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एक निष्पक्ष फैसला बनाता है 'पंच को परमेश्वर'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 08 Feb 2014 12:34 PM IST
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मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एंड डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर हरियाणा की ओर से आयोजित सेलिब्रेटिंग नौटंकी के पांचवें दिन पंच परमेश्वर नौटंकी का मंचन किया गया।
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मुंशी प्रेमचंद की कहानी पंच परमेश्वर को नौटंकी के रूप में राजकुमार श्रीवास्तव ने लिखा और अतुल यदुवंशी के निर्देशन में स्वर्ग रेपरेटरी ग्रुप ने इसे प्रदर्शित किया।
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नौटंकी की शुरूआत गांव के दो दोस्तों की कहानी से होती है। अलगु और जुम्मन गहरे दोस्त हैं। इनकी दोस्ती के चर्चे पूरे गांव में हैं। एक दिन अलगु को गांव का सरपंच नियुक्त कर दिया जाता है।
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एक दिन जुम्मन के खिलाफ गांव में विवाद होता है। इस पर सरपंच होने के नाते अलगु को इस पर फैसला लेना होता है। सरपंच होने के नाते अलगु जुम्मन को दोषी पाने पर उसके खिलाफ फैसला सुनाता है।
इससे दोनों की दोस्ती में दरार आ जाती है और उनमें बातचीत बंद हो जाती है।
एक दिन जब गांव के सरपंच की पगड़ी जुम्मन के सिर आती है तो उसके पास भी अलगु से जुड़ा एक विवाद आता है, लेकिन सरपंच की जगह बैठते ही जुम्मन को एहसास होता है कि सरपंच का काम राग द्वेष से उपर उठकर सिर्फ निष्पक्ष फैसला सुनाना होता है और वह अलगु के पक्ष में फैसला सुनाता है। इसके बाद बाद दोनों मित्र फिर एक हो जाते हैं।