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Chandigarh News: सरकार से राइस मिलर्स की नहीं बनी बात, मंडियों में भंडारण की दिक्कत शुरू

Tue, 01 Oct 2024 03:24 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Oct 2024 03:24 AM IST
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Rice millers did not agree with the government, storage problems started in the markets
1.72 लाख टन धान मंडी में पहुंचा, जबकि मात्र 29 हजार टन की खरीद हुई
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कई मंडियों में धान भंडारण की समस्या शुरू, अब तक 29143 हजार किसान धान लेकर पहुंचे


अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मंडी से धान उठाने को लेकर राज्य के राइस मिलर्स की अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) के साथ सहमति नहीं बन पाई है। एसीएच की तरफ से सोमवार को वर्चुअल मीटिंग में राइस मिलर्स की मांग पर मौखिक तौर पर उनकी मांगों को मानने की आश्वासन दिया गया।जबकि बैठक में शामिल राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी अपनी मांगों को लिखित तौर पर मानने पर अड़े रहे। इसके बाद एसीएस और राइस मिलर्स में किसी भी तरह की सहमति नहीं बनी। वहीं, राज्य के विभिन्न जिलों से मंडी में 1.72 लाख टन धान पहुंच चुका है, जबकि मात्र 4668 किसानों के 29 हजार टन धान की सरकारी बिक्री हुई है। राइस मिलर्स द्वारा धान नहीं उठाने के कारण अब मंडी में भंडारण की समस्या भी शुरू हो गई। जो सरकार के सामने आने वाले दिनों में बड़ी समस्या बनकर उभरने वाली है।

राज्य के 29143 हजार किसानों सोमवार तक 1.72 टन धान सरकारी बिक्री के लिए मंडी में लेकर पहुंच चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा कुरुक्षेत्र से 48 हजार टन धान मंडी में पहुंचा है। प्रदेश के 12 जिलों की मंडियों में धान पहुंच रहा है, लेकिन वह सरकारी खरीद के बावजूद मंडी में पड़ी हुई है। अब राइस मिलर्स द्वारा धान उठाना दूर की बात है, कई जिलों में मिल अलॉटमेंट भी नहीं हो सका है। इसकी वजह राइस मिलर्स के अपनी मांगों को लेकर सरकार से अनुबंध पर सहमति नहीं बननी है।
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प्रदेश राइस एंड डिलर्स एसोसिएशन के प्रधान सौरभ गुप्ता ने बताया कि सरकार की तरफ से उनकी मांगों को मानने के बजाय मौखिक आश्वासन देकर टरकाया जा रहा है। यह मौखिक आश्वासन किसी भी स्थिति में मान्य नहीं है। बैठक में एसीएस की तरफ से उनकी मांगों को मानने को लेकर लिखित तौर पर कोई सहमति नहीं बनी है। इसी वजह से एसोसिएशन की तरफ से धान नहीं खरीदने को लेकर हड़ताल जारी रहेगी। जबकि मंडियों में धान के भंडारण को लेकर परेशानी आनी शुरू हो गई है।
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ये राइस मिलर्स की प्रमुख मांग -

-धान की हाइब्रिड वैरायटी बाजार में आ चुकी है। यह फसल जल्दी तैयार हो जाती है, लेकिन इसमें प्रति क्विंटल धान से औसतन 60 से 62 किलोग्राम चावल ही निकलता है। जबकि सरकार 67 किलोग्राम ले रही है।


-सरकार की शर्त के अनुसार मिल मालिक से मिलने वाले चावल में टुकड़े की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। जबकि हाइब्रिड धान से 35 से 40 प्रतिशत टुकड़ा निकलता है। टूटे चावलों की मात्रा बढ़ाई जाए।

- सरकारी गोदामों में चावल रखने की जगह नहीं है। अब धान की जो कुटाई होगी उसका चावल कहां रखा जाए, इसकी कोई स्पष्टता नहीं है।



-सरकार की तरफ से 10 रुपये प्रति क्विंटल मीलिंग चार्ज दिया जाता है। जबकि मिलर्स का खर्चा 120 रुपये आता है, जोकि छत्तीसगढ़ में लागू भी है।




कुरुक्षेत्र में सबसे ज्यादा -
जिला धान (टन)
अंबाला 39,357.63

फतेहाबाद 621.40
हिसार 201.70
जींद 2,008.20

कैथल 18,171.68
करनाल 22,841.68

कुरुक्षेत्र 48,898.92
पंचकूला 5,129.50
पानीपत 170.35
रोहतक 29.10

सिरसा 147.10

यमुनानगर 34,817.92
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