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Chandigarh News: रीढ़ की हड्डी का उपचार आपातकालीन स्थिति, गैर अनुमोदित अस्पताल में इलाज पर भी करनी होगी प्रतिपूर्ति

Mon, 13 May 2024 09:10 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 13 May 2024 09:10 PM IST
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Reimbursement will also be required for spine treatment in case of emergency and treatment in an unapproved hospital.
रिटायर आईएएस अधिकारी को उपचार की राशि की प्रतिपूर्ति करने का हरियाणा सरकार को आदेश
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रीढ़ की हड्डी के इलाज के लिए फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट गुरुग्राम में करवाया था उपचार
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि रीढ़ की हड्डी के लिए लिया गया कोई भी उपचार आपातकालीन स्थिति में लिया गया उपचार माना जाएगा। उपचार भले ही गैर-अनुमोदित अस्पताल से कराया गया हो, सरकार को इसके लिए प्रतिपूर्ति करनी होगी। हाईकोर्ट ने रिटायर आईएएस अधिकारी रिसल सिंह खारा की याचिका मंजूर करते हुए हरियाणा सरकार को आठ सप्ताह में उपचार के खर्च की प्रतिपूर्ति करने का आदेश दिया है।

याचिका दाखिल करते हुए रिसल सिंह खारा ने एडवोकेट आफताब सिंह खारा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि अचानक हुए रीढ़ की हड्डी में दर्द के कारण उन्हें फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट गुरुग्राम में भर्ती होना पड़ा था। वहां पर उपचार के बाद याची ने मेडिकल बिलों को खर्च की राशि की प्रतिपूर्ति के लिए हरियाणा सरकार को सौंपा था। याची को यह कहते हुए प्रतिपूर्ति से इन्कार कर दिया गया कि उन्होंने गैर अनुमोदित अस्पताल में उपचार करवाया है और यह कोई आपातकालीन स्थिति भी नहीं थी। 11 अक्तूबर 2016 के इस आदेश को उन्होंने रद्द करने की हाईकोर्ट से अपील की थी। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि रीढ़ की हड्डी का कोई भी उपचार आपातकालीन स्थिति है और ऐसे में गैर अनुमोदित अस्पताल में इलाज की दलील देकर याची को खर्च की प्रतिपूर्ति से इन्कार नहीं किया जा सकता। हालांकि हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि खर्च का भुगतान पीजीआई की ओर से तय रेट के अनुसार ही किया जाएगा। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार को राशि आठ सप्ताह में जारी करने का आदेश दिया है।
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