Punjab: जजों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना पड़ा भारी, बिना सुनवाई बर्खास्त डीएसपी व उसके सहयोगी को छह माह की जेल
सेवानिवृत्त डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों और प्रदीप शर्मा पर हाईकोर्ट के जजों और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ निंदनीय वीडियो अपलोड करने के लिए कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज था। हाईकोर्ट ने दोनों पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जजों पर अमर्यादित टिप्पणी के आरोपी बर्खास्त डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों व उनके सहयोगी प्रदीप शर्मा को छह महीने की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार का कृत्य करने वालों के खिलाफ ट्रायल जरूरी नहीं है। ऐसे व्यवहार के वीडियो मौजूद हैं। वहीं, सजा सुनने के बाद सेखों ने कोर्ट में ही न्यायिक गुंडागर्दी मुर्दाबाद के नारे लगाए।
हाईकोर्ट में 15 फरवरी को नशे की तस्करी से जुड़े मामले की सुनवाई के बाद बर्खास्त डीएसपी बलविंदर सेखों व उसके सहयोगी ने प्रेसवार्ता कर जजों और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपत्तिजनक बात की थी। इसका एक वीडियो भी उसने अपने चैनल पर अपलोड कर दिया था। इस वीडियो पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों के खिलाफ 20 फरवरी को वारंट जारी किया।
वारंट जारी होते ही पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को पंजाब पुलिस के बर्खास्त डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों और उनके कानूनी सहयोगी प्रदीप शर्मा को वीडियो अपलोड करने के मामले में अवमानना की कार्रवाई के तहत पेश किया गया था। जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस हरप्रीत कौर जीवन की खंडपीठ ने इन वीडियो को लेकर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के तहत सुनवाई आरंभ की थी।
सेखों ने सोशल मीडिया से कितनी कमाई की, बताएं
हाईकोर्ट में शुक्रवार को फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर ने बताया कि उन्होंने ज्यादातर सामग्री हटा दी है। जो रह गई है, उसे भी हटा लिया जाएगा। हाईकोर्ट ने अब फेसबुक, यूट्यूब व ट्विटर से पूछा है कि सेखों अपने चैनल से कितनी कमाई कर रहा था, क्योंकि अकेले यूट्यूब पर ही उसके 37 हजार सबस्क्राइबर मौजूद हैं। कोर्ट ने तीनों से पूछा कि वह हलफनामा देकर बताएं कि लोगों को बदनाम करने के लिए चलाए जा रहे इन चैनल से इन्हें कितनी आय हुई है और चैनल चलाने वाले को कितनी आय हुई है।
पुलिस के रवैए पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि 20 फरवरी के बाद आदेश के चलते दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस ने हिरासत में लिया था। इस दौरान कुछ पत्रकारों से बातचीत का वीडियो सामने आया था। इस पर कोर्ट को लुधियाना के पुलिस कमिश्नर ने बताया कि इस चूक के लिए सराभा नगर के एसएचओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है और एसीपी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस मामले में जांच का जिम्मा एसीपी को सौंपा गया था। कोर्ट ने अब इस मामले में जल्द से जल्द रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। यहां तक की कोर्ट ने अपनी नाराजगी जताते हुए कमिश्नर से आईपीसी का मतलब पूछ डाला।
विवादित सामग्री की थी भरमार
कोर्ट को बताया गया कि प्राथमिक जांच में विवादित वीडियो 32 जीबी की पाई गई हैं। यह करीब 10 से 12 घंटे की वीडियो बताई गई है। इसमें विवादित सामग्री की भरमार है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन सीज कर लिए हैं, उनकी जांच कराई जाएगी।