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Haryana: कोटा से डीएसपी बने खिलाड़ियों को हाईकोर्ट से राहत, आईपीएस नियुक्त करने पर विचार का आदेश

Fri, 05 May 2023 11:59 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 05 May 2023 11:59 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता खेल प्रशिक्षण के साथ ही देश के भीतर और बाहर टूर्नामेंट में भाग ले रहे थे। ऐसा करते हुए उनकी नियुक्ति की तारीख से दो साल की अवधि के भीतर प्रोबेशन पूरा करने की अपेक्षा रखना न्याय का उपहास होगा। कानून किसी व्यक्ति को वह करने के लिए बाध्य नहीं करता जो वह नहीं कर सकता।

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Relief from the High Court to the sports player who became DSP from quota in Haryana
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में खेल कोटा से डीएसपी नियुक्त हुए खिलाड़ियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा कैडर के आईपीएस की 2020 से 2022 की चयन सूची में शामिल करने पर विचार करने का आदेश दिया है।

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हरियाणा में डीएसपी पद पर तैनात ममता खरब, जोगिंदर शर्मा, गितिका जाखड़, सरदार सिंह व अन्य ने एडवोकेट अभिषेक अरोड़ा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर वरिष्ठता क्रम को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया था कि उनकी नियुक्ति 2007 से 2010 के बीच हुई है और नियुक्ति के बाद उन्हें कंफर्म नहीं किया गया है जिसके चलते वे वरिष्ठता में पिछड़ रहे हैं। 
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वरिष्ठता जोड़ने का पैमाना डीएसपी के तौर पर कंफर्म होने की तिथि है और ऐसे में याचिकाकर्ता को कंफर्म न किए जाने के कारण वे पिछड़ रहे हैं। याची ने अपील की थी कि उनकी नियुक्ति की तिथि से उन्हें कंफर्म किया जाए ताकि वे प्रमोशन का लाभ पा सके। हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया था कि नियमों के अनुसार कंफर्म होने की तिथि से ही वरिष्ठता का लाभ दिया जा सकता है। 
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कंफर्म होने से पहले विभाग द्वारा तय ट्रेनिंग व अन्य विभागीय औपचारिकता पूरी करनी होती है लेकिन खेल कोटा से सीधा भर्ती हुए कुछ डीएसपी द्वारा यह पूरी नहीं की गई है। कोर्ट को बताया गया कि हरियाणा कैडर में आईपीएस की चयन सूची में उनके नाम पर केवल वरिष्ठता विवाद के चलते विचार नहीं किया जा रहा है।


कानून किसी व्यक्ति को वह करने के लिए बाध्य नहीं करता, जो वह नहीं कर सकता
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता खेल प्रशिक्षण के साथ ही देश के भीतर और बाहर टूर्नामेंट में भाग ले रहे थे। ऐसा करते हुए उनकी नियुक्ति की तारीख से दो साल की अवधि के भीतर प्रोबेशन पूरा करने की अपेक्षा रखना न्याय का उपहास होगा। कानून किसी व्यक्ति को वह करने के लिए बाध्य नहीं करता जो वह नहीं कर सकता। ऐसे में अंतरिम तौर पर हाईकोर्ट ने 2020 से 2022 की आईपीएस चयन सूची में याचिकाकर्ताओं के नाम पर विचार करने का आदेश दिया है।

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