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हरियाणा विस चुनावः रेवाड़ी में लालू के समधी कैप्टन की प्रतिष्ठा, केंद्रीय मंत्री राव का रसूख दांव पर

Fri, 11 Oct 2019 02:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमित विश्वकर्मा, रेवाड़ी
अमित विश्वकर्मा, रेवाड़ी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 11 Oct 2019 02:19 AM IST
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Reputation of Lalu kin captain and Union Minister Raos image at stakes in Rewari seat
demo pic - फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय मंत्री व हरियाणा के दूसरे सीएम के पुत्र राव इंद्रजीत सिंह और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के समधी व छह बार विधायक रहे पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव परिवारों के बीच 1967 से चली आ रही सियासी लड़ाई 52 साल बाद अब तीसरी पीढ़ी के बीच आ खड़ी हुई है। 

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रेवाड़ी विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर लालू के दामाद व कैप्टन के बेटे चिरंजीव राव पहली बार चुनाव मैदान में हैं। बहनोई को जीत दिलवाने के लिए बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी रेवाड़ी की धूल फांक रहे हैं। 
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वहीं पूर्व मुख्यमंत्री बिरेंद्र सिंह के पुत्र व भाजपा सरकार में लगातार दूसरी बार केंद्रीय राज्य मंत्री बने राव इंद्रजीत अपने कट्टर समर्थक सुनील को जीत दिलवाने के लिए पहली बार बेटी आरती को लेकर शहर की गलियों में नुक्कड़ सभाएं तक करने को मजबूर हैं।
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राव 2014 से रेवाड़ी विस सीट पर अपनी बेटी आरती के लिए टिकट मांग रहे हैं, लेकिन भाजपा के परिवारवाद फार्मूले के चलते 2019 में भी बेटी के लिए टिकट नहीं पा सके। दोनों परिवारों में तीसरी पीढ़ी की राजनीति गोटियां फिट करने के दवाब के चलते प्रतिष्ठा व रसूख दोनों दांव पर लगा हुआ है। क्योंकि कैप्टन व राव इंद्रजीत दोनों अपने राजनीति करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं। 

इधर, 2014 में इस सीट पर लगातार 4 हार झेलने के बाद पहली बार भाजपा की टिकट पर विधायक बने रणधीर सिंह कापड़ीवास टिकट कटने के बाद बागी बन दोनों परिवारों के लिए कड़ी चुनौती बने हुए हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी से राजेश शर्मा, बहुजन समाज पार्टी से प्रीमत सिंह जांगड़ा, इनेलो से कमला शर्मा व जेजेपी से मलखान सिंह चुनाव मैदान में हैं। इसके अलाव स्वराज इंडिया पार्टी से जिला प्रमुख मंजूबाला भी चुनाव लड़ रहीं है।

1967 में कैप्टन के पिता अभय को राव बिरेंद्र की बहन ने हराया

हरियाणा गठन के बाद पहली बार हुए चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर राव इंद्रजीत सिंह के पिता पूर्व मुख्यमंत्री राव बिरेंद्र की बहन सुमित्रा देवी कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीती थीं। उन्होंने भारतीय जनसंघ की टिकट पर चुनाव लड़ रहे कैप्टन अजय यादव के पिता राव अभय सिंह को 5 हजार वोटों से हराया था। 1968 में भी सुमित्रा यादव रेवाड़ी सीट से जीती, वहीं राव अभय तीसरे नंबर पर पहुंच गए। लेकिन 1972 के चुनाव में राव अभय सिंह ने राव बिरेंद्र की विशाल हरियाणा पार्टी के उम्मीदवार को हराया।

1982 में आज तक एक बार निर्दलीय जीत
रेवाड़ी सीट पर अब तक हुए चुनाव में महज एक बार 1982 में कर्नल राम सिंह निर्दलीय चुनाव जीते हैं। रेवाड़ी सीट का इतिहास रहा है कि पहली बार चुनाव मैदान में उतरने वाले निर्दलीय उम्मीदवार को रेवाड़ी की जनता ने जीत के करीब जरुर पहुंचाया है।

भाजपा प्रत्याशी सुनील यादव
मजबूत पक्ष : राव इंद्रजीत समर्थक होना है। प्रदेश नेतृत्व के न चाहते हुए भी राव इंद्रजीत बेटी को टिकट नहीं मिलने पर उनको टिकट दिलाने में कामयाब रहे।
कमजोर पक्ष: राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियों से दूरी व लोगों से जुड़ाव नहीं। पहली बार किसी चुनाव में उतरे हैं। पूरी तरह से राव इंद्रजीत पर निर्भर हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी चिरंजीव राव
मजबूत पक्ष : रेवाड़ी विधानसभा सीट पर चिरंजीव के दादा राव अभय सिंह एक बार व उनके पिता कैप्टन अजय यादव 6 बार लगातार विधायक रहे हैं।
कमजोर पक्ष : चिरंजीव राव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। पिता के कार्यकाल के दौरान लोगों से दूरी व लोगों से सीधा जुड़ाव नहीं होना कमजोर पक्ष है।

निर्दलीय प्रत्याशी रणधीर सिंह कापड़ीवास
मजबूत पक्ष : लगातार पांच विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 2014 के विस चुनाव में भाजपा की टिकट पर 80 हजार से ज्यादा मत लेकर विधायक बने। लोगों से सीधा जुड़ाव।
कमजोर पक्ष : वर्षों से राजनीतिक में होने के बावजूद कोई भी गॉड फादर नहीं होना उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है।

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