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Hindi News ›   Chandigarh ›   Read About Haryana Politician Bansi Lal

'जहां से ताउम्र जीते, वहीं अंतिम चुनाव नहीं लड़े'

Wed, 17 Sep 2014 02:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, भिवानी
ब्यूरो/अमर उजाला, भिवानी Updated Wed, 17 Sep 2014 02:04 PM IST
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Read About Haryana Politician Bansi Lal

जिस विधानसभा क्षेत्र तोशाम ने बंसीलाल को पूरे हरियाणा का लोकप्रिय नेता बनाया और उनके नाम कभी न हारने का रिकॉर्ड भी दर्ज कराया। उसी कर्मभूमि-जन्म भूमि से बंसीलाल अपने चार दशक के राजनीतिक कॅरिअर का आखिरी चुनाव नहीं लड़ पाए। हरियाणा के दिग्गज नेता को अपना अंतिम चुनाव तोशाम की बजाय भिवानी से लड़ना पड़ा।

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भिवानी से वे जीते, लेकिन तोशाम से उनके बेटे को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। तोशाम व बंसीलाल एक दूसरे के पर्याय यूं नहीं बने, दोनों के बीच करीब चार दशक का गहरा राजनीतिक संबंध रहा। इस धरती से जीत कर बंसीलाल ने लगभग 12 साल प्रदेश की बागडोर संभाली।
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तोशाम विधानसभा से बंसीलाल कुल छह बार चुनाव लड़े और सभी जीते। 1987 के चुनावी नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए, लेकिन बाद में कोर्ट ने बंसीलाल को विजयी घोषित किया। यानी, वे ताउम्र अपराजित रहे। दमदार प्रदर्शन के बावजूद वर्ष 2000 का विधानसभा चुनाव चौधरी बंसीलाल ने तोशाम से नहीं लड़ा।
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अपने राजनीतिक जीवन का अंतिम चुनाव भिवानी शहर से लड़े और करीब आठ हजार मतों से जीते। तोशाम से भिवानी आकर चुनाव लड़ने के पीछे कारण जो भी रहे हों, लेकिन मोटी बात यह है कि उस समय के राजनीतिक हालात भांपकर ही उन्होंने भिवानी से चुनाव मैदान में उतरना मुनासिब समझा।

तोशाम से आया परिणाम इस बात को तसदीक भी करता है। यहां से उनके बेटे सुरेंद्र सिंह, कांग्रेस प्रत्याशी धर्मवीर सिंह से हार गए थे। बताते चलें कि वर्ष 2004 तक बंसीलाल हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) के सुप्रीमो रहे। अगले साल उन्होंने हविपा का विलय कांग्रेस में कर लिया था।


पहला चुनाव हारने के बाद लगाई जीत की हैट्रिक
देश के रेल मंत्री व रक्षा मंत्री जैसे अहम पदों पर रहे बंसीलाल ने 1977 में कांग्रेस से अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, इस चुनाव में वे जनता पार्टी प्रत्याशी चंद्रावती से करीब एक लाख 61 हजार मतों से हार गए।

इसके बाद उन्होंने लगातार तीन (1980, 1984 व 1989) चुनाव जीतकर हैट्रिक बनाई। इसके बाद उन्होंने लोकसभा का चुनाव कभी नहीं लड़ा।

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