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PGI चंडीगढ़ में महंगी हुई रोबोटिक सर्जरी, अब इतने में होगी
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 19 Dec 2015 01:57 PM IST
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पीजीआई हॉस्पिटल्स चार्ज कमेटी ने रोबोटिक सर्जरी का रेट बढ़ा दिया है। जनरल वार्ड के मरीजों के लिए पहले 20 हजार रुपये चार्ज था, लेकिन अब उन्हें इसके लिए 30 हजार रुपये देने होंगे। इसी तरह से प्राइवेट वार्ड में दाखिल मरीजों को अब 60 हजार रुपये देने होंगे। पहले उन्हें 40 हजार रुपये देने पड़ते थे।
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पीजीआई ने बीपीएल कार्ड धारक मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी की फीस तय कर दी है। अब उन्हें दस हजार रुपये देने होंगे। बाकी रुपया पुअर पेशेंट फंड्स व दूसरे विकल्प से जुटाने होंगे। ये तो सिर्फ सर्जरी की फीस। जो सामान लगेगा, उसका खर्च अलग से होगा। हालांकि प्राइवेट हॉस्पिटल्स में इसका खर्च सवा लाख रुपये है।
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पीजीआई का तर्क है कि रोबोटिक सर्जरी में संस्थान का काफी रुपया खर्च होता है। उस खर्च का पचास फीसदी से भी कम मरीजों से लिया जाता है। पीजीआई में रोबोटिक सर्जरी करीब सवा साल पहले शुरू हुई थी। बताया जा रहा है कि इसके रेट और भी बढ़ाए जा सकते हैं, क्योंकि दूसरी सरकारी संस्थाएं इसका 50 हजार रुपये से ज्यादा चार्ज कर रही हैं।
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रोबोटिक सर्जरी का फायदा
यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के मुताबिक इसका सबसे ज्यादा फायदा यह है कि मरीज को तीन से सात दिन के भीतर छुट्टी मिल जाती है। लेप्रोस्कोपिक व रूटीन सर्जरी में मरीज को ठीक होने में दो हफ्ते लग जाते हैं। कई बार ज्यादा दिन तक रुकने से मरीज को इंफेक्शन हो जाता है। रोबोट की बाहें मानव हाथ की तुलना में ज्यादा निपुण होती हैं। इसलिए ऊतकों (टिश्यू) को कम क्षति पहुंचती है। नतीजतन रक्त बहुत कम बहता है। कम आघात पहुंचता है और मरीज जल्द सामान्य स्थिति में आ जाता है। पारंपरिक होल सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी का फायदा यह भी है कि डॉक्टर को थ्री डाइमेंशनल व्यू दिखाई देता है। इस गहराई का भी पता चलता है जो कि होल सर्जरी में दिखाई नहीं देती। रोबोट के रिमोट कंट्रोल से चलने वाले तीन हाथ हैं, जो 360 डिग्री पर घूम सकते हैं।
टेस्ट के रेटों में फेरबदल
पीजीआई ने सरवाइकल कैंसर के दो टेस्टों के दाम में भी फेरबदल किया है। पैप सिमर के रेट पहले 25 रुपये थे, लेकिन अब उसके रेट 100 रुपये कर दिए हैं। सरवाइकल कैंसर में कारगर एलबीसी का रेट प्रशासन ने कम कर दिए हैं। पहले यह टेस्ट 500 रुपये में हो रहा था, लेकिन प्रशासन ने अब इसका रेट 100 रुपये कर दिया है। साइटोलाजी डिपार्टमेंट से जुड़े डाक्टरों ने बताया कि एलबीसी एक नई तकनीक है। इसका बहुत ही सटीक इलाज है और इसके परिणाम भी बहुत ही अच्छे हैं। इसलिए इसे प्रमोट करने के लिए इसके दाम कम किए गए हैं। इसके अलावा मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी लैब के भी दो टेस्ट के दामों में बढ़ोतरी की गई है। थ्रोट स्वैब और पीयूएस कल्चर का टेस्ट का मूल्य पहले 50 रुपये था, लेकिन अब उसके दाम 150 रुपये कर दिए गए हैं।
पीजीआई में पहले से ही इलाज महंगा है। रेट बढ़ाने से मरीजों की परेशानी बढ़ जाएगी। पीजीआई मुकदमों पर तो लाखों रुपया खर्च देता है लेकिन मरीजों को सुविधा देने में हिचकिचाता है। इस बारे में भी पीजीआई को सोचना चाहिए।
- सुभाष चंदर, चेयरमैन एंटी करप्शन फ्रंट पीजीआई