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लिव इन में रहने के बाद रेप केस किया, कोर्ट में साबित नहीं हुआ
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 13 Feb 2016 12:08 PM IST
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8 साल तक लिव इन में रहने के बाद रेप का केस दर्ज कराया, लेकिन वह कोर्ट में साबित नहीं हुआ तो व्यापारी को बरी कर दिया गया। मामला चंडीगढ़ का है। महिला की अश्लील फोटो के नाम पर उसे धमकाकर 8 साल तक दुष्कर्म के आरोप से अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय अंशु शुक्ला ने पंचकूला निवासी और मनीमाजरा के व्यापारी राजेंद्र जैन को बरी कर दिया है।
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अभियोजन पक्ष कोर्ट में आरोप साबित नहीं कर सका, वहीं बचाव पक्ष ने कोर्ट में साबित कर दिया कि शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों लिव इन रिलेशन में रह रहे थे। रिश्तों में खटास आने के बाद महिला ने ब्लैकमेल करने के मकसद से दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था।
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पुलिस में दी शिकायत में मनीमाजरा निवासी महिला ने कहा था कि वह पंचकूला से मनीमाजरा में पति और 2 बच्चों के साथ रहने आई थी। यहां आने के बाद उसकी जान-पहचान गारमेंटस की दुकान चलाने वाले राजेंद्र जैन से हुई। दोनों में अक्सर बातचीत होने लगी। एक दिन वह मार्केट से घर जा रही थी तो उसे रास्ते में राजेंद्र मिल गया।
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आरोप के अनुसार उसने उसे घर छोड़ने के बहाने कार में बिठा लिया और उसे कसौली ले गया। वहां उसने उसे कोल्ड ड्रिंक में कुछ पिलाकर बेहोश कर दिया और उससे दुष्कर्म किया। होश में आने पर उसे इसका पता चला। इस दौरान उसने उसकी कुछ अश्लील फोटो भी ले ली।
इसके बाद राजेंद्र उसे फोटो के नाम पर ब्लैकमेल कर उससे दुष्कर्म करता रहा। करीब 8 साल तक उसने उसका शारीरिक शोषण किया। 20 मई 2014 को वह जबरन उसके घर घुसा और उससे मारपीट की। साथ ही उससे दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने पुलिस में इसकी शिकायत दी।
बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष के वकील हरीश भारद्वाज के अनुसार आरोपी और शिकायतकर्ता दोनों शादीशुदा थे और एक-दूसरे से दोस्ती थी। दोनों में जब भी संबंध बने, उनकी सहमति से बने। इसके बाद महिला पति से अलग राजेंद्र जैन के साथ लिव इन में रहने लगी। दोनों 8 साल तक लिव इन में रहे।
इस दौरान दोनों के रिश्ते में खटास आने पर महिला किसी और के साथ रहने लगी। उसने उनके बहकावे में आकर राजेंद्र से पैसे ऐंठने की सोची। महिला ने केस दर्ज न करने की एवज में 50 लाख रुपये मांगे। इसकी राजेंद्र जैन ने वीडियो रिकार्डिंग कर ली थी।
इस मीटिंग में महिला की ओर से भेजे गए शख्स और समझौता करने वाले डेराबस्सी के सरपंच मौजूद थे। बाद में उन्होंने उनके खिलाफ डेराबस्सी थाने में ब्लैकमेलिंग का केस दर्ज करवाया था। बचाव पक्ष ने बतौर गवाह वहां के एसएचओ को भी अदालत में पेश किया था।