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बठिंडाः रियासत कैप्टन की, गांव बादल का और जड़ें जमाने में जुटी 'आप'
अखिल तलवार/अमर उजाला, बठिंडा(पंजाब)
Updated Wed, 01 Feb 2017 06:34 PM IST
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पंजाब विधानसभा चुनाव
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विधानसभा चुनाव 2017 में मालवा के सबसे प्रमुख जिले बठिंडा के देहाती हलके में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प है। शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के गढ़ में आम आदमी पार्टी दोनों को जबरदस्त चुनौती दे रही है।
बठिंडा देहाती हलके में बठिंडा-लंबी रोड पर स्थित गांव घुद्दा का मिजाज इस बार बदला-बदला सा है। चार हजार वोटर वाले इस गांव का रिश्ता सीएम प्रकाश सिंह बादल और पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों से है।
रजवाड़ाशाही के जमाने में गांव घुद्दा कैप्टन अमरिंदर सिंह की पटियाला रियासत का आखिरी गांव होता था। इसके बाद फिरोजपुर रियासत शुरू हो जाती थी। वहीं, सीएम प्रकाश सिंह बादल के पूर्वज भी इसी गांव के थे।
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बाद में वह यहां से कुछ ही किलोमीटर दूर गांव बादल में जाकर बस गए थे। कांग्रेस और अकालियों के इस किले में इस बार आम आदमी पार्टी भी धमक दिखा रही है।
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बठिंडा देहाती हलके में बठिंडा-लंबी रोड पर स्थित गांव घुद्दा का मिजाज इस बार बदला-बदला सा है। चार हजार वोटर वाले इस गांव का रिश्ता सीएम प्रकाश सिंह बादल और पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों से है।
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रजवाड़ाशाही के जमाने में गांव घुद्दा कैप्टन अमरिंदर सिंह की पटियाला रियासत का आखिरी गांव होता था। इसके बाद फिरोजपुर रियासत शुरू हो जाती थी। वहीं, सीएम प्रकाश सिंह बादल के पूर्वज भी इसी गांव के थे।
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बाद में वह यहां से कुछ ही किलोमीटर दूर गांव बादल में जाकर बस गए थे। कांग्रेस और अकालियों के इस किले में इस बार आम आदमी पार्टी भी धमक दिखा रही है।
बठिंडा देहाती और बठिंड शहर के खास मुद्दे
पंजाब विस चुनाव
बठिंडा देहाती : कपास है प्रमुख मुद्दा
अकाली दल ने यहां से अमित रतन को टिकट दिया है जो पहले कांग्रेसी थे और शुतराणा हलके में सक्रिय थे। नए होने के बावजूद रतन को सरकार के खिलाफ नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। यह कॉटन बेल्ट है और यहां कपास प्रमुख मुद्दा है। कपास पर सफेद मक्खी के हमले के बाद पिछले साल किसानों को मुआवजा दिया गया था, लेकिन यह योग्य किसानों को मिला ही नहीं। किसानों का आरोप है कि बिचौलियों ने अपनों को मुआवजा दिला दिया।
यहां तक कि जिन किसानों ने कपास बीजी ही नहीं, धान की खेती की थी, वे भी मुआवजा ले गए। ऐसा ही कुछ खेत मजदूरों के साथ हुआ। कपास के खेत मजदूरों के बजाय दूसरों को मुआवजा दिला दिया गया। इस बार हलके में यह प्रमुख मुद्दा है, जो अकालियों को परेशान कर सकता है। आप ने यहां से युवा उम्मीदवार रुपिंदर रूबी को टिकट दिया है। सबसे पहले रूबी की उम्मीदवारी फाइनल हुई। लिहाजा प्रचार भी पहले शुरू हुआ। कांग्रेस ने हरविंदर सिंह लाडी को टिकट दी है। वह पूर्व विधायक स्व. जसमेल सिंह के बेटे हैं और पिछली बार पीपीपी के टिकट पर भुच्चो मंडी से लड़े थे।
बठिंडा शहरी : रोज बदल रहे समीकरण
बठिंडा शहरी हलके में समीकरण रोज बदल रहे हैं। कांग्रेस ने यहां से अपने हैवीवेट उम्मीदवार मनप्रीत बादल को टिकट दिया है। मनप्रीत लोकसभा चुनाव में बठिंडा से हरसिमरत कौर बादल से मामूली अंतर से हारे थे। अकाली दल से सिटिंग एमएलए सरूप चंद सिंगला फिर मैदान में हैं। जबकि, आप ने दीपक बांसल को टिकट दिया है। यह हिंदू सीट है, जहां बनिया वर्ग ज्यादा है।
इसलिए शिअद और आप ने इसी वर्ग के उम्मीदवारों को उतारा है पर कांग्रेस मनप्रीत के सियासी कद और बठिंडा शहर में अपने परंपरागत वोट बैंक पर दांव खेल रही है। सिंगला से पहले दोनों चुनाव में यहां से कांग्रेस ही जीती थी। टिकट वितरण के कुछ समय बाद मनप्रीत आगे लग रहे थे। आप खुद मान रही थी कि बठिंडा लोक सभा हलके में यह सबसे कमजोर सीट है। वहीं, सिंगला के साथ जहां एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर था, वहीं भाजपा उनके साथ नहीं चल रही थी।
अकाली दल ने यहां से अमित रतन को टिकट दिया है जो पहले कांग्रेसी थे और शुतराणा हलके में सक्रिय थे। नए होने के बावजूद रतन को सरकार के खिलाफ नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। यह कॉटन बेल्ट है और यहां कपास प्रमुख मुद्दा है। कपास पर सफेद मक्खी के हमले के बाद पिछले साल किसानों को मुआवजा दिया गया था, लेकिन यह योग्य किसानों को मिला ही नहीं। किसानों का आरोप है कि बिचौलियों ने अपनों को मुआवजा दिला दिया।
यहां तक कि जिन किसानों ने कपास बीजी ही नहीं, धान की खेती की थी, वे भी मुआवजा ले गए। ऐसा ही कुछ खेत मजदूरों के साथ हुआ। कपास के खेत मजदूरों के बजाय दूसरों को मुआवजा दिला दिया गया। इस बार हलके में यह प्रमुख मुद्दा है, जो अकालियों को परेशान कर सकता है। आप ने यहां से युवा उम्मीदवार रुपिंदर रूबी को टिकट दिया है। सबसे पहले रूबी की उम्मीदवारी फाइनल हुई। लिहाजा प्रचार भी पहले शुरू हुआ। कांग्रेस ने हरविंदर सिंह लाडी को टिकट दी है। वह पूर्व विधायक स्व. जसमेल सिंह के बेटे हैं और पिछली बार पीपीपी के टिकट पर भुच्चो मंडी से लड़े थे।
बठिंडा शहरी : रोज बदल रहे समीकरण
बठिंडा शहरी हलके में समीकरण रोज बदल रहे हैं। कांग्रेस ने यहां से अपने हैवीवेट उम्मीदवार मनप्रीत बादल को टिकट दिया है। मनप्रीत लोकसभा चुनाव में बठिंडा से हरसिमरत कौर बादल से मामूली अंतर से हारे थे। अकाली दल से सिटिंग एमएलए सरूप चंद सिंगला फिर मैदान में हैं। जबकि, आप ने दीपक बांसल को टिकट दिया है। यह हिंदू सीट है, जहां बनिया वर्ग ज्यादा है।
इसलिए शिअद और आप ने इसी वर्ग के उम्मीदवारों को उतारा है पर कांग्रेस मनप्रीत के सियासी कद और बठिंडा शहर में अपने परंपरागत वोट बैंक पर दांव खेल रही है। सिंगला से पहले दोनों चुनाव में यहां से कांग्रेस ही जीती थी। टिकट वितरण के कुछ समय बाद मनप्रीत आगे लग रहे थे। आप खुद मान रही थी कि बठिंडा लोक सभा हलके में यह सबसे कमजोर सीट है। वहीं, सिंगला के साथ जहां एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर था, वहीं भाजपा उनके साथ नहीं चल रही थी।
तलवंडी साबो : जीत महिंदर को युवाओं से चुनौती
पंजाब विस चुनाव
- फोटो : File Photo
तलवंडी साबो सीट पर पिछले काफी समय से जीत महिंदर सिद्धू का कब्जा रहा है। वह यहां से आजाद भी जीते और पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा भी पहुंचे। उसके बाद शिअद में चले गए और उपचुनाव में शिअद के टिकट पर जीते। लेकिन इस बार उन्हें युवाओं से दोहरी चुनौती मिल रही है। आप ने यहां से प्रो. बलजिंदर कौर को टिकट दिया है। प्रो. बलजिंदर उपचुनाव में भी आप की उम्मीदवार थीं, लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई थी।
सबसे पहले टिकट घोषित होने के कारण उन्हेें प्रचार के लिए काफी वक्त मिल गया। कांग्रेस ने यहां से पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र नेता खुशबाज जटाना को टिकट दिया है। हालांकि यहां से अकाली नेता बलबीर सिद्धू ने कुछ ही समय पहले टिकट की उम्मीद में कांग्रेस ज्वाइन की थी। पर यूथ कोटे से जटाना टिकट ले आए। सिद्धू बागी हो गए, कांग्रेस ने उन्हें निकाल दिया। हलके के बहुत से गांव टेल पर हैं, जहां सिंचाई के पानी की समस्या है। वहीं कैंसर भी इस हलके की प्रमुख समस्या है।
मौड़ : सेखों की प्रतिष्ठा दांव पर
पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान अस्तित्व में आए मौड़ हलके में कैबिनेट मंत्री जनमेजा सिंह सेखों की प्रतिष्ठा दांव पर है। सेखों पिछली बार भी यहां से जीते थे। दूसरे हलकों की तुलना में यहां अकाली दल की स्थिति बेहतर है। हालांकि किसानों की आत्महत्याएं और कपास पर सफेद मक्खी का हमले को लेकर नाराजगी भी है। कांग्रेस ने हरमिंदर जस्सी को टिकट दिया है। जस्सी तलवंडी साबो से लड़ते थे। तलवंडी साबो के 32 गांव मौड़ हलके में शामिल हो गए, इसलिए जस्सी इस बार मौड़ से मैदान में हैं। वहीं, आप ने जगदेव सिंह कमालू को टिकट दी है। पहली बार सियासत के मैदान में उतरने के बावजूद कमालू ने मुकाबले को तिकोना बना दिया है।
सबसे पहले टिकट घोषित होने के कारण उन्हेें प्रचार के लिए काफी वक्त मिल गया। कांग्रेस ने यहां से पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र नेता खुशबाज जटाना को टिकट दिया है। हालांकि यहां से अकाली नेता बलबीर सिद्धू ने कुछ ही समय पहले टिकट की उम्मीद में कांग्रेस ज्वाइन की थी। पर यूथ कोटे से जटाना टिकट ले आए। सिद्धू बागी हो गए, कांग्रेस ने उन्हें निकाल दिया। हलके के बहुत से गांव टेल पर हैं, जहां सिंचाई के पानी की समस्या है। वहीं कैंसर भी इस हलके की प्रमुख समस्या है।
मौड़ : सेखों की प्रतिष्ठा दांव पर
पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान अस्तित्व में आए मौड़ हलके में कैबिनेट मंत्री जनमेजा सिंह सेखों की प्रतिष्ठा दांव पर है। सेखों पिछली बार भी यहां से जीते थे। दूसरे हलकों की तुलना में यहां अकाली दल की स्थिति बेहतर है। हालांकि किसानों की आत्महत्याएं और कपास पर सफेद मक्खी का हमले को लेकर नाराजगी भी है। कांग्रेस ने हरमिंदर जस्सी को टिकट दिया है। जस्सी तलवंडी साबो से लड़ते थे। तलवंडी साबो के 32 गांव मौड़ हलके में शामिल हो गए, इसलिए जस्सी इस बार मौड़ से मैदान में हैं। वहीं, आप ने जगदेव सिंह कमालू को टिकट दी है। पहली बार सियासत के मैदान में उतरने के बावजूद कमालू ने मुकाबले को तिकोना बना दिया है।