सेवा का अधिकार आयोग: विभागों के चक्कर लगाने का समय गया, अब तय समय में होंगे काम
आयोग के कमिश्नर केके जिंदल ने कहा कि अगर किसी का काम तय समय सीमा में नहीं होता है तो वह बिना किसी हिचक के आयोग को शिकायत कर सकता है। बता दें कि 23 जनवरी 2018 को आयोग का गठन किया गया था।
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सेवा का अधिकार आयोग (आरटीएस) ने लगभग सभी सेवाओं के लिए समय सीमा तय कर दी है। तय समय के अंदर अगर किसी विभाग ने काम नहीं किया तो संबंधित व्यक्ति आयोग में शिकायत कर सकता है। हाल ही में आयोग ने तीन विभागों की कई सेवाओं को अधिसूचित किया है। इसके बाद अब शहर के 28 विभागों की कुल 436 सेवाओं के लिए आयोग ने समय सीमा तय कर दी है।
सेवाओं की सूची और प्रत्येक काम के लिए कितना समय तय किया गया है, इसकी अधिसूचना सेवा का अधिकार आयोग की वेबसाइट पर देखी जा सकती है। इसमें प्रशासन, नगर निगम के लगभग सभी विभाग, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, आरएलए, परिवहन विभाग, एस्टेट ऑफिस समेत कई विभागों की सेवाएं शामिल हैं। बीते दिनों आयोग ने चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति, उद्योग विभाग व प्रशासन के रेंट विभाग की कई सेवाओं को जोड़ा है। इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
आयोग के कमिश्नर केके जिंदल ने कहा कि अगर किसी का काम तय समय सीमा में नहीं होता है तो वह बिना किसी हिचक के आयोग को शिकायत कर सकता है। बता दें कि 23 जनवरी 2018 को आयोग का गठन किया गया था। इसके बाद 26 अप्रैल 2018 को आईएएस केके जिंदल (रिटा.) को पहला कमिश्नर नियुक्त किया गया।
आयोग ने 13 सितंबर 2019 को मुख्य पांच विभागों के 188 सेवाओं को अधिसूचित किया गया। 11 अक्तूबर 2019 को रूल्स नोटिफाई किए गए। इसके बाद 8 अक्तूबर 2020 को 23 अन्य विभागों के कई सेवाओं को मिला कुल 486 सेवाएं अधिसूचित की गईं। हालांकि समीक्षा के बाद अब कुल 28 विभाग की 436 सेवाओं अधिसूचित की गई हैं।
एक बूथ के लिए एस्टेट ऑफिस ने कई साल तक कटवाए चक्कर, आयोग से मिली राहत
शहर के मुकेश गोयल (जीपीए ऑफ लखबीर सिंह) को एक बूथ के लिए एस्टेट ऑफिस ने कई साल चक्कर लगवाए। आखिर में उन्होंने आयोग का दरवाजा खटखटाया तो उन्हें करीब एक महीने में ही राहत मिल गई। साथ ही आयोग ने इस मामले में ब्रांच हेड पर जुर्माना लगाने के साथ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। लखबीर सिंह ने वर्ष 1991 में 99 साल के लिए सेक्टर-44 में एक बूथ खरीदा था।
उन्होंने 25 फीसदी राशि का भुगतान भी कर दिया था। आवंटन के बाद एस्टेट ऑफिस ने वादे अनुसार मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं कराईं तो वह अप्रैल 1993 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट चले गए। कहा कि जब एस्टेट ऑफिस ने सुविधाएं ही नहीं दीं तो वह बाकी के पैसे क्यों दें। इसके कुछ दिन बाद एस्टेट ऑफिस ने बूथ का आवंटन रद्द कर दिया।
वर्ष 2012 में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और फैसला याचिकाकर्ता के पक्ष में आया। अदालत ने आदेश दिया कि आवंटन बहाल करने के साथ याचिकाकर्ता को कुल बकाया जोड़कर बताया जाए ताकि वह रकम जमा कराकर काम शुरू कर सकें लेकिन एस्टेट ऑफिस ने मामले को लटकाए रखा और याचिकाकर्ता को प्रशासन के वित्त सचिव के पास अपील के लिए कहा।
ब्रांच इंचार्ज पर 10 हजार का जुर्माना, कार्रवाई के आदेश
वित्त सचिव के पास अपील के बाद भी वह बूथ के लिए कई साल चक्कर काटते रहे। तंग आकर मार्च 2022 में उन्होंने सेवा का अधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया। दो सुनवाई हुई। सुनवाई में आयोग के कमिश्नर केके जिंदल ने एस्टेट ऑफिस से अधिकारी से देरी का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि वह वरिष्ठ अधिकारियों से मंजूरी का इंतजार कर रहे थे। इस पर आयोग ने जमकर फटकार लगाई और कहा कि जब पहले ही एस्टेट ऑफिसर बकाया राशि बताने के आदेश दे चुके हैं तो फिर वो किस आदेश का इंतजार कर रहे थे।
आयोग ने एस्टेट ऑफिस के ब्रांच इंजार्च पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कहा गया है कि इसमें से 9 हजार रुपये मुकेश गोयल को मुआवजे के तौर पर दिया जाए। एस्टेट ऑफिसर को आदेश दिए हैं कि बकाया राशि को बताने में देरी करने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ जांच के आदेश दें या फिर सख्त कार्रवाई करें।
यहां कर सकते हैं संपर्क
- चंडीगढ़ सेवा आयोग का अधिकार
- नगर योजना भवन, सी-विंग, मध्य मार्ग
- सेक्टर 18-ए, चंडीगढ़- 160018
- फोन नंबर 0172-5171500, 2700018