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टॉप-20 स्मार्ट सिटी की लिस्ट से चंडीगढ़ नॉक आउट, 5 कारण
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 03 Feb 2016 10:02 AM IST
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स्मार्ट सिटी की टॉप-20 की लिस्ट में चडीगढ़ को जगह नहीं मिल पाई। इसके पांच कारण सामने आए हैं। यूटी प्रशासन ने स्मार्ट सिटी की टॉप-20 लिस्ट में आने के लिए जल्दबाजी में ऐसे कई फैसले लिए जो उन्हें बाद में भारी पड़ गए। जब अफसरों से इस बारे में शहरी विकास मंत्रालय की ओर से जवाब मांगा गया तो उनसे देते ही न बना।
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हाउस टैक्स लगाना भी गया बेकार
पहले 20 स्मार्ट शहरों में शामिल होने के लिए प्रशासन का हाउस टैक्स लगाने का फैसला भी किसी काम नहीं आया। प्रशासन ने जल्दबाजी में हाउस टैक्स तो लगा दिया लेकिन उसकी शर्तों का ध्यान से अध्ययन नहीं किया। शर्तों में पिछले तीन साल के हाउस टैक्स का विवरण मांगा गया था। जबकि प्रशासन ने हाउस टैक्स कुछ महीने पहले ही लागू किया था। ऐसे में हाउस टैक्स के 5 नंबर कटने स्वाभाविक थे।
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जलापूर्ति में राजस्व से ज्यादा घाटा
जलापूर्ति पर एकत्र होने वाले राजस्व से कई गुणा अधिक खर्च हो रहा है। एक साल में करीब 60 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। दूसरे खर्च छोड़कर बात सिर्फ जलापूर्ति के संचालन और रखरखाव की ही करें तो इसका खर्च भी राजस्व से कहीं ज्यादा है। जबकि प्रस्ताव में 24 घंटे बिजली-पानी सप्लाई के लिए वर्तमान समय में राजस्व और खर्च का विवरण भी मांगा गया था।
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जनभागीदारी रही कम
स्मार्ट सिटी को मिशन बनाने केलिए जनभागीदारी सबसे अहम थी। मिशन केे तहत कौन-कौन सी गतिविधियां हुईं और हर गतिविधि में कितने लोगों से भाग लिया, यह पूरी जानकारी आंकड़ों सहित प्रस्ताव में देनी थी। लेकिन लोगों का रुझान इसमें कम रहा। कुछ अधिकारियों ने तो अपने एरिया में स्मार्ट सिटी पब्लिक कैंप ही नहीं लगाए। कई बार पहले से प्रस्तावित कैंप रद्द हुए। इसके बाद लोगों का प्रशासन के खिलाफ गुस्सा भी फूटा। मेरे सपनों का शहर विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में लोगों की भागीदारी में चंडीगढ़ भोपाल और फरीदाबाद से भी पिछड़ गया था।
कंसल्टेंट ने भी बीच में छोड़ा साथ
करीब एक महीने की जद्दोजहद के बाद स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव तैयार करने के लिए प्रशासन ने जो कंसल्टेंट नियुक्त किया वह बीच में ही छोड़ कर चला गया। स्थिति ऐसी थी कि उस समय दोबारा कंसल्टेंट नहीं रखा जा सकता था। बाद में सीआईआई की मदद से अधिकारियों ने प्रस्ताव तैयार किया।
बार-बार बढ़ाई गई तिथि
माई गव पोर्टल पर निबंध लेखन प्रतियोगिता और कई अन्य गतिविधियों केलिए तिथि बार-बार बढ़ाई जाती रही। फाइनल प्रस्ताव पर लोगों को अपनी प्रतिक्रिया देने का भी कम समय मिला। प्रस्ताव भेजने से महज दो दिन पहले इसे पोर्टल पर डिस्प्ले किया गया।
स्मार्ट सिटी प्रस्ताव में हम कहां-कहां पिछड़े, इसका अभी पता नहीं चल पाया है। हाउस टैक्स का पिछले तीन साल का ब्यौरा मांगा गया था। जबकि चंडीगढ़ में जद्दोजहद के बाद प्रस्ताव भेजने से कुछ महीने पहले ही इसे लगाया जा सका।
-अनुराग अग्रवाल, मिशन डायरेक्टर स्मार्ट सिटी कम गृह सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन