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‘आजाद’ नुक्कड़ नाटक के जरिए दिया क्रांतिकारियों का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Sun, 14 Aug 2016 12:34 AM IST
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theater for theater group play
- फोटो : amar ujala
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रॉक गार्डन में थिएटर फॉर थिएटर ग्रुप की ओर से ‘आजाद’ नुक्कड़ नाटक खेला गया। जिसमें देश के भीतरी हालातों पर व्यंग कसते हुए लोगों को आपस में मिल-जुल कर रहने का संदेश दिया गया।
नाटक की शुरुआत शहीद-ए-आजम सरदार उधम सिंह के बुत से होती है।
जिसे देखकर लोग उनके हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई होने को लेकर आपस में लड़ने लग जाते हैं। उधम सिंह का बुत ऐसी परिस्थिति को देखकर काफी परेशान होता है और एक दिन उसमें आत्मा आ जाती है। वह इंसानों की दुनियां में रहने लगता है।
वह लोगों से पूछता है कि क्या भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने इसी दिन के लिए कुर्बानी दी थी, कि तुम लोग धर्म और जाति के नाम पर आपस में झगड़ने लग जाओ। यह दुख की बात है कि आजादी से पहले देश अंग्रेजों की यातनाएं सह रहा था और अब देश के भीतरी हालात ही इसे दीमक की तरह खा रहे हैं।
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देश का विकास तभी होगा जब हम एकजुट होकर रहेंगे। बुत के यह कहते ही नाटक का अंत हो जाता है। 45 मिनट की अवधि वाले इस नाटक का निर्देशन सुदेश शर्मा ने किया। इसमें थिएटर फॉर थिएटर ग्रुप के 10 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
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नाटक की शुरुआत शहीद-ए-आजम सरदार उधम सिंह के बुत से होती है।
जिसे देखकर लोग उनके हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई होने को लेकर आपस में लड़ने लग जाते हैं। उधम सिंह का बुत ऐसी परिस्थिति को देखकर काफी परेशान होता है और एक दिन उसमें आत्मा आ जाती है। वह इंसानों की दुनियां में रहने लगता है।
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वह लोगों से पूछता है कि क्या भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने इसी दिन के लिए कुर्बानी दी थी, कि तुम लोग धर्म और जाति के नाम पर आपस में झगड़ने लग जाओ। यह दुख की बात है कि आजादी से पहले देश अंग्रेजों की यातनाएं सह रहा था और अब देश के भीतरी हालात ही इसे दीमक की तरह खा रहे हैं।
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देश का विकास तभी होगा जब हम एकजुट होकर रहेंगे। बुत के यह कहते ही नाटक का अंत हो जाता है। 45 मिनट की अवधि वाले इस नाटक का निर्देशन सुदेश शर्मा ने किया। इसमें थिएटर फॉर थिएटर ग्रुप के 10 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।