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पीजीआई चंडीगढ़ की नजरें अब हाथ ट्रांसप्लांट पर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 08 Jan 2016 01:44 PM IST
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हार्ट और पेंक्रियाज ट्रांसप्लांट सफल होने के बाद पीजीआई की नजरें अब हाथ ट्रांसप्लांट करने पर है। पीजीआई इसके लिए जल्द तैयारी शुरू करने वाला है।
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अभी तक कोची बेस्ड अर्मिता इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस ने जनवरी 2015 में देश में पहला हाथ ट्रांसप्लांट किया था। अब तक सिर्फ दो ही हाथ ट्रांसप्लांट सफल हुए और दोनों अर्मिता इंस्टीट्यूट ने किए हैं।
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पीजीआई की प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी डा. रमेश शर्मा ने बताया कि जल्द चार से छह डाक्टरों की टीम अर्मिता इंस्टीट्यूट भेजी जाएगी। इसकी एक प्रक्रिया है, जिस पर जल्द से जल्द काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब अमृता इंस्टीट्यूट हाथ ट्रांसप्लांट कर सकता है तो पीजीआई की टीम क्यों नहीं।
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ट्रेनिंग सहित इस पूरे प्रासेस में कम से कम छह से सात महीने का वक्त लग सकता है। वीरवार को डा. सुब्रह्मण्यम अय्यर पीजीआई पहुंचे थे। उस दौरान अपने पहले सक्सेसफुल हाथ ट्रांसप्लांट के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
प्लास्टिक सर्जरी से जुड़े विशेषज्ञों ने बताया कि किडनी, लीवर के मुकाबले हाथ ट्रांसप्लांट करना काफी मुश्किल काम है। हाथ ट्रांसप्लांट में सर्जन को अंग को जिंदा बनाए रखना काफी चुनौतीपूर्ण काम होता है। हाथ ट्रांसप्लांट करने के बाद मरीज की फिजियोथैरेपी जरूरी होती है। कम से कम साल भर तक ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है।
किसे जरूरत पड़ती है
कई बार मशीनरी में काम करने और एक्सीडेंट के दौरान लोगों को अपने हाथ खोने पड़ते हैं। उसके बाद ऐसा कोई चारा नहीं, जिससे दोबारा से मरीज के हाथ आ जाएं, लेकिन हाथ ट्रांसप्लांट इस दिशा में एक उम्मीद की किरण हैं। इसमें करीब दस से 15 लाख रुपये का खर्च आता है।