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राम रहीम, डेरा सच्चा सौदा और पंचकूला हिंसा को लेकर 5 ऐसी नई जानकारियां, पता होनी चाहिए आपको
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा)
Updated Sat, 25 Aug 2018 03:03 PM IST
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Ram Rahim
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पंचकूला हिंसा को एक साल पूरा होने के मौके पर राम रहीम, डेरा सच्चा सौदा को लेकर कुछ ऐसी जानकारियां सामने आई हैं, जो आपको जरूर पता होनी चाहिए। जानिए केस में क्या चल रहा है...
हिंसा के 365 दिन बाद भी नहीं भरे जख्म, करोड़ों के नुकसान की नहीं हुई भरपाई
साध्वियों से दुष्कर्म मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला में भड़की ह़ंसा के जख्म अभी बाकी हैं। हिंसा में हुए करोड़ों के नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है। इंतजार के बाद अपने ओवी वैन, वाहन, रेस्तरां, प्रॉपर्टी खो चुके लोगों ने इन्हें फिलहाल दुरुस्त तो करवा लिए गए, लेकिन हिंसा के दौरान मिले जख्मों के निशां अभी बाकी हैं। हिंसा मामले में पुलिस ने कुल 177 एफआईआर दर्ज की, जिनमें 1137 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 10 मामलों में दर्ज एफआईआर में नामजद करीब 100 आरोपियों से देशद्रोह की धारा इसलिए हटा दी गई, क्योंकि पुलिस के पास पुख्ता सबूत नहीं थे। दो मामलों में आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
धारा 144 के उल्लंघन के बाद हिंसा पर उतारू हो गई थी भीड़
पिछले साल 25 अगस्त को पंचकूला की सीबीआई अदालत की ओर से साध्वी यौन शोषण मामले में फैसला सुनाने के बाद हिंसा की आशंका बनी हुई थी। एहतियातन धारा 144 भी लगा दी गई थी, लेकिन उसकी अनदेखी भारी पड़ी। एक-एक कर समर्थक इकट्ठा होते गए और फैसले की घड़ी से पहले पूरा शहर हजारों समर्थकों से अट गया। आखिरकार, हालात इस कदर बिगड़ गए कि अदालत के फैसले के बाद उग्र हुए लोगों को काबू करना मुश्किल हो गया और हिंसा भड़क गई। हिंसा की आग में ओवी वैन, फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी, मीडिया कर्मियों की कार और दर्जनों टू व्हीलर भी उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिए।
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सैकड़ों लोगों को है मुआवजे का इंतजार है
भीड़ ने दर्जनों वाहन जला दिए, जिनमें मीडिया कर्मियों के वाहनों की संख्या सर्वाधिक थी। घटना के तत्काल बाद सरकार ने जल्द से जल्द मुआवजे का भरोसा तो दे दिया, लेकिन अब तक मुआवजा मिलने का सैकड़ों लोगों को इंतजार है। पंचकूला में हुई हिंसा के दौरान सेक्टर-16 में एचडीएफसी बैंक को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया था जबकि अग्रवाल भवन में तोड़फोड़ के बाद शव वाहन, एंबुलेंस के अलावा दूसरी गाड़ियां भी जला दी।
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हिंसा के 365 दिन बाद भी नहीं भरे जख्म, करोड़ों के नुकसान की नहीं हुई भरपाई
साध्वियों से दुष्कर्म मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला में भड़की ह़ंसा के जख्म अभी बाकी हैं। हिंसा में हुए करोड़ों के नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है। इंतजार के बाद अपने ओवी वैन, वाहन, रेस्तरां, प्रॉपर्टी खो चुके लोगों ने इन्हें फिलहाल दुरुस्त तो करवा लिए गए, लेकिन हिंसा के दौरान मिले जख्मों के निशां अभी बाकी हैं। हिंसा मामले में पुलिस ने कुल 177 एफआईआर दर्ज की, जिनमें 1137 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 10 मामलों में दर्ज एफआईआर में नामजद करीब 100 आरोपियों से देशद्रोह की धारा इसलिए हटा दी गई, क्योंकि पुलिस के पास पुख्ता सबूत नहीं थे। दो मामलों में आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
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धारा 144 के उल्लंघन के बाद हिंसा पर उतारू हो गई थी भीड़
पिछले साल 25 अगस्त को पंचकूला की सीबीआई अदालत की ओर से साध्वी यौन शोषण मामले में फैसला सुनाने के बाद हिंसा की आशंका बनी हुई थी। एहतियातन धारा 144 भी लगा दी गई थी, लेकिन उसकी अनदेखी भारी पड़ी। एक-एक कर समर्थक इकट्ठा होते गए और फैसले की घड़ी से पहले पूरा शहर हजारों समर्थकों से अट गया। आखिरकार, हालात इस कदर बिगड़ गए कि अदालत के फैसले के बाद उग्र हुए लोगों को काबू करना मुश्किल हो गया और हिंसा भड़क गई। हिंसा की आग में ओवी वैन, फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी, मीडिया कर्मियों की कार और दर्जनों टू व्हीलर भी उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिए।
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सैकड़ों लोगों को है मुआवजे का इंतजार है
भीड़ ने दर्जनों वाहन जला दिए, जिनमें मीडिया कर्मियों के वाहनों की संख्या सर्वाधिक थी। घटना के तत्काल बाद सरकार ने जल्द से जल्द मुआवजे का भरोसा तो दे दिया, लेकिन अब तक मुआवजा मिलने का सैकड़ों लोगों को इंतजार है। पंचकूला में हुई हिंसा के दौरान सेक्टर-16 में एचडीएफसी बैंक को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया था जबकि अग्रवाल भवन में तोड़फोड़ के बाद शव वाहन, एंबुलेंस के अलावा दूसरी गाड़ियां भी जला दी।
ये हैं वांटेड व भगोड़े
Ram Rahim
पांच लाख का इनामी आदित्य इंसा, पचास हजार का इनामी अमरीक, पचास हजार का इनामी नवदीप कुमार, इकबाल, जसबीर सिंह, अभिजीत शंकर, ओमपाल शर्मा, परामूत, अर्ष अरोड़ा, विजय कुमार, हरदम, पीआर जैन, परगट सिंह, किरपाल मेहता, चरण सिंह, सतीश मेहता, सेवा सिंह, अरविंद, अमरीक, संजीव, सिंगला, जसवंत, अनिल, रंजन व कमल।
अभी भी 10 आरोपियों की नहीं हुई गिरफ्तारी
पीआर नैन, सुखपाल, अभिजीत सहित एफआईआर नंबर-345 में 10 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकि है। हिंसा मामले की साजिश और देशद्रोह मामले में हनीप्रीत सहित अन्य आरेपियों के आरोपियों के खिलाफ इसी एफआईआर में मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा तीन-चार अन्य एफआईआर में 100 से अधिक आरेपियों के खिलाफ लगी देशद्रोंह की धारा हटा दी गई है।
मास्टरमाइंड आदित्य इंसा एक साल बाद भी नहीं हुआ गिरफ्तार
हिंसा की साजिश को अंजाम तक पहुंचाने वाले मास्टरमाइंड, भगौड़ा और पांच लाख रुपये के इनामी आदित्य इंसा को पुलिस एक साल बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के अलग अलग शहरों में छापेमारी की, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका। डेरा का बेहद नजदीकी और डेरा के प्रवक्ता होने के साथ साथ हिंसा की साजिश के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी न होने पर पहले मोस्ट वांटेड लिस्ट में उसका नाम शामिल किया गया। इसके बाद उसके नाम इनाम की राशि बढ़ाते हुए पांच लाख रुपये तक कर दी गई।
लेकिन अब पूरे प्रदेश की पुलिस उसे गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने जब डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी करार दिया, उसके बाद भड़की हिंसा में कुल 35-36 लोगों की मौतें हुई थी। लेकिन 17 अगस्त, 2017 को सिरसा स्थित डेरे में हुई बैठक में मौजूद हनीप्रीत समेत आदित्य इंसा सहित दर्जनों ऐसे डेरा के करीबी थे, जिन्होंने मिलकर इस साजिश को अंजाम तक पहुंचाया। हिंसा की इस साजिश में उपद्रवियों को भड़काया गया और हिंसा और आगजनी के लिए उन्हें लाखों की रकम भी बांटी गई।
अभी भी 10 आरोपियों की नहीं हुई गिरफ्तारी
पीआर नैन, सुखपाल, अभिजीत सहित एफआईआर नंबर-345 में 10 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकि है। हिंसा मामले की साजिश और देशद्रोह मामले में हनीप्रीत सहित अन्य आरेपियों के आरोपियों के खिलाफ इसी एफआईआर में मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा तीन-चार अन्य एफआईआर में 100 से अधिक आरेपियों के खिलाफ लगी देशद्रोंह की धारा हटा दी गई है।
मास्टरमाइंड आदित्य इंसा एक साल बाद भी नहीं हुआ गिरफ्तार
हिंसा की साजिश को अंजाम तक पहुंचाने वाले मास्टरमाइंड, भगौड़ा और पांच लाख रुपये के इनामी आदित्य इंसा को पुलिस एक साल बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के अलग अलग शहरों में छापेमारी की, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका। डेरा का बेहद नजदीकी और डेरा के प्रवक्ता होने के साथ साथ हिंसा की साजिश के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी न होने पर पहले मोस्ट वांटेड लिस्ट में उसका नाम शामिल किया गया। इसके बाद उसके नाम इनाम की राशि बढ़ाते हुए पांच लाख रुपये तक कर दी गई।
लेकिन अब पूरे प्रदेश की पुलिस उसे गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने जब डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी करार दिया, उसके बाद भड़की हिंसा में कुल 35-36 लोगों की मौतें हुई थी। लेकिन 17 अगस्त, 2017 को सिरसा स्थित डेरे में हुई बैठक में मौजूद हनीप्रीत समेत आदित्य इंसा सहित दर्जनों ऐसे डेरा के करीबी थे, जिन्होंने मिलकर इस साजिश को अंजाम तक पहुंचाया। हिंसा की इस साजिश में उपद्रवियों को भड़काया गया और हिंसा और आगजनी के लिए उन्हें लाखों की रकम भी बांटी गई।
25 अगस्त 2017 को ऐसे बिगड़े थे हालात
Ram Rahim
- फोटो : File Photo
डेरा सच्चा सौदा प्रकरण को लेकर सिरसा में हुई हिंसा को एक वर्ष हो गया है। 25 अगस्त 2017 के दिन जो कुछ हुआ वो आज भी सिरसावासियों के जेहन में है। इस दिन सीबीआई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जैसे ही सीबीआई कोर्ट ने साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी करार दिया तो सिरसा में हालात बिगड़ गए। डेरा सच्चा सौदा में मौजूद हजारों डेरा प्रेमी लाठियां लेकर डेरा से बाहर निकल आए।
डेरा प्रेमियों ने सबसे पहले डेरा के पास कवरेज के लिए खड़े मीडिया कर्मियों पर हमला बोल दिया। एक न्यूज चैनल की ओबी वैन को तोड़ दिया। मीडिया को निशाना बनाने के बाद डेरा प्रेमियों ने डेरा से स्टे गांव बेगू में बिजली घर को आग लगा दी। पुलिस व अर्ध सैनिक बलों ने डेरा प्रेमियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन इसका हजारों डेरा प्रेमियों पर कोई असर नहीं हुआ। डेरा प्रेमी हाथों में हथियार व पेट्रोल बम लेकर बेगू रोड स्थित मिल्क प्लॉट में घुस गए और उसमें आग लगा दी।
डेरा प्रेमियों के तांडव देखते हुए सिरसा वासी बुरी तरह सहम गए। डेरा के आसपास बनी कॉलोनियों से डेरा प्रेमी घरों से बाहर आए और सुरक्षा बलों पर पथराव करने लगे। स्थिति बेकाबू होते देख सुरक्षा बलों को फायरिंग करनी पड़ी। इस घटना के बाद उग्र डेरा प्रेमियों ने बेगू स्थित ग्रामीण बैंक के एटीएम को फूंक दिया। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े तो डेरा प्रेमियों ने पुलिस व अर्ध सैनिक बलों पर फायरिंग कर दी। जवाब में सुरक्षा बलों ने भी फायरिंग की।
डेरा प्रेमियों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा बलों को इस क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा। इसके बाद प्रशासन ने हालात को काबू करने के लिए सेना को सिरसा बुला लिया। शाम पांच बजकर 40 मिनट पर सेना सिरसा पहुंची और मोर्चा संभाला। पूरे घटनाक्रम से लेकर 19 दिनों तक सिरसा में कर्फ्यू लगा रहा।
डेरा प्रेमियों ने सबसे पहले डेरा के पास कवरेज के लिए खड़े मीडिया कर्मियों पर हमला बोल दिया। एक न्यूज चैनल की ओबी वैन को तोड़ दिया। मीडिया को निशाना बनाने के बाद डेरा प्रेमियों ने डेरा से स्टे गांव बेगू में बिजली घर को आग लगा दी। पुलिस व अर्ध सैनिक बलों ने डेरा प्रेमियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन इसका हजारों डेरा प्रेमियों पर कोई असर नहीं हुआ। डेरा प्रेमी हाथों में हथियार व पेट्रोल बम लेकर बेगू रोड स्थित मिल्क प्लॉट में घुस गए और उसमें आग लगा दी।
डेरा प्रेमियों के तांडव देखते हुए सिरसा वासी बुरी तरह सहम गए। डेरा के आसपास बनी कॉलोनियों से डेरा प्रेमी घरों से बाहर आए और सुरक्षा बलों पर पथराव करने लगे। स्थिति बेकाबू होते देख सुरक्षा बलों को फायरिंग करनी पड़ी। इस घटना के बाद उग्र डेरा प्रेमियों ने बेगू स्थित ग्रामीण बैंक के एटीएम को फूंक दिया। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े तो डेरा प्रेमियों ने पुलिस व अर्ध सैनिक बलों पर फायरिंग कर दी। जवाब में सुरक्षा बलों ने भी फायरिंग की।
डेरा प्रेमियों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा बलों को इस क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा। इसके बाद प्रशासन ने हालात को काबू करने के लिए सेना को सिरसा बुला लिया। शाम पांच बजकर 40 मिनट पर सेना सिरसा पहुंची और मोर्चा संभाला। पूरे घटनाक्रम से लेकर 19 दिनों तक सिरसा में कर्फ्यू लगा रहा।
मोस्टवांटेड तक नहीं पहुंच पाए पुलिस के लंबे हाथ
राम रहीम
हरियाणा पुलिस के लंबे हाथ पंचकूला हिंसा के मोस्टवांटेड, भगोड़ों और संदिग्धों तक अब भी नहीं पहुंच पाए हैं। सरकार की ओर से पूरे मामले की जांच और हिंसा भड़काने के आरोपियों की धरपकड़ के लिए गठित एसआईटी एक साल में गुरमीत राम रहीम के बेहद करीबी आदित्य इंसा को सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा पाई।
दो दर्जन से अधिक मोस्टवांटेड और भगोड़े व 25 संदिग्ध अब तक पुलिस की पहुंच से दूर हैं। पुलिस की ओर से मोस्टवांटेड आरोपियों पर पचास हजार रुपये का इनाम भी रखा गया, बावजूद किसी ने इनकी सूचना नहीं दी। दंगा भड़काने में शामिल पचास से अधिक आरोपियों की धरपकड़ के मामले में पुलिस आज भी खाली हाथ है।
एसआईटी के इन्हें पकड़ने में पूरी तरह फेल रहने पर ही सरकार ने अब एसटीएफ को कार्रवाई का जिम्मा सौंपा है। एसटीएफ को सभी मोस्टवांटेड-भगोड़ों को हर हाल में ढूंढ निकालने के निर्देश दिए गए हैं। एक साल पूरा होने से ठीक 15 दिन पहले ही पुलिस विभाग की ओर से हाईकोर्ट में इसका हलफनामा दिया गया। पुलिस के खुफिया तंत्र पर इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि सभी मोस्ट वांटेड और भगौड़े अपराधियों के अलावा संदिग्धों के वीडियो क्लिप भी हैं।
संदिग्धों में पांच महिलाएं भी शामिल हैं। जिन पर दंगा भड़काने से पहले एक्टिव रहने व हिंसा के दौरान हाथ में डंडे लेकर उपद्रव करने के आरोप हैं। संदिग्धों के वीडियो क्लिप से फोटो निकालकर हर जगह चश्पा करने के अलावा कई राज्यों में भी भेजी गईं, बावजूद आरोपी अभी तक पकड़ में नहीं आ पाए। ऐसा प्रतीत होता है कि दंगा भड़काने के आरोपी पुलिस कार्रवाई से भी दो कदम आगे हैं।
डेरे का प्रभाव भी कार्रवाई में बड़ी बाधा
सरकार के सामने मुश्किल यह है कि एक साल बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। डेरे का लगभग डेढ़ दर्जन सीटों पर सीधा प्रभाव है। ऐसे में सत्ता पक्ष पर उनके विधायकों का भी दबाव पुलिस कार्रवाई को लेकर अनेक बार पड़ता रहा है। हिंसा भड़काने में शामिल आरोपी और संदिग्ध भी कहीं राजनीतिक दबाव के कारण ही पुलिस गिरफ्त से दूर तो नहीं हैं, यह सवाल भी ऐसे में उठना लाजिमी है। चूंकि, डेरे के प्रभाव को आज भी कोई राजनीतिक दल सीधे तौर पर चुनौती देने को तैयार नहीं है।
दो दर्जन से अधिक मोस्टवांटेड और भगोड़े व 25 संदिग्ध अब तक पुलिस की पहुंच से दूर हैं। पुलिस की ओर से मोस्टवांटेड आरोपियों पर पचास हजार रुपये का इनाम भी रखा गया, बावजूद किसी ने इनकी सूचना नहीं दी। दंगा भड़काने में शामिल पचास से अधिक आरोपियों की धरपकड़ के मामले में पुलिस आज भी खाली हाथ है।
एसआईटी के इन्हें पकड़ने में पूरी तरह फेल रहने पर ही सरकार ने अब एसटीएफ को कार्रवाई का जिम्मा सौंपा है। एसटीएफ को सभी मोस्टवांटेड-भगोड़ों को हर हाल में ढूंढ निकालने के निर्देश दिए गए हैं। एक साल पूरा होने से ठीक 15 दिन पहले ही पुलिस विभाग की ओर से हाईकोर्ट में इसका हलफनामा दिया गया। पुलिस के खुफिया तंत्र पर इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि सभी मोस्ट वांटेड और भगौड़े अपराधियों के अलावा संदिग्धों के वीडियो क्लिप भी हैं।
संदिग्धों में पांच महिलाएं भी शामिल हैं। जिन पर दंगा भड़काने से पहले एक्टिव रहने व हिंसा के दौरान हाथ में डंडे लेकर उपद्रव करने के आरोप हैं। संदिग्धों के वीडियो क्लिप से फोटो निकालकर हर जगह चश्पा करने के अलावा कई राज्यों में भी भेजी गईं, बावजूद आरोपी अभी तक पकड़ में नहीं आ पाए। ऐसा प्रतीत होता है कि दंगा भड़काने के आरोपी पुलिस कार्रवाई से भी दो कदम आगे हैं।
डेरे का प्रभाव भी कार्रवाई में बड़ी बाधा
सरकार के सामने मुश्किल यह है कि एक साल बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। डेरे का लगभग डेढ़ दर्जन सीटों पर सीधा प्रभाव है। ऐसे में सत्ता पक्ष पर उनके विधायकों का भी दबाव पुलिस कार्रवाई को लेकर अनेक बार पड़ता रहा है। हिंसा भड़काने में शामिल आरोपी और संदिग्ध भी कहीं राजनीतिक दबाव के कारण ही पुलिस गिरफ्त से दूर तो नहीं हैं, यह सवाल भी ऐसे में उठना लाजिमी है। चूंकि, डेरे के प्रभाव को आज भी कोई राजनीतिक दल सीधे तौर पर चुनौती देने को तैयार नहीं है।
गुरमीत राम रहीम के ड्राइवर समेत सात आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी
Ram Rahim
- फोटो : File Photo
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पंचकूला सीबीआई अदालत की ओर से 25 अगस्त 2017 को दोषी करार दिए जाने के बाद सिरसा में हुई हिंसा को एक साल हो गया है। एक वर्ष पूरा होने के बाद ही सिरसा पुलिस हिंसा में शामिल कई नामजद आरोपियों को गिरफ्त में नहीं ले पाई है। वीरवार को सीजेएम कोर्ट ने नामजद आरोपियों में शामिल गुरमीत राम रहीम के ड्राइवर सहित सात आरोपी उपद्रवियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए। इन आरोपियों में डेरा प्रमुख का ड्राईवर फूल कुमार निवासी डेरा सच्चा सौदा, अमरजीत सिंह निवासी प्रीत नगर, नीकू निवासी डेरा सच्चा सौदा, मीता निवासी प्रीत नगर , बलविंद्र सिंह निवासी तलवंडी पंजाब, कृष्ण पाल चौहान निवासी डेरा सच्चा सौदा व धर्मवीर निवासी जाजानपुर कैथल शामिल है।
इन आरोपियों को पुलिस अभी तक अपनी गिरफ्त में नहीं ले सकी है। सिरसा पुलिस ने हिंसा मामले में उपद्रवियों के खिलाफ देशद्रोह, पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला, सरकारी संपत्ति को नष्ट करना, सरकारी कार्य में बाधा डालने, धारा 144 की अवहेलना, साजिश रचने सहित कई आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। अब तक पुलिस ने करीब 120 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हिंसा मामले में सिरसा पुलिस की ओर से अदालत में 900 पेजों का चालान पेश किया गया है। पूरे प्रकरण में 69 लोगों को सरकारी गवाह बनाया गया है। इसमें पुलिस के ऑफिसर, कर्मचारी व अन्य लोग शामिल हैं।
सरकार विरोधी नारे लगाकर शहर की ओर बढ़ रहे थे पांच हजार डेरा प्रेमी
25 अगस्त 2017 को सिरसा में धारा 144 लागू थी। कीर्तिनगर चौकी इंचार्ज एएसआई शैलेंद्र कुमार जगदंबे पेपर मील पर तैनात थे। तहसीलदार रविंद्र को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर नाके पर तैनात थे। सीबीआई कोर्ट ने डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया तो शाम करीब पांच बजे हजारों डेरा प्रेमी आगजनी करते हुए जगदंबे पेपर मील नाके पर आ पहुंचे। सरकार विरोधी नारे लगाते हुए डेरा प्रेमियों ने पुलिस पार्टी पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें सिपाही रमेश कुमार व हवलदार प्रहलाद को चोट आई।
भीड़ में से कुछ व्यक्तियों ने जान से मारने की नियत से पुलिस पार्टी पर फायरिंग करने लगे। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने उपद्रवियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछार की, लेकिन उपद्रवियों की भीड़ तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को मारने पर उतारू हो गई। इसके बाद जिलाधीश को गोली चलाने का निर्देश जारी करना पड़ा। सिरसा शहर को उपद्रवियों से बचाने के लिए सुरक्षा बलों ने उपद्रवियों पर फायरिंग की। सुरक्षा बलों की दंगा विरोधी कार्रवाई में छह उपद्रवियों की गोली लगने से मौत हो गई।
मारे गए उपद्रवियों के खिलाफ भी दर्ज किया केस
हिंसा के अगले दिन 26 अगस्त को कीर्तिनगर चौकी प्रभारी एएसआई शैलेंद्र कुमार जांच करने के लिए घटना स्थल पर गए तो मौके से पेट्रोल बम की बोतलें बरामद हुईं। इसके बाद एसआई वजीर सिंह सिविल अस्पताल पहुंचे और डेड हाउस में रखी गई मृतक वजीर चंद निवासी पीर कॉलोनी सिरसा, काला सिंह निवासी प्रीत नगर सिरसा, विनोद कुमार निवासी रेगर बस्ती, रोबिन निवासी बहबलपुर जींद के शव को अपने कब्जे में लिए। इसके बाद शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद एसआई गोपाल राम ने फतेहाबाद पहुंचकर मृतक साहिल निवासी रतिया और मीना रानी निवासी फतेहाबाद का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की। मृतकों के खिलाफ पुलिस पर हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा डलाने का केस दर्ज किया गया।
इन आरोपियों को पुलिस अभी तक अपनी गिरफ्त में नहीं ले सकी है। सिरसा पुलिस ने हिंसा मामले में उपद्रवियों के खिलाफ देशद्रोह, पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला, सरकारी संपत्ति को नष्ट करना, सरकारी कार्य में बाधा डालने, धारा 144 की अवहेलना, साजिश रचने सहित कई आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। अब तक पुलिस ने करीब 120 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हिंसा मामले में सिरसा पुलिस की ओर से अदालत में 900 पेजों का चालान पेश किया गया है। पूरे प्रकरण में 69 लोगों को सरकारी गवाह बनाया गया है। इसमें पुलिस के ऑफिसर, कर्मचारी व अन्य लोग शामिल हैं।
सरकार विरोधी नारे लगाकर शहर की ओर बढ़ रहे थे पांच हजार डेरा प्रेमी
25 अगस्त 2017 को सिरसा में धारा 144 लागू थी। कीर्तिनगर चौकी इंचार्ज एएसआई शैलेंद्र कुमार जगदंबे पेपर मील पर तैनात थे। तहसीलदार रविंद्र को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर नाके पर तैनात थे। सीबीआई कोर्ट ने डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया तो शाम करीब पांच बजे हजारों डेरा प्रेमी आगजनी करते हुए जगदंबे पेपर मील नाके पर आ पहुंचे। सरकार विरोधी नारे लगाते हुए डेरा प्रेमियों ने पुलिस पार्टी पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें सिपाही रमेश कुमार व हवलदार प्रहलाद को चोट आई।
भीड़ में से कुछ व्यक्तियों ने जान से मारने की नियत से पुलिस पार्टी पर फायरिंग करने लगे। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने उपद्रवियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछार की, लेकिन उपद्रवियों की भीड़ तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को मारने पर उतारू हो गई। इसके बाद जिलाधीश को गोली चलाने का निर्देश जारी करना पड़ा। सिरसा शहर को उपद्रवियों से बचाने के लिए सुरक्षा बलों ने उपद्रवियों पर फायरिंग की। सुरक्षा बलों की दंगा विरोधी कार्रवाई में छह उपद्रवियों की गोली लगने से मौत हो गई।
मारे गए उपद्रवियों के खिलाफ भी दर्ज किया केस
हिंसा के अगले दिन 26 अगस्त को कीर्तिनगर चौकी प्रभारी एएसआई शैलेंद्र कुमार जांच करने के लिए घटना स्थल पर गए तो मौके से पेट्रोल बम की बोतलें बरामद हुईं। इसके बाद एसआई वजीर सिंह सिविल अस्पताल पहुंचे और डेड हाउस में रखी गई मृतक वजीर चंद निवासी पीर कॉलोनी सिरसा, काला सिंह निवासी प्रीत नगर सिरसा, विनोद कुमार निवासी रेगर बस्ती, रोबिन निवासी बहबलपुर जींद के शव को अपने कब्जे में लिए। इसके बाद शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद एसआई गोपाल राम ने फतेहाबाद पहुंचकर मृतक साहिल निवासी रतिया और मीना रानी निवासी फतेहाबाद का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की। मृतकों के खिलाफ पुलिस पर हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा डलाने का केस दर्ज किया गया।
साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में जमानत की अर्जी खारिज
Ram Rahim
साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में आरोपी गुरमीत राम रहीम की जमानत की अर्जी को अदालत ने खारिज कर दिया। इस मामले में एक अन्य आरोपी डॉ. पंकज गर्ग की ओर से विदेश जाने के लिए दी गई अर्जी को अदालत ने मंजूर करते हुए 10 दिनों के लिए इजाजत दे दी है। लेकिन इससे पहले डॉ. गर्ग को सभी औपचारिकताएं पूरी करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
डेरा सच्चा सौदा में 400 साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में आरोपी गुरमीत राम रहीम ने मंगलवार को जमानत की अर्जी दी थी, जिस पर वीरवार को विशेष सीबीआई अदालत में फैसला सुनाया गया। डेरा सच्चा सौदा में साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले की सीबीआई जांच के सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मेरिट के आधार पर पूरा करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल में सिंगल बेंच की फाइडिंग को आधार बिल्कुल नहीं बनाया जाए।
जस्टिस सूर्यकांत एवं जस्टिस सुदीप आहलुवालिया की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सीबीआई ने हाईकोर्ट को बताया कि केस का ट्रायल अब अंतिम चरण में है। ऐसे में इस अपील को खारिज किया जाना चाहिए। इस केस में वीरवार को ही चालान पेश किया गया है। इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने कहा कि चालान पेश किया जा चुका है और ऐसे में अब इस अपील पर आगे सुनवाई की जरूरत नहीं है। लिहाजा ट्रायल कोर्ट को मेरिट के आधार पर केस का ट्रायल पूरा करने के हाईकोर्ट ने आदेश दे दिए।
सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल करते हुए एक साधु हंसराज चौहान ने कहा था कि डेरे में साधुओं को ईश्वर से मिलाने के नाम पर नपुंसक बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसे वर्ष 2000 में डेरे में ही नपुंसक बनाया गया था। डेरे के 400 से अधिक साधुओं को नपुंसक बनाया गया है। इस मामले में सिंगल बेंच ने वर्ष 2015 में जांच सीबीआई को सौंप दी थी। डेरा मुखी ने वर्ष 2015 में डबल बेंच में अपील दायर कर सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती दे दी थी।
याची ने कहा कि शिकायतकर्ता के अनुसार उसे वर्ष 2000 में नपुंसक बनाया गया तो वह 12 वर्षों तक चुप क्यों बैठा रहा। सिंगल बेंच ने भी अपने क्षेत्राधिकार के बाहर जा कर इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।
डेरा सच्चा सौदा में 400 साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में आरोपी गुरमीत राम रहीम ने मंगलवार को जमानत की अर्जी दी थी, जिस पर वीरवार को विशेष सीबीआई अदालत में फैसला सुनाया गया। डेरा सच्चा सौदा में साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले की सीबीआई जांच के सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मेरिट के आधार पर पूरा करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल में सिंगल बेंच की फाइडिंग को आधार बिल्कुल नहीं बनाया जाए।
जस्टिस सूर्यकांत एवं जस्टिस सुदीप आहलुवालिया की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सीबीआई ने हाईकोर्ट को बताया कि केस का ट्रायल अब अंतिम चरण में है। ऐसे में इस अपील को खारिज किया जाना चाहिए। इस केस में वीरवार को ही चालान पेश किया गया है। इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने कहा कि चालान पेश किया जा चुका है और ऐसे में अब इस अपील पर आगे सुनवाई की जरूरत नहीं है। लिहाजा ट्रायल कोर्ट को मेरिट के आधार पर केस का ट्रायल पूरा करने के हाईकोर्ट ने आदेश दे दिए।
सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल करते हुए एक साधु हंसराज चौहान ने कहा था कि डेरे में साधुओं को ईश्वर से मिलाने के नाम पर नपुंसक बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसे वर्ष 2000 में डेरे में ही नपुंसक बनाया गया था। डेरे के 400 से अधिक साधुओं को नपुंसक बनाया गया है। इस मामले में सिंगल बेंच ने वर्ष 2015 में जांच सीबीआई को सौंप दी थी। डेरा मुखी ने वर्ष 2015 में डबल बेंच में अपील दायर कर सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती दे दी थी।
याची ने कहा कि शिकायतकर्ता के अनुसार उसे वर्ष 2000 में नपुंसक बनाया गया तो वह 12 वर्षों तक चुप क्यों बैठा रहा। सिंगल बेंच ने भी अपने क्षेत्राधिकार के बाहर जा कर इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।