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रिसर्च में खुलासा : आठ साल में 904 शोध संस्थानों ने 1961 पेटेंट करवाए, समाज को कोई फायदा नहीं

Thu, 28 Jan 2021 01:02 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 28 Jan 2021 01:02 PM IST
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Research institutes got 1961 patents in eight years, but could not be commercialized.
वैज्ञानिक अमनदीप और ममता भारद्वाज। - फोटो : फाइल फोटो

चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी के दो वैज्ञानिकों ने अपने शोध के जरिए बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने शोध में बताया है कि 904 शोध संस्थानों ने आठ साल में 1961 पेटेंट करवाए, लेकिन उनको कमर्शियल नहीं करवा पाए। यानी उनका शोध समाज के विकास में काम नहीं आ सका जबकि एजेंसी और सरकारों के जरिए जो शोध फंड मिलता है, उस शोध के जरिए समाज आदि को लाभ पहुंचाना होता है। 

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904 संस्थानों में से 20 फीसदी ने कामर्शियल प्रयोग के लिए फार्म 27 भरा है। हैरत की बात ये है कि भारत सरकार में बैठे कंट्रोलर जनरल कार्यालय की ओर से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई जबकि नियमों का उल्लंघन करने पर छह साल की सजा व दस लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। 
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इस तरह आगे बढ़ा शोध 
सेंटर फॉर पॉलिसी की वरिष्ठ वैज्ञानिक ममता भारद्वाज, यहीं पर काम कर चुकीं साइंटिफिक ऑफिसर अमनदीप संधू ने देशभर के 904 संस्थानों के पेटेंट व उनकी वर्तमान स्थिति पर शोध किया। इसमें 351 हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट व 553 नेशनल रिसर्च लैब को शामिल किया गया। रिसर्च टीम ने वर्ष 2010 से लेकर दिसंबर 2017 तक के इन शिक्षण संस्थानों के पेटेंट देखे। आठ साल में 1961 पेटेंट जारी किए गए, जिनमें से 20 से 22 फीसदी ही संस्थानों ने इनका कॉमर्शियल प्रयोग के लिए फार्म 27 भरा। पेटेंट मिलने के बाद कामर्शियल प्रयोग बहुत जरूरी है ताकि समाज को उस शोध से लाभ मिल सके। 
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ये पाया शोध में.. 
शोध में पाया गया है कि यूनिवर्सिटी व अन्य शिक्षण संस्थान केवल रिसर्च व पेटेंट लेने तक ही काम कर रहे हैं। उसके आगे की तैयारी नहीं करते। इंडिया पेटेंट ऑफिस की वेबसाइट से लिए गए डाटा से यह भी सामने आया है कि पेटेंट आदि करवाने के बाद संस्थान आगे की कार्रवाई न करने से पिछड़ रहे हैं। आईआईटी कानपुर, मुंबई और मद्रास में पेटेंट पर बेहतर कार्य हो रहा है। 


सीएसआईओ, आईसीआरओ, सीएसआईआर, इसरो आदि संस्थान भी मानकों का पालन कर रहे हैं। शोध टीम ने यह भी देखा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले शिक्षण संस्थानों पर कितनी कार्रवाई हुई, जिसमें पाया कि अधिकतर पर कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। शोध में कई अन्य खुलासे भी हुए हैं। इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी नई दिल्ली को भेजी गई है।

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