फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Research Survey: Transgenders are harassed more at home than in society

शोध सर्वे : समाज के बजाय घर से अधिक प्रताड़ित होते हैं किन्नर

Mon, 11 Apr 2022 01:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2022 01:33 AM IST
विज्ञापन
Research Survey: Transgenders are harassed more at home than in society
चंडीगढ़। किन्नरों का समाज की ओर से शोषण किए जाने से पहले इसकी शुरुआत उनके घरों में होती है। डीएवी कॉलेज-10 के समाजशास्त्र विभाग के अस्सिटेंट प्रोफेसर सोनू ने ट्राइसिटी (मोहाली और चंडीगढ़) के 20 किन्नरों पर शोध सर्वे किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि सबसे बड़ी समस्या किन्नर वर्ग के लिए ये है कि उन्हें समाज के बजाय घर से अधिक प्रताड़ना मिलती है। परिवार का सहयोग नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे राज्य में परिवार से पहचान बदल कर रहना पड़ता है।
विज्ञापन

डॉ. सोनू ने बताया कि अधिकांश किन्नरों को छोटी उम्र में ही घर से बाहर निकाल दिया जाता है। पांचवीं-सातवीं तक पढ़े होने के कारण नौकरी नहीं मिलती है और कोई दैनिक मजदूरी पर भी नहीं रखता। इस कारण बहुत से किन्नर सेक्स वर्क से अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं या लाइटों और रेलगाड़ी में बधाई मांगकर गुजारा करना पड़ता है। इस कारण उन्हें गंभीर बीमारियां हो जाती हैं। सर्वे में शामिल मोहाली निवासी दो किन्नरों की एचआईवी से मौत हो गई थी। इसमें एक की उम्र 33 वर्ष और एक की उम्र 52 वर्ष थी।
विज्ञापन

चार साल के बच्चे को डेरे में छोड़ा
डॉ. सोनू ने बताया कि सर्वे में एक चार साल के बच्चे को भी शामिल किया। उसे उसके परिवार ने चंडीगढ़ के किन्नर डेरे में छोड़ दिया था। हालांकि बच्चे को अभी लिंग की इतनी समझ भी नहीं थी। चंडीगढ़ और मोहाली के डेरों में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, केरल, तमिलनाडु, दिल्ली इत्यादि जगहों के किन्नर रह रहे हैं। किन्नरों ने बताया कि परिवार समाज में बदनामी के डर से उन्हें घर से बाहर निकाल देते हैं। इस कारण उन्हें परिवार से दूर दूसरे राज्य में जाकर बसना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्कूलों को चलाना चाहिए शिक्षा अभियान
डॉ. सोनू ने बताया कि किन्नरों को समाज के सामान्य वर्ग में स्थान दिलाने का एक ही रास्ता शिक्षा है। स्कूलों को डेरों में शिक्षा अभियान चलाना चाहिए और स्कूलों और कॉलेजों में भी लिंग समानता को लेकर जागरूक करना चाहिए। किन्नरों को अस्पताल में इलाज करवाने और पुलिस में रिपोर्ट लिखवाने में भी मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है। स्कूलों और कॉलेजों की तरफ से जागरुकता अभियान में सभी वर्गों को शामिल किया जाना चाहिए। पीयू में उच्च शिक्षा में पिछले सालों में किन्नरों की कुछ भागीदारी देखने को मिली है। यह सकारात्मक कदम है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed