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रॉबिनहुड आर्मी: कोरोना मरीजों की मदद में जुटे चंडीगढ़ के युवा, मदद को हमेशा रहते हैं तैयार
Mon, 10 May 2021 11:12 AM IST
निवेदिता वर्मा
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 10 May 2021 11:12 AM IST
सार
टीम ने एंबुलेंस का इंतजाम किया। मरीज अब पारस अस्पताल में भर्ती है और उनकी हालत में सुधार है। मरीज के साथ आए परिजनों के रहने और उनके खाने की व्यवस्था की जिम्मेदारी भी राबिन हुड के सदस्यों ने उठाई है।
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चंडीगढ़ की रॉबिन हुड आर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सहारनपुर के लक्ष्य जैन की मां कोरोना संक्रमित है। न तो उन्हें ऑक्सीजन सिलिंडर मिल रहा था और न ही वेंटिलेटर। किसी ने उन्हें सलाह दी कि चंडीगढ़ और उसके आसपास बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं हैं। वहां जाकर कुछ बात बन सकती है। लेकिन लक्ष्य को चंडीगढ़ में कोई जानता नहीं था और न ही किसी का नंबर था, जो उनकी मदद कर सके। लक्ष्य ने खोजबीन शुरू की तो सोशल मीडिया पर रॉबिन हुड आर्मी की कोविड रिलीफ टीम का नंबर मिला।
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फोन लगाया तो रॉबिन हुड आर्मी से बात बन गई। टीम के सदस्यों ने पहले ट्राइसिटी में चेक किया कि कहां-कहां आईसीयू मिल सकता है। पता चला कि पारस अस्पताल में एक बेड खाली है। एक टीम सदस्य वहां पहुंचा और पारस अस्पताल से बात की और बेड बुक करा दिया। उसके बाद टीम ने एंबुलेंस का इंतजाम किया। मरीज अब पारस अस्पताल में भर्ती है और उनकी हालत में सुधार है। मरीज के साथ आए परिजनों के रहने और उनके खाने की व्यवस्था की जिम्मेदारी भी राबिन हुड के सदस्यों ने उठाई है।
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टीम से जुड़े हैं 144 वालंटियर
इस पूरी टीम को प्रतीक ऋषि कोआर्डिनेट करते हैं। वे एक आईटी प्रोफेशनल हैं। उन्होंने बताया कि इस समय लोगों को सबसे ज्यादा जरूरत प्लाज्मा, ऑक्सीजन और आईसीयू बेड की है। रोज 100 से ज्यादा कॉल्स आती हैं। उनमें से वे 50 फीसदी से ज्यादा लोगों की मदद कर पाते हैं। ट्राइसिटी में उनके साथ 144 वालंटियर जुड़े हैं जो लोगों को मदद पहुंचाते हैं। उनकी टीम जरूरतमंदों को ब्लड, प्लाज्मा, दवाइयां, ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन, ट्राइसिटी में बेड की उपलब्धता, मरीज को अस्पताल पहुंचाना और होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों को लंच व डिनर पहुंचाना जैसे काम कर रही है। उनकी टीम अभी रोजाना 44 परिवारों को दिन व रात का खाना पहुंचा रही है।
ऐसे काम करती है टीम
प्रतीक ने बताया कि उनकी टीम बच्चों की पढ़ाई व अन्य जरूरतमंदों की मदद करती है। कोरोना की दूसरी लहर आई तो देखा कि लोगों को काफी मदद की जरूरत है। लोग भटक रहे हैं। लोगों के पास सही सूचना भी नहीं है। उसके बाद पूरी टीम इस काम में जुट गई। उसके बाद कोविड रिलीफ टीम बनाई है, जिसमें छह सदस्यों को अलग-अलग काम बांटा गया। इनके नंबर सोशल मीडिया पर जारी किए गए। इन नंबरों पर लोग कॉल करते हैं और फिर उसे मदद पहुंचाने के लिए टीम जुट जाती है।
फंड नहीं सिर्फ राहत सामग्री लेते हैं
प्रतीक ने बताया कि वे किसी से फंड नहीं लेते। जीरो फंड से उनकी टीम काम कर रही है। लोगों से सिर्फ राहत सामग्री मांगते हैं। कोई हमें भोजन बनाने के लिए राशन दे जाता है तो कोई दवा। मरीजों को ऑक्सीमीटर की जरूरत पड़ी तो दानी सज्जनों की मदद से ऑक्सीमीटर आ गए। किसी को दवाई की जरूरत पड़ती तो लोगों की मदद से दवा भी पहुंचा दी जाती है। उन्होंने बताया कि उनके पास सिर्फ ट्राइसिटी नहीं बल्कि बाहर के प्रदेशों में रह रहे लोग भी मदद के लिए कॉल करते हैं। चंडीगढ़ में रह रहे जिन लोगों के बच्चे विदेश में हैं, वे भी फोन कर यहां के बारे में पता करते हैं।
ऐसे काम करती है टीम
प्रतीक ने बताया कि उनकी टीम बच्चों की पढ़ाई व अन्य जरूरतमंदों की मदद करती है। कोरोना की दूसरी लहर आई तो देखा कि लोगों को काफी मदद की जरूरत है। लोग भटक रहे हैं। लोगों के पास सही सूचना भी नहीं है। उसके बाद पूरी टीम इस काम में जुट गई। उसके बाद कोविड रिलीफ टीम बनाई है, जिसमें छह सदस्यों को अलग-अलग काम बांटा गया। इनके नंबर सोशल मीडिया पर जारी किए गए। इन नंबरों पर लोग कॉल करते हैं और फिर उसे मदद पहुंचाने के लिए टीम जुट जाती है।
फंड नहीं सिर्फ राहत सामग्री लेते हैं
प्रतीक ने बताया कि वे किसी से फंड नहीं लेते। जीरो फंड से उनकी टीम काम कर रही है। लोगों से सिर्फ राहत सामग्री मांगते हैं। कोई हमें भोजन बनाने के लिए राशन दे जाता है तो कोई दवा। मरीजों को ऑक्सीमीटर की जरूरत पड़ी तो दानी सज्जनों की मदद से ऑक्सीमीटर आ गए। किसी को दवाई की जरूरत पड़ती तो लोगों की मदद से दवा भी पहुंचा दी जाती है। उन्होंने बताया कि उनके पास सिर्फ ट्राइसिटी नहीं बल्कि बाहर के प्रदेशों में रह रहे लोग भी मदद के लिए कॉल करते हैं। चंडीगढ़ में रह रहे जिन लोगों के बच्चे विदेश में हैं, वे भी फोन कर यहां के बारे में पता करते हैं।