खेमका पर 'मनोहर' है खट्टर सरकार, एक्शन शुरू
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हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस डॉ. अशोक खेमका को वर्तमान सरकार में प्रताड़ना से राहत मिल सकती है। खेमका ने चार्जशीट में जो कागजात राजस्व विभाग से मांगे थे, उसे विभाग के ही कुछ कर्मचारी दबाए बैठे थे।
इस मामले से जुड़े अधिकारी ने जब एफआईआर दर्ज करवाने की धमकी दी तो बुधवार को कागजात निकल कर सामने आए। अति गोपनीय रिपोर्ट होने से अधिकारी बोलने को तैयार नहीं हैं।
उधर, खेमका ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दी गई चार्जशीट का जवाब देने के लिए होमवर्क शुरू कर दिया है। अभी तक कांग्रेस सरकार इस संदर्भ में राजस्व विभाग का रिकार्ड खेमका के सामने नहीं रख रही थी।
राजस्व विभाग के अधिकारी नहीं दे रहे थे कागजात
चार्जशीट किए जाने के बाद खेमका ने सरकार से कागजातों की मांग की थी। इस पर मुख्य सचिव ने निर्देश जारी किए गए थे कि खेमका जो रिकार्ड देखना चाहते हैं वह देख लें, लेकिन पिछले तीन माह से राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारी रिकार्ड नहीं दिखा रहे थे।
अक्तूबर के पहले सप्ताह में राजस्व विभाग के अधिकारी ने फाइल पर आदेश दिया कि खेमका को रिकार्ड दिखाया जाए, रिकार्ड देखना उनका हक है। यह आदेश कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही हो गए थे। आदेश होने के बाद कर्मचारियों ने खेमका की चार्जशीट से संबंधित कुछ रिकार्ड तो उन्हें दिखा दिया, लेकिन एक कागज देने में आनाकानी कर रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक खेमका ने इस मामले में तीन डाक्यूमेंट मांगे थे। इसमें से दो तो दिखा दिए गए, लेकिन एक फाइल कर्मचारियों ने गायब कर दी। संबंधित विभाग के मुखिया ने एक सप्ताह पहले जब अपने कर्मचारियों के ऊपर इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए तो बुधवार को फाइल सामने आ गई। यह कागजात आज कल में खेमका को दिखा दिए जाएंगे।
ये सब सहना पड़ा था खेमका को
-वाड्रा लैंड डील में म्युटेशन रद्द कर चर्चा में आए खेमका को प्रताड़ित करने में कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी
-इसके बाद वरिष्ठ आईएएस खेमका को हरियाणा सरकार ने चार्जशीट किया
-खेमका के मीडिया में जाने पर पूर्व मुख्य सचिव पीके चौधरी ने उनसे जवाब मांगा था
-कुछ समय पहले राजस्व विभाग को भेजे रिकार्ड में गुड़गांव डीसी ने सरकार के आदेशों को सही ठहराते खेमका की कार्रवाई को गलत ठहराया
-इसके बाद चुनाव आयोग ने राजस्व विभाग से पूछा कि यह कार्रवाई आचार संहिता के दौरान हुई है क्या?
सीएम बदलने के साथ करवट ले रही अफसरशाही
हरियाणा की अफसरशाही में चौथे तल को लेकर चर्चा का बाजार गरम है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव का फैसला दो दिन में होने की संभावना है। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठने वाले अधिकारियों का फैसला बाद में हो सकता है। आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी पूरे समय मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ हैं।
चंडीगढ़ में खट्टर के विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद से ही कासनी साथ-साथ हैं। वहीं, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की भी मुख्यमंत्री से अलग से मुलाकात हो चुकी है। दोनों अधिकारियों की मुख्यमंत्री से नजदीकी उन अधिकारियों को नागवार गुजर रही है, जो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दोनों अधिकारियों के फैसलों के खिलाफ रहे हैं।
भाजपा ने दोनों अधिकारियों के बारे में प्रदेश और केंद्र की अफसरशाही से पूरी रिपोर्ट पहले ही ले रखी है। लिहाजा, दोनों अधिकारियों को वर्तमान सरकार में अहम जिम्मेदारी मिलनी तय मानी जा रही है। हरियाणा में मंत्रियों को विभाग बांटने के बाद सरकार की पहली प्राथमिकता अफसरशाही है।
हालांकि, खट्टर से अधिकारियों की नजदीकियों का सिलसिला राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी के शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही शुरू हो गया था, लेकिन इस समय मुख्यमंत्री कार्यालय को लेकर चर्चाएं तेज हैं। फिलहाल, यह तय है कि इस बार मुख्यमंत्री कार्यालय में सीमित अधिकारियों को ही जिम्मेदारी मिलेगी।