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अलर्टः गुरुग्राम में ग्राउंड वाटर लेवल का बुरा हाल, दोहन न रुका तो हरियाणा में होगा जलसंकट
Sun, 28 Apr 2019 01:14 PM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 28 Apr 2019 01:14 PM IST
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गुरुग्राम खंड का ग्राउंड वाटर लेवल का बुरा हाल है। 1980 में यहां पानी तीन से 20 मीटर के मध्य मिल जाता था, लेकिन अब वाटर लेवल 108 मीटर नीचे तक पहुंच गया है। धरती की कोख दोहन से खाली हो रही है। यही हाल रहा तो अगले छह सालों में पानी का बड़ा संकट खड़ा होगा। यह खुलासा सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के सर्विस साइंटिस्ट डॉ. संजय पांडेय के रिसर्च में हुआ है।
डॉ. पांडेय ने पंजाब विश्वविद्यालय के भूगर्भ विभाग के प्रो. नवल किशोर व डॉ. माधुरी ऋषि के अधीन पीएचडी की है, उन्हें 28 अप्रैल को उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पीएचडी की उपाधि प्रदान करेंगे। सर्विस साइंटिस्ट ने भूमि जल प्रबंधन पर रिसर्च किया। इसके लिए गुरुग्राम खंड व सोहना खंड के 18 गांवों को चुना।
साथ ही यह भी देखना था कि बनाए गए कानूनों का भी कितना पालन यहां हो रहा है। सात साल तक चले रिसर्च में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। गुरुग्राम खंड का उद्योग विहार, डूंडाहेड़ा, डीएलएफ सोसाइटी आदि इलाकों में पानी 108 मीटर तक पहुंच गया। पत्थर का स्टेटा आ गया। यह पानी पीने योग्य भी नहीं माना जाता और पानी बहुत कम होता है।
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इसका प्रमुख कारण सामने आया है कि यह इलाके ग्राउंड वाटर ट्रफ बन गए हैं, जो आसपास के इलाकों का पानी भी खींच लिए हैं। उन्होंने बताया कि फरीदाबाद में भी पानी का संकट गहराता जा रहा है।
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डॉ. पांडेय ने पंजाब विश्वविद्यालय के भूगर्भ विभाग के प्रो. नवल किशोर व डॉ. माधुरी ऋषि के अधीन पीएचडी की है, उन्हें 28 अप्रैल को उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पीएचडी की उपाधि प्रदान करेंगे। सर्विस साइंटिस्ट ने भूमि जल प्रबंधन पर रिसर्च किया। इसके लिए गुरुग्राम खंड व सोहना खंड के 18 गांवों को चुना।
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साथ ही यह भी देखना था कि बनाए गए कानूनों का भी कितना पालन यहां हो रहा है। सात साल तक चले रिसर्च में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। गुरुग्राम खंड का उद्योग विहार, डूंडाहेड़ा, डीएलएफ सोसाइटी आदि इलाकों में पानी 108 मीटर तक पहुंच गया। पत्थर का स्टेटा आ गया। यह पानी पीने योग्य भी नहीं माना जाता और पानी बहुत कम होता है।
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इसका प्रमुख कारण सामने आया है कि यह इलाके ग्राउंड वाटर ट्रफ बन गए हैं, जो आसपास के इलाकों का पानी भी खींच लिए हैं। उन्होंने बताया कि फरीदाबाद में भी पानी का संकट गहराता जा रहा है।
सरकार को दिए ये सुझाव
- जिस तरह गुरुग्राम में यमुना कैनाल के जरिये पानी प्रबंधन किया जा रहा है, उसी तर्ज पर अरावली की पहाड़ियों से आने वाले वर्षा जल को एकत्रित किया जाए और उसका ट्रीटमेंट कर प्रयोग करें। इससे काफी हद तक लोगों को लाभ मिलेगा और वह ग्राउंड से वाटर नहीं निकालेंगे।
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर पूरी तरह काम नहीं हो पा रहा है। बारिश का पानी बर्बाद हो रहा है। इस सिस्टम को ठीक किया जाए।
- गाड़ियां धोने के लिए अधिक पानी जमीन से निकाला जा रहा है, इसको कम किया जाए।
- ग्राउंड वाटर बिल 2017 को पूरी तरह प्रभावी बनाया जाए।
- घरों से निकलने वाले गंदे पानी का ट्रीटमेंट हर सोसाइटी में हो और उस पानी का प्रयोग ग्रीनबेल्ट व टॉयलेट फ्लैशिंग के लिए किया जाए।
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर पूरी तरह काम नहीं हो पा रहा है। बारिश का पानी बर्बाद हो रहा है। इस सिस्टम को ठीक किया जाए।
- गाड़ियां धोने के लिए अधिक पानी जमीन से निकाला जा रहा है, इसको कम किया जाए।
- ग्राउंड वाटर बिल 2017 को पूरी तरह प्रभावी बनाया जाए।
- घरों से निकलने वाले गंदे पानी का ट्रीटमेंट हर सोसाइटी में हो और उस पानी का प्रयोग ग्रीनबेल्ट व टॉयलेट फ्लैशिंग के लिए किया जाए।