किलोमीटर स्कीम: नाराज रोडवेज कर्मियों ने फिर दी आंदोलन की चेतावनी, फैसला वापस लेने की मांग की
हरियाणा सरकार ने एक ओर जहां किलोमीटर स्कीम के अंतर्गत 190 बसों को हायर कर उन्हें सड़कों पर उतारने की तैयारी कर ली है। वहीं हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए ऐसा करने पर फिर से आंदोलन की चेतावनी दे दी है। दूसरी ओर, इसी मसले को लेकर इंडियन नेशनल लोकदल ने भी सरकार पर निशाना साधा है।
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सदस्य हरिनारायण शर्मा, बलवान सिंह दोदवा, जयभगवान कादियान, विजय ढ़ोचक, विनोद शर्मा, सुरेश लाठर व मायाराम उनियाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार द्वारा 190 निजी बसें किलोमीटर स्कीम पर लेने के फैसले को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा चाहे इसके लिए कितनी भी बड़ी से बड़ी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।
उन्होंने कहा कि किलोमीटर स्कीम के तहत 510 बसों के हुए टेंडरों में हुई विजिलेंस जांच में घोटाले की बात सामने आ चुके हैं। लेकिन उसके बावजूद आज तक इस मामले में सिर्फ लीपापोती की गई है। किसी भी उच्च अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि जब किलोमीटर स्कीम में भारी घोटाला उजागर हो चुका है तो इस स्कीम के तहत 190 बसें लेने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसलिए सरकार को चाहिए कि पहले किलोमीटर स्कीम को रद्द करके घोटाले में संलिप्त अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही करें। उसके बाद ही कोई अगला कदम उठाया जाए।
उन्होंने यह भी मांग है की है कि सरकार निजी ट्रांसपोर्टरों द्वारा खरीदी गई बसों को खरीद कर रोडवेज के बेड़े में शामिल करें। कर्मचारी नेताओं के अनुसार सरकार कम से कम 3 हजार नई बसें जल्द बेड़े में शामिल करे, ताकि प्रदेश की जनता को एक बेहतरीन परिवहन सुविधा मिल सके और परिवहन विभाग को घाटे से उबारा जा सके। जबकि इसके जरिए बेरोजगार युवकों को स्थाई रोजगार मिल सके। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने किलोमीटर स्कीम के तहत बसें लेने का प्रयास किया तो रोडवेज कर्मचारियों को एक बार फिर से बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
घोटाले के आरोपी अफसरों को बचाना चाहती है सरकार: अभय
इसी मसले पर इनेलो ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की है। इनेलो विधायक अभय चौटाला ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार किलोमीटर घोटाले में लिप्त अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है। चौटाला ने कहा कि एक तरफ तो सरकार ने किलोमीटर स्कीम को रद्द करते हुए ट्रांसपोर्ट को अपनी अर्नेस्ट मनी वापस करने का निर्णय लिया था और दूसरी तरफ परिवहन मंत्री उन्हीं बस मालिकों को फिर से बसों को सड़क पर उतारने की रजामंदी देते हैं।
चौटाला ने कहा कि इस समय से प्रदेश लगभग 10 हजार बसों का टोटा झेल रहा है। सरकार अपने बेडे़ को सरकारी बसों से क्यों पूरा नहीं कर रही है। उनके अनुसार परिवहन मंत्री अगर परिवहन के डिपुओं के कामकाज की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाएं, तो स्पेयर पार्टस का घोटाला किलोमीटर घोटाले से भी बड़ा निकलेगा।