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सरकार को अतिक्रमण हटाने के लिए एक माह की मोहलत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 20 Mar 2014 10:03 PM IST
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यमुनानगर और जगाधरी रोड पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नहीं रुकेगी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उस एलपीए को खारिज कर दिया है, जिसके तहत सिंगल बेंच के आदेशों को डबल बेंच में चुनौती दी गई थी।
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मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने की।
हाईकोर्ट ने 4 मार्च के आदेशों में स्पष्ट किया था कि हरियाणा सरकार यमुनानगर-जगाधरी रोड पर अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू करे। साथ ही कब्जाधारियों को नोटिस जारी किया जाए। अगर नोटिस का जवाब नहीं दिया जाता है, तो अतिक्रमण को हटाने के लिए जो भी खर्च आए, वह अतिक्रमणकारियों से वसूला जाए।
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हाईकोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान एक रिर्पोट पेश की गई थी जिसमें अतिक्रमण और अतिक्रमणकारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई थी।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के डायरेक्टर जनरल अनुराग रस्तोगी की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि ससाली, चांदपुर, पनसौरा, जगाधरी, मोमिली व अन्य एरिया में अतिक्रमण करने वाले 74 लोगों की सूची तैयार की गई है।
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हलफनामे के बाद हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए पूछा था कि यदि यह सब जानकारी मौजूद है, तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
इस पर हरियाणा सरकार ने कोर्ट से एक माह की मोहलत मांगी, जिसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को एक माह में अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई पूरी करने को कहा।
इसके साथ ही इस कार्रवाई की फोटो करवा कर अगली सुनवाई पर स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के भी निर्देश जारी किए।
वीरवार को दाखिल एलपीए में याचिकाकर्ता ने कहा कि मामले की पिछली सुनवाई के दौरान कुछ पक्षों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पाया था।
ऐसे में उन लोगों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के आग्रह को अस्वीकार कर दिया।