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चंडीगढ़ में रुको अभियान: सेहत के साथ मुनाफे की सौगत, 60 दुकानदारों का बायो डीजल उत्पादक कंपनियों से समझौता
Fri, 06 Aug 2021 04:37 PM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 06 Aug 2021 04:37 PM IST
सार
खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस्तेमाल किए गए तेल के दोबारा उपयोग पर रोक व जागरूकता के लिए 2020 दिसंबर में री-यूज्ड ऑयल यानी रुको नाम से एक अभियान शुरू किया है।
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तेल
- फोटो : DEMO
विस्तार
चंडीगढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से शुरू किए गए री-यूज्ड (रुको) ऑयल अभियान से शहर की जनता को सेहत के साथ ही दुकानदारों को मुनाफे की सौगात मिलने लगी है। इससे एक ओर जहां शहर की जनता दोबारा उपयोग किए गए तेल के सेवन से बच रही है, वहीं दूसरी ओर दुकानदार भी उस तेल को फेंकने के बजाय बेचकर फायदे में हैं।
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इस योजना के तहत खाद्य सामग्री बनाने वाले शहर के 60 दुकानदारों ने बायो डीजल उत्पादक कंपनियों से समझौता कर लिया है। अब वे एक बार उपयोग किए गए तेल को दोबारा उपयोग करने व फेंकने की बजाय दुकान में ही कंपनी द्वारा रखे गए एक ड्रम में एकत्र कर रहे हैं। 40 से 50 लीटर तेल एकत्र होने पर दुकानदार इसकी सूचना कंपनी को दे रहे हैं, जिसके बाद कंपनी का कर्मचारी आकर ड्रम के तेल को लेकर उसकी कीमत दुकान वाले को दे रहे हैं।
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क्या है रुको अभियान
खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस्तेमाल किए गए तेल के दोबारा उपयोग पर रोक व जागरूकता के लिए 2020 दिसंबर में री-यूज्ड ऑयल यानी रुको नाम से एक अभियान शुरू किया है। इसके तहत खाद्य सामग्री बनाने व बेचने वाले दुकानों का निरीक्षण कर उन्हें खाद्य तेल के गलत तरीके से किए जा रहे उपयोग और उससे होने वाली बीमारियों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही उन्हें तेल जांचने का तरीका बताने और बचे हुए तेल को फेंकने के नुकसान से बचाने की भी व्यवस्था की गई है।
इस्तेमाल किया तेल स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक
खाद्य सुरक्षा विभाग के लाइसेंसी अधिकारी सुखविंदर का कहना है कि इस्तेमाल किए गए तेल में बनाए गए खाद्य पदार्थों का सेवन अल्जाइमर, एसिडिटी, पेट का कैंसर, गॉल ब्लैडर का कैंसर, हृदय संबंधी बीमारी और मोटापा का सबसे बड़ा कारण है। इस्तेमाल किए गए तेल के दोबारा उपयोग से सबसे ज्यादा हृदय को नुकसान पहुंचता है। यह हृदय की धमनियों में जमकर उसका मार्ग अवरुद्ध करता है। जिससे हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ता है। वहीं कोलेस्ट्रालॅ के रूप में अंगों में जमकर मोटापा जैसी समस्या देता है।
इस्तेमाल किया तेल स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक
खाद्य सुरक्षा विभाग के लाइसेंसी अधिकारी सुखविंदर का कहना है कि इस्तेमाल किए गए तेल में बनाए गए खाद्य पदार्थों का सेवन अल्जाइमर, एसिडिटी, पेट का कैंसर, गॉल ब्लैडर का कैंसर, हृदय संबंधी बीमारी और मोटापा का सबसे बड़ा कारण है। इस्तेमाल किए गए तेल के दोबारा उपयोग से सबसे ज्यादा हृदय को नुकसान पहुंचता है। यह हृदय की धमनियों में जमकर उसका मार्ग अवरुद्ध करता है। जिससे हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ता है। वहीं कोलेस्ट्रालॅ के रूप में अंगों में जमकर मोटापा जैसी समस्या देता है।
इसका रखें ध्यान
- एक साथ या एक बार में कई तेल इस्तेमाल न करें। एक समय में एक ही तेल का उपयोग करें।
- तेल का वास्तविक रंग बदल गया है तो उसे फेंक दें।
- ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) को डीप फ्राई के लिए इस्तेमाल न करें।
- सस्ते तेल जो जल्दी गर्म हो जाते हैं और जिसमें आंच पर रखते ही झाग बनने लगे, उसका इस्तेमाल न करें। ये मिलावटी तेल होते हैं, जो शरीर के लिए नुकसानदेह होते हैं।
- सभी तेल समान नहीं होते। कुछ तेल बहुत अधिक तापमान पर गर्म होते हैं (जिनका प्रयोग तलने या डीप फ्राइंग के लिए किया जा सकता है)। मसलन सोयाबीन, राइस ब्रैन, सरसों, मूंगफली, कैनोला और तिल का तेल।
- जल्दी गर्म होने वाले तेल जैसे ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल सिर्फ भूनने के लिए करना सही रहता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की यह योजना दुकानदारों के हित में है। मैंने अपने यहां भी एक ड्रम रखवाया है। दो महीने में 300 लीटर तेल एकत्र हो गया तो कंपनी को कॉल कर दिया। उनका कर्मचारी आकर रीयूज्ड तेल ले गया और उसकी कीमत भी दे गया। -सुखपाल सिंह, बाबा डेयरी के अधिष्ठाता व चंडीगढ़ मिठाई एसोसिएशन के अध्यक्ष
बहुत अच्छी पहल.. व्यापक स्तर पर जागरूकता की जरूरत
यह बहुत अच्छी पहल है। इसके लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता की जरूरत है, ताकि जल्द से जल्द खाद्य सामग्री बनाने वाले सभी दुकानदार इसका उपयोग करने लगे। मैंने रीयूज्ड तेल के उपयोग के मानक को अपने यहां लागू करवाया है। इससे बेहद संतुष्ट हूं। -एन के सिंघानिया, चंडीगढ़ स्वीट्स के अधिष्ठाता व चंडीगढ़ मिठाई एसोसिएशन के महासचिव
इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल के दोबारा उपयोग से कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इस पर रोक के लिए रुको अभियान चलाया जा रहा है। चंद महीनों के दौरान ही अभियान का व्यापक असर नजर आने लगा है। शहर के दुकानदार इसे सकारात्मक रूप में ले रहे हैं। इसका असर सीधे तौर पर जनता की सेहत पर पड़ेगा। -डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य