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जज्बाः 48 घंटे बाद बोरवेल से सकुशल बच्चे को बाहर निकाला, नदीम को वेंटिलेटर पर रखा गया

Sat, 23 Mar 2019 01:37 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sat, 23 Mar 2019 01:37 AM IST
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Rescue operation for 18 month old boy fell into 60 feet deep borewell in hisar of haryana
सेना ने किया मासूम का सकुशल रेस्क्यू - फोटो : ANI

एनडीआरएफ की दो टीमों के 30 सदस्य, आर्मी के 55 जवान, पुलिस के 60 जवान, 30 प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी, 7 जेसीबी, 15 ट्रैक्टर, एक फायर ब्रिगेड और दो जनरेटर तथा ग्रामीणों के सहयोग से 48 घंटे और 15 मिनट बाद नदीम का नया जन्म हुआ। नदीम 20 मार्च को 5:05 बजे 60 फुट गहरे बोरवेल में गिर गया था और शुक्रवार शाम 5:20 बजे उसे सकुशल बाहर निकाल लिया गया। उसे तुरंत एंबुलेंस में अग्रोहा मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। उसके पिता आजम और माता गुलशन साथ गए हैं। 

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48 घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान प्रशासन को भी कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा। बोरवेल के समीप करीब 20 फुट दूर से गड्ढा खोदना शुरू किया गया। करीब 48 फुट खोदने के बाद गुरुवार को मिट्टी ढह गई। इस बीच तीन बार यह भी हुआ कि अभियान के दौरान प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी और पुलिस कर्मियों में हलचल के चलते यह लगा कि नदीम कुछ ही पलों में बाहर आने वाला है, लेकिन पलभर में ही उसके आने की उम्मीद धुंधली हो जाती। 
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शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे यह कंफर्म हो गया कि नदीम को किसी भी वक्त बाहर निकाला जा सकता है, लेकिन तभी पता चला कि गहरा गड्ढा खोदने के बाद जो सुरंग बनाई जानी थी, वह गलत दिशा की तरफ चली गई। इसके बाद वास्तविक लोकेशन की पहचान के लिए एचडीडी ट्रैकर मशीन मंगाई गई, जो अभियान की सफलता का सूत्रधार बनी।

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5:05 बजे बोरवेल में गिरा था नदीम

Rescue operation for 18 month old boy fell into 60 feet deep borewell in hisar of haryana
हिसार में बोरवेल में फंसे बच्चे का रेस्क्यू - फोटो : ANI

नदीम के पिता आजम अली ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि 20 मार्च को नदीम अपनी तीन बहनों, एक भाई और एक चाचा के लड़के के साथ बेर खाने के लिए गया। खेलते-खेलते वह उसमें गिर गया। जब बच्चे चिल्लाए तो उनकी आवाज सुनकर मैं और नदीम की मां गुलशन वहां दौड़े-दौड़े गए। बोरवेल में गिरने की बात सुनते ही गुलशन बेहोश होकर गिर गई।

आजम के अनुसार उसने बोरवेल में नदीम-नदीम आवाज लगाई तो नदीम के रोने की आवाज आई। उसने बताया कि नदीम पौना घंटा रोता रहा। उसके बाद रोने की आवाज बंद हो गई थी। सूचना के करीब आधे घंटे बाद एंबुलेंस और प्रशासनिक सहायता मौके पर पहुंच गई थी। 

गुरुवार का घटनाक्रम
गुरुवार शाम तक करीब 48 फुट गड्ढा खोदा गया। रात को करीब 12 बजे मिट्टी वापस ढह गई। अंदर नमी होने के कारण मशीन ने काम करना बंद कर दिया, जिस कारण मिट्टी खुदाई का काम हाथ से भी किया गया। करीब 300 युवा मिट्टी बाहर निकालने के लिए रात भर जुटे रहे और तसलों से मिट्टी बाहर पहुंचाते रहे। 

शुक्रवार का घटनाक्रम
शुक्रवार सुबह 9 बजे करीब 54 फुट तक खुदाई हो चुकी थी। उसके बाद जब बोरवेल की तरफ सुरंग खोदी जानी थी तो वह 4 बाई की सुरंग 26 फुट तक खोदी, जिसके बाद पता चला कि गलत दिशा में खुदाई चली गई है। दरअसल जिस जीपीएस सिस्टम का सहारा लिया जा रहा था, वह 20 मीटर तक की लोकेशन देता है, जिससे खुदाई का कार्य भटक गया। 

पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा है नदीम

Rescue operation for 18 month old boy fell into 60 feet deep borewell in hisar of haryana
सेना ने मासूम नदीम को बाहर निकाला - फोटो : ANI

इसके बाद एचडीडी ट्रैकर मशीन मंगाई गई, जिसने सही दिशा दिखाई। इसके बावजूद जब टीम खुदाई करते हुए नदीम के समीप पहुंची तो गीली मिट्टी आने की वजह से खुदाई का कार्य हाथ से करना पड़ा, जिसमें समय लगा। आखिरकार 5 बजकर 20 मिनट पर नदीम को बाहर निकाला जा सका। 

बिस्कुट खाए और फ्रूटी पी थी
नदीम को प्रशासन द्वारा गुरुवार सुबह 9:12 बजे बिस्कुट भेज गए थे, जिसमें से उसने कुछ खाए। इसके बाद दोपहर 2:25 बजे फ्रूटी भेजी, वह भी उसने पी। शुक्रवार को प्रशासन द्वारा खाने के लिए एक बार सामान भेजा गया, लेकिन उसने नहीं खाया। उसके बाद प्रशासन ने खाने का सामान नहीं भेजा। इस बारे में डीसी अशोक कुमार मीणा का कहना था कि बार-बार सामान भेजने से मिट्टी गिरने का भी खतरा है, जिस कारण दोबारा नहीं भेजा गया, क्योंकि हम उसके नजदीक भी पहुंच गए थे। 

तीन बार हुआ कि अब आया बाहर
अभियान के दौरान ऐसा तीन बार हुआ कि जब लगा नदीम बस अब बाहर आने वाला है, लेकिन किसी न किसी अड़चन की वजह से उम्मीदें टूट जाती। गुरुवार शाम को 7:00 बजे उम्मीद जगी कि प्रशासन नदीम के निकट पहुंच गया है और जल्द ही उसे बाहर निकाल लिया जाएगा, लेकिन जैसे-जैसे उसके नजदीक पहुंचे तो मिट्टी खुदाई का काम बेहद धीमा हो गया, जिससे वक्त लगा। 

उसके बाद शुक्रवार सुबह 9:00 बजे एक बार फिर नदीम के जल्द बाहर आने की सूचना चली, लेकिन फिर पता चला कि खुदाई गलत दिशा में चली गई है। इसके बाद शुक्रवार शाम 4:10 बजे भी यह उम्मीद जगी कि नदीम बस 5 मिनट में बाहर आने वाला है, लेकिन यहां भी खुदाई आड़े आई। अंदर मिट्टी गीली होने की वजह से औजारों से खुदाई बंद करनी पड़ी ताकि नदीम को किसी प्रकार का नुकसान न हो और खुदाई का काम हाथों से करना पड़ा। आखिरकार 5:20 बजे नदीम को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। 

अग्रोहा मेडिकल कॉलेज भेजा नदीम को

Rescue operation for 18 month old boy fell into 60 feet deep borewell in hisar of haryana
सकुशल रेस्क्यू के बाद जवान के साथ खुशी मनाते ग्रामीण

बाहर निकालने के बाद नदीम को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया, जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार नदीम को तीन दिन तक अस्पताल में रखा जाएगा और सामान्य स्थिति होने के बाद उसे छुट्टी दे दी जाएगी। नदीम के साथ उसके पिता आजम और माता गुलशन भी साथ गए हैं।

डीसी ने कहा- नदीम बहादुर बच्चा 
राहत और बचाव के लिए एचडीडी ट्रैकर स्पेशल तौर पर मंगवाया गया था, जिससे आसानी से सही जगह पर पहुंचा जा सके। इससे पहले हमें ट्रैक करने में दिक्कत आ रही थी। भारतीय सेना, एनडीआरएफ, हिसार पुलिस, अधिकारियों और ग्रामीणों ने इस अभियान को सफल बनाने में भरपूर सहयोग दिया, जिस कारण हम नदीम को सकुशल बाहर निकाल पाए। ये सभी बधाई के पात्र हैं। नदीम बहादुर बच्चा है, जिसने 48 घंटे अंदर रहने के बावजूद हौसला नहीं छोड़ा। -अशोक कुमार मीणा, डीसी, हिसार। 

बोरवेल खुला छोड़ा तो खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी : एसपी 
इस घटना के बाद अब सभी लोग सचेत हो जाएं और बोरवेल खुले रखने की गलती न दोहराएं। यह गैर कानूनी है। इस प्रकार से बोरवेल को खुला छोड़ने से किसी की जान को खतरा पैदा हो जाता है और प्रशासन के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए भी इतनी गंभीर समस्या पैदा हो जाती है। इलाके में अब अभियान चलाया जाएगा और जितने भी बोरवेल खुला छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -शिव चरण, एसपी, हिसार। 

एचडीडी ट्रैकर से नदीम को सुरक्षित निकालने में मदद मिली :  कैप्टन 
हमारा काम देशवासियों की सुरक्षा करना और उनकी जान बचाना है। इसमें हम सफल रहे हैं। ग्रामीणों ने भरपूर सहयोग किया है। कंकरीली मिट्टी थी, जिस कारण खुदाई में कठिनाई आई। इसके अलावा सही दिशा न मिल पाने के कारण गलत दिशा में खुदाई चल पड़ी थी, लेकिन एचडीडी ट्रैकर आने के बाद हमें सही लोकेशन मिल गई, जिसकी वजह से हम नदीम को सुरक्षित बाहर निकाल सके। -कैप्टन सुमित चड्ढा, भारतीय सेना, आर्मी कैंट, हिसार। 

क्या बोले सरपंच प्रतिनिधि 

जितना संभव सहयोग हमने किया। हमारा उद्देश्य बच्चे की जान बचाना था। इसके लिए प्रशासन द्वारा जो सहयोग मांगा गया, वह दिया। पूरा गांव बच्चे की जान बचाने के लिए एकजुट था और दिन-रात प्रयासरत था। हमें इस बात की खुशी है कि बच्चा सकुशल बाहर आ गया। इसके लिए हम सेना, प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस प्रशासन के आभारी हैं। - महेंद्र सिंह, सरपंच प्रतिनिधि, बालसमंद, हिसार।

नदीम आईसीयू में, वेंटिलेटर पर रखा गया

Rescue operation for 18 month old boy fell into 60 feet deep borewell in hisar of haryana
नदीम को वेंटिलेटर पर रखा गया।

नदीम को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन विभाग में लाया गया। यहां पहले से तैयार खड़ी आठ डॉक्टरों की टीम बच्चे के इलाज में जुट गई। सांस लेने में तकलीफ होने पर मासूम नदीम को आईसीयू में भेज दिया गया, जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। पुलिस टीम से आपातकालीन विभाग के सीएमओ डॉ. राजीव चौहान ने मासूम नदीम को रिसीव किया।

 कॉलेज डायरेक्टर डॉ. गोपाल सिंघल ने बताया कि नदीम के स्वास्थ्य की जांच के लिए पहले से ही शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश सहारण की अध्यक्षता में आठ डॉक्टरों की टीम गठित कर दी गई थी। इस टीम में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आरपी सिंगल, पैथोलॉजिस्ट डॉ. अजय कोचर, न्यूरो सर्जन डॉ. ईशु बिश्नोई, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शेखर टाक व डॉ. निशीत शर्मा, सर्जन डॉ. निपुण चौधरी व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप को शामिल किया गया। 

मेडिकल अधीक्षक डॉ. गीतिका ने बताया कि बच्चे की जांच कर ली गई है। नदीम को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और निमोनिया की भी शिकायत भी पाई गई है। इस कारण अभी बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया है। फिलहाल उसे 36 घंटे तक निगरानी में रखा जाएगा। 12 घंटे बाद पहला मेडिकल बुलेटिन जारी किया जाएगा।

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