हरियाणा में भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकता है रोडवेज आंदोलन, सूत्रों के इनपुट ने किया अलर्ट
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हरियाणा में चुनावी साल भाजपा के लिए मुश्किलों भरा साबित होने जा रहा है। विपक्ष से निपटने की चुनौती तो है ही सरकारी और कच्चे कर्मचारियों के आंदोलन ने सिरदर्द और बढ़ा दिया है। रोडवेज कर्मचारियों का आंदोलन भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। किलोमीटर स्कीम के विरोध में शुरू हुए आंदोलन का अब व्यापक असर दिखने लगा है। सरकारी और कच्चे कर्मचारी भी अब लामबंद हो गए हैं।
रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी जहां जनता को सरकार के खिलाफ एकजुट करने के लिए घर-घर पहुंचेगी, वहीं सर्व कर्मचारी संघ और नगरपालिका कर्मचारी संघ 8 व 9 दिसंबर को रोहतक में रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में अपनी रणनीति का खुलासा करेंगे।
दोनों संगठनों ने राज्य कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। इसमें परिवहन विभाग और सरकार के रवैये की समीक्षा कर जनांदोलन शुरू करने की रूपरेखा सार्वजनिक की जाएगी। रोडवेज के लगभग साढ़े उन्नीस हजार कर्मचारियों के समर्थन में पक्के और कच्चे लगभग तीन लाख कर्मचारियों के आने से भाजपा को बड़ा वोट बैंक खिसकने का डर सताने लगा है।
खुफिया इनपुट ने भी सरकार और भाजपा नेतृत्व को रिपोर्ट दी है कि नगर निगम चुनाव और आने वाले चुनावों को कर्मचारियों की नाराजगी प्रभावित कर सकती है। पार्टी के खुफिया इनपुट से मिल रहे संकेत कर्मचारियों की हर मूवमेंट पर पैनी निगाह रखे हैं। निर्णायक आंदोलन की घोषणा के साथ ही जगह-जगह हो रही बैठकों का भी इनपुट सरकार को सौंपा जा रहा है।
अंदरखाने डैमेज कंट्रोल पर चल रहा मंथन
सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों के खिलाफ होने की आहट को भांपते हुए भाजपा भी सतर्क हो गई है। भाजपा अंदरखाने अपने कार्यकर्ताओं के जरिये डैमेज कंट्रोल का प्रयास करेगी। इसके अलावा अंदरखाते यह भी मंथन चल रहा है कि कर्मचारियों के विरोध को शांत कैसे किया जाए। भाजपा का थिंक टैंक इस पर भी गंभीरता से मंथन कर रहा है। साथ ही बेलगाम अधिकारियों पर भी नकेल कसने की तैयारी चल रही है, ताकि कर्मचारियों को उकसाने वाले फैसले रोके जा सकें। कर्मचारियों के सीएम सिटी करनाल में शक्ति प्रदर्शन की घोषणा के बाद तो भाजपा नेतृत्व अलर्ट हो गया है।
अंबाला, जींद-कैथल में भी चालकों को हटाने के आदेश जारी
रोडवेज के 365 अनुबंध चालकों की सेवाएं समाप्त करने के निर्णय पर डिपो में अमल शुरू हो गया है। फरीदाबाद डिपो के बाद अब अंबाला, जींद और कैथल डिपो ने भी 2016 में भर्ती चालकों को नौकरी से हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इससे रोडवेज कर्मचारियों में रोष और बढ़ गया है।
सरकार के पास अब भी वक्त, चेत जाए : कमेटी
रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य इंद्र सिंह बधाना, वीरेंद्र धनखड़, हरिनारायण शर्मा, सरबत पूनिया, दलबीर किरमारा, सुलतान सिंह, पहल सिंह तंवर ने कहा कि कर्मचारियों का उत्पीड़न करना सरकार बंद करे। अब भी सरकार के पास समय है, बातचीत के जरिये हर मसला सुलझाया जा सकता है। कर्मचारियों ने अगर चुनावों में विरोध का निर्णय एकमत से ले लिया तो फिर उसे पलटना मुश्किल होगा। दलबीर किरमारा पहले ही निगम चुनावों में भाजपा के खिलाफ वोट की अपील कर्मचारियों से कर चुके हैं।