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Chandigarh News: रोपड़ के अमनिंदर ने तीन को जीवनदान और 2 को जिंदगियों में बिखेरी रोशनी
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चंडीगढ़। रोपड़ के खिजराबाद के रहने वाले 21 साल के अमनिंदर सिंह ने दुनिया से जाते हुए तीन लोगों को नया जीवन व दो लोगों को आंखों की रोशनी उपहार में दी है। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद परिजनों ने अमनिंदर को 10 नवंबर को रोपड़ के सिविल अस्पताल से पीजीआई में भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान 20 नवंबर को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
अमनिंदर के परिजनों ने असीम साहस का परिचय देते हुए उनके अंगों को दान करने का निर्णय लिया। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने अंगदान की प्रक्रिया पूरी कर उनकी किडनी, अग्नाशय व कॉर्निया को पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल चार मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया। वहीं, लिवर का मिलन न होने पर ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से सड़क मार्ग से नई दिल्ली के एएचआरआर अस्पताल पहुंचा कर वहां भर्ती मरीज में प्रत्यारोपित किया गया।
परिजनों का निर्णय बना वरदान
पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल का कहना है कि अमनिंदर सिंह के परिवार ने अपने गहरे नुकसान को दूसरों के लिए आशा की किरण में बदल दिया है। उनका साहस सभी के लिए प्रेरणा है, जो अंगदान के जीवन परिवर्तनकारी प्रभाव को पुष्ट करता है। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल का कहना है कि यह घटना मानवता की शक्ति को दर्शाती है। परिवार की सहमति से लेकर नोटो के साथ निर्बाध समन्वय और दिल्ली तक ग्रीन कॉरिडोर बनाने की एक-एक प्रक्रिया हर कदम पर जीवन बचाने के लिए समर्पित प्रयास को दर्शाती है।
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दुनिया से जाकर भी जिंदा रहेगा बेटा हमारा
अमनिंदर के पिता सुखजिंदर का कहना है कि दूसरों की मदद के लिए हर वक्त तैयार रहने वाले उनके बेटे ने दुनिया से जाते हुए भी अपनी सार्थकता सिद्ध की है। उन्हें इस बात का सुकून है कि अंगदान से उनका बेटा दुनिया में न रहते हुए भी दूसरे के माध्यम से जीवित रहेगा।
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अमनिंदर के परिजनों ने असीम साहस का परिचय देते हुए उनके अंगों को दान करने का निर्णय लिया। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने अंगदान की प्रक्रिया पूरी कर उनकी किडनी, अग्नाशय व कॉर्निया को पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल चार मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया। वहीं, लिवर का मिलन न होने पर ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से सड़क मार्ग से नई दिल्ली के एएचआरआर अस्पताल पहुंचा कर वहां भर्ती मरीज में प्रत्यारोपित किया गया।
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परिजनों का निर्णय बना वरदान
पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल का कहना है कि अमनिंदर सिंह के परिवार ने अपने गहरे नुकसान को दूसरों के लिए आशा की किरण में बदल दिया है। उनका साहस सभी के लिए प्रेरणा है, जो अंगदान के जीवन परिवर्तनकारी प्रभाव को पुष्ट करता है। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल का कहना है कि यह घटना मानवता की शक्ति को दर्शाती है। परिवार की सहमति से लेकर नोटो के साथ निर्बाध समन्वय और दिल्ली तक ग्रीन कॉरिडोर बनाने की एक-एक प्रक्रिया हर कदम पर जीवन बचाने के लिए समर्पित प्रयास को दर्शाती है।
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दुनिया से जाकर भी जिंदा रहेगा बेटा हमारा
अमनिंदर के पिता सुखजिंदर का कहना है कि दूसरों की मदद के लिए हर वक्त तैयार रहने वाले उनके बेटे ने दुनिया से जाते हुए भी अपनी सार्थकता सिद्ध की है। उन्हें इस बात का सुकून है कि अंगदान से उनका बेटा दुनिया में न रहते हुए भी दूसरे के माध्यम से जीवित रहेगा।