहुंचकर हमें बताया गया कि नवंबर और दिसंबर में जाकर गुलाब दिखाई देंगे।
ये है इसकी खासियत
- साल 1967 में बना था रोज गार्डन
- चंडीगढ़ के पहले कमिश्नर डॉ. एमएस रंघावा ने किया था नामकरण हुआ।
- कई एकड़ वर्ग में फैले रोज गार्डन में 830 गुलाब की किस्में
- रोजाना देखभाल के लिए जुटते हैं 50 माली
- एशिया के सबसे बड़ा रोज गार्डन होने का रुतबा