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मोदी को इन सांसदों से भीतरघात का खतरा

Mon, 22 Sep 2014 01:54 PM IST
श्याम द्विवेदी/अमर उजाला, रोहतक
श्याम द्विवेदी/अमर उजाला, रोहतक Updated Mon, 22 Sep 2014 01:54 PM IST
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Rebellion in Haryana BJP Due to Candidates List

मिशन हरियाणा के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों के लिए अपने सिपहसलार मैदान में उतार दिए हैं। बिना मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किए पार्टी हरियाणा में विजय पताका फहराना चाहती है। मोदी नाम की नाव पर सवार होकर सभी प्रत्याशी इस चुनावी लहर को पार करना चाहते हैं।

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लेकिन लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भाजपा की राह आसान नहीं है। विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर टिकट न मिलने से जहां अपने नाराज हैं तो वहीं कई सांसद अपनों को टिकट न दिला पाने की कसक दिल में रखे हुए हैं। ऐसे में पार्टी को भी भीतरघात का सामना करना पड़ सकता है।
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सूत्रों के अनुसार कुछ सांसदों का तो यह भी कहना है कि भाजपा आलाकमान ने दोहरा मापदंड अपनाया है, एक तरफ जहां सुषमा स्वराज की बहन वंदना शर्मा को टिकट दी गई है तो वहीं प्रदेश अध्यक्ष राम बिलास शर्मा के समधी को वल्लभगढ़ से टिकट से नवाजा गया है जबकि पार्टी में गुड़गांव से सांसद राव इंद्रजीत सिंह, फरीदाबाद से सांसद कृष्ण पाल गुर्जर और सोनीपत से सांसद रमेश कौशिक अपने सगे संबंधियों को टिकट दिलाने में नाकाम रहे हैं।
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राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन सांसदों के सगे संबंधियों को टिकट न मिलना पार्टी के लिए नुकसान दायक हो सकता है क्योंकि जहां इनके बेमन का प्रत्याशी है वहां वह पूरे मन से प्रचार भी नहीं कर पाएंगे।

परिवारवाद से नहीं बची पार्टी

Rebellion in Haryana BJP Due to Candidates List

भाजपा हरियाणा में परिवारवाद से नहीं बच सकी है। पार्टी ने हरियाणा के सांसदों को भले ही टिकट वितरण से दूर रखा, लेकिन सुषमा स्वराज की बहन वंदना शर्मा को सफीदों से टिकट दिया है जबकि रामबिलास शर्मा के समधी मूलचंद शर्मा को वल्लभगढ़ से प्रत्याशी बनाया है। कैलाश विजयवर्गीय का तर्क है सुषमा हरियाणा में राजनीति नहीं करती हैं और रामबिलास के समधी पार्टी के कार्यकर्ता हैं।

इंद्रजीत नहीं दिला पाए बेटी को टिकट
गुड़गांव से कांग्रेस सांसद राव इंद्रजीत सिंह अपनी बेटी आरती यादव को रेवाड़ी से टिकट नहीं दिला पाए। लेकिन वह अपने करीबी डा. बनवारी लाल को बावल और विक्रम ठेकेदार को कोसली से टिकट दिलवाने में कामयाब रहे।

कृष्णपाल गुर्जर भी चूके
फरीदाबाद से सांसद और भाजपा के पुराने नेता कृष्णपाल गुर्जर भी अपने बेटे को टिकट दिलाने में नाकाम रहे। तिगांव सीट पर लंबे समय से उनके बेटे देवेंद्र चौधरी के चुनाव लड़ने की चर्चाएं चल रही थीं लेकिन जब दूसरी लिस्ट आई तो पासा पलट गया और चंद दिन पहले ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए राजेश नागर को पार्टी ने टिकट थमा दिया।

इन सांसदों के हाथ भी निराशा लगी

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सोनीपत सांसद की नहीं चली
सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक को तो इस टिकट वितरण में खासी निराशा हाथ लगी है। वह अपने भाई देवेंद्र कौशिक को गन्नौर से टिकट दिलाना चाह रहे थे लेकिन हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए जितेंद्र मलिक उनसे आगे निकल गए।

हाल यह है कि सोनीपत में कोई भी टिकट रमेश कौशिक की पसंद का नहीं दिया गया है, ऐसे में उनके मन से प्रचार करने की प्रक्रिया को संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।

अश्विनी चोपड़ा का विरोध खाली गया
करनाल से पहली लिस्ट में मनोहर लाल खट्टर को टिकट दिए जाने के बाद करनाल के सांसद अश्विनी चोपड़ा भाजपा आलाकमान के फैसले का कड़ा विरोध जताया था।

यहां तक कि उन्होंने टिकट वितरण में अपनी अनदेखी के लिए पार्टी प्रमुख और प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था लेकिन उनकी आलाकमान ने कोई बात नहीं सुनी और वह अपने निर्णय पर अडिग रहा। ऐसे अश्विनी चोपड़ा विधानसभा के लिए चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों की कितनी मदद करेंगे यह तो समय ही बताएगा।

बीरेंद्र सिंह भी हल्के पड़े

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भाजपा में शामिल कांग्रेस के दिग्गज नेता बीरेंद्र सिंह अपने रसूख के हिसाब से अपने कम ही समर्थकों को टिकट दिला पाए। वह अपनी पत्नी प्रेम लता को उचाना कलां, अपने करीबी संजीव मुआना को जुलाना, संतोष दानौदा को नरवाना और कैथल जिले की कलायत सीट से धर्मपाल शर्मा को टिकट दिलवाने में कामयाब रहे। लेकिन जैसा माना जा रहा था कि उन्होंने 33 सीटों के लिए भाजपा आलाकमान को लिस्ट सौंपी है वैसा कुछ भी नहीं हो पाया। साथ ही वह खुद भी जींद और कैथल से लड़ने के इच्छुक थे लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।

कोट:

जो विरोध हो रहा है इतना अपेक्षित है, लेकिन कोई खास विरोध नहीं हो रहा है। पार्टी केराष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह स्वयं घटनाक्रम पर नजर रखे हैं। जहां कार्यकर्ताओं और नेताओं में असंतोष है, उन्हें हम समझा बुझाकर शांत कर लेंगे।
- कैलाश विजयवर्गीय, चुनाव प्रभारी, हरियाणा।

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