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दस साल बाद भी नहीं मिलीं डिग्रियां, पीएचडी शोधकर्ताओं ने राष्ट्रपति से मांगी आत्महत्या की अनुमति
Sat, 29 Jun 2019 12:46 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 29 Jun 2019 12:46 AM IST
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पीड़ित पीएचडी शोधकर्ता संघ के तत्वाधान में आंध्र प्रदेश स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले शोधार्थियों ने प्रधान बबली की अध्यक्षता में मांगों को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नाम डीसी डॉ आदित्य दहिया को ज्ञापन सौंपा।
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ज्ञापन के माध्यम से शोधार्थियों ने कहा कि उन्होंने 2008-09 में आंध्र प्रदेश की एक निजी यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था लेकिन अब तक उन्हें डिग्री नहीं दी गई है। इसके चलते विद्यार्थियों में भारी रोष है। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग कि गई कि उनकी डिग्री नहीं दिलवाई गई जा सकती है उन्हें आत्महत्या करने की अनुमति दी जाए।
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उन्होंने कहा कि जब शोधार्थियों ने 2008-09 में दाखिला लिया था तो उस समय उनकी उम्र 32 से 34 साल थी लेकिन अब 42 साल से ज्यादा हो गई है। ऐसे में अब नौकरी मिलना मुश्किल हो गया है। इस इस स्थिति में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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बबली ने कहा कि अगर उन्हें जल्द डिग्री नहीं दिलवाई गई तो वे कोई ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। इस अवसर पर यशवीर दहिया, बबिता लाठर, ममता शर्मा, ईशा बंसल, पृथ्वीराज, सुनील मान, संदीप गोयत, जयभगवान दलाल, कुलविंद्र सिंह, राजेश, संजय खर्ब, कृष्ण मौजूद रहे।
यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से करेंगे बात: डीसी
डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने कहा कि शोधार्थियों की मांगों को प्राथमिकता से सुलझाया जाएगा। इसके लिए यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। जल्द ही शोधार्थियों को डिग्री दिलवाई जाएगी। अगर इसमें सेंटर संचालक की कमी मिली तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।