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हाईकोर्ट से गेस्ट टीचर्स को झटका, सरकार को फटकार

Fri, 29 May 2015 09:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 29 May 2015 09:12 AM IST
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review petition by guest teachers rejected from high court

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के 4073 सरप्लस गेस्ट टीचरों को बड़ा झटका दिया है। प्रदेश सरकार के नोटिस को चुनौती देती याचिका नामंजूर होने के बाद दायर अपील भी वीरवार को खारिज हो गई।

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जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस पीबी बजंतरी की डिवीजन बेंच ने कड़ी टिप्पणी की है कि तीन साल से सरकार इन गेस्ट टीचरों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करती आ रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट भी गेस्ट टीचरों को निकालने का आदेश दे चुका है।
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अब इस मामले में हरियाणा सरकार बुरी तरह फंस चुकी है। हाईकोर्ट की एकल बेंच में शुक्रवार को सुनवाई होनी है और राज्य के मुख्य सचिव को बताना है कि सरप्लस गेस्ट टीचरों को निकाला गया या नहीं।
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गेस्ट टीचर सीमा देवी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि उसे न निकाला जाए। यहीं से मामला बढ़ गया और गेस्ट टीचरों के बारे में सरकार से स्थिति पूछी गई थी। हरियाणा सरकार ने बताया कि राज्य में 4073 गेस्ट टीचर सरप्लस हैं।

बेंच ने कहा, 'सरप्लस गेस्ट टीचरों के पास ठोस आधार नहीं'

review petition by guest teachers rejected from high court

हाईकोर्ट ने इन्हें हटाने का निर्देश दे दिया था। एकल बेंच ने निर्देश दिया था कि गेस्ट टीचरों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने से 24 घंटे पहले नोटिस जारी किया जाए।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अगली सुनवाई पर गेस्ट टीचरों को हटाकर रिपोर्ट पेश की जाए। इस पर सुनवाई 27 मई को होनी थी, लेकिन सरकार ने कहा था कि एकल बेंच के फैसले को अपील में चुनौती दी गई है। एकल बेंच ने सुनवाई शुक्रवार के लिए स्थगित कर दी थी।

अब वीरवार को डिवीजन बेंच ने अपील खारिज कर दी है। फैसला सुनाते वक्त बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि तीन साल पहले गेस्ट टीचरों को निकालने और रेगुलर भर्ती करने का आदेश हुआ था। सरकार कोई न कोई तथ्य पेश कर रेगुलर भर्ती करने के नाम पर समय बिताती रही।

ऐसे में गेस्ट टीचरों की सेवाएं जारी रखी गईं। यह केवल वोट बैंक के तौर पर इनका इस्तेमाल करने के लिए किया गया। अभी तक भी रेगुलर भर्ती का शेड्यूल सरकार हाईकोर्ट में पेश नहीं कर पाई है। बेंच ने कहा कि वैसे भी सरप्लस गेस्ट टीचरों के पास उनकी सेवाएं जारी रखने का ठोस आधार नहीं है।

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