'मोदी लहर हवा, भाजपा सत्ता के नशे में'
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हरियाणा के लोकनिर्माण एवं उद्योग मंत्री रणदीप सुरजेवाला का दावा है कि प्रदेश कांग्रेस के सीनियर नेताओं में टिकट वितरण को लेकर कोई मतभेद नहीं है। केवल स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है, जो लोकतंत्र का हिस्सा है।
प्रदेश में कांग्रेस विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी और तीसरी बार सरकार बनाएगी। चुनाव में कांग्रेस की रणनीति, दावे और मुद्दे पर रणदीप सुरजेवाला ने नसीब सैनी से विस्तृत बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।
. किस आधार पर कांग्रेस हैट्रिक लगाने का दावा कर रही है?
- कांग्रेस हरियाणा में दस साल के शासनकाल में किए गए विकास, अपराध मुक्त माहौल, भाईचारे के ट्रैक रिकार्ड के आधार पर जनता से सेवा का मौका मांगेगी। भाजपा में भगोड़े नेताओं का जमावड़ा है, जबकि 100 से भी ज्यादा नेताओं के पलायन के बाद इनेलो राजनीतिक हाशिये पर है। हजकां राजनीतिक दौड़ से बाहर हो चुकी है। ऐसे में कांग्रेस ही एकमात्र ठोस विकल्प है।
. विकास में भेदभाव का आरोप लगाकर कांग्रेस के कई दिग्गज पार्टी छोड़कर गए हैं। इससे पार्टी को कितना नुकसान होगा?
- व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और पद की चाहत को पार्टी की विचारधारा से बड़ा समझते हुए कई लोग छोड़कर गए हैं। उन नेताओं के जाने से पार्टी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मां के समान है पार्टी
. प्रदेश में कई नेता कह रहे हैं हुड्डा नहीं कांग्रेस हैट्रिक लगाएगी, आप क्या मानते हैं हुड्डा या कांग्रेस?
- मेरे लिए पार्टी मां के समान है। मां से बेटा या बेटी कभी बड़े नहीं हो सकते। सरकार हमेशा पार्टी की होती है।
. 2005 में कांग्रेस ने वादा किया था कि प्रदेश को तीन साल में बिजली में आत्मनिर्भर बना दिया जाएगा। लेकिन आज भी नेता अदानी और अंबानी पर बिजली नहीं देने का आरोप लगा रहे हैं?
- हरियाणा बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर है। सरकार ने निविदाएं आमंत्रित कर 25 वर्ष के लिए अदानी समूह से 1400 मेगावाट का समझौता किया था। चुनाव से ठीक एक माह पहले बिना कारण अदानी समूह ने समझौते के विपरीत बिजली आपूर्ति रद्द कर दी। इसका जवाब पीएम एवं बीजेपी को देना चाहिए।
हवा हो चुकी है मोदी है लहर
. मोदी लहर कितना असर डालेगी, भाजपा को आप कहां देखते हैं?
- केंद्र के 100 दिन के राज में मोदी लहर हवा हवाई हो चुकी है। भाजपा सत्ता के नशे में है और जनता महंगाई से परेशान है। प्रदेश में भाजपा ज्यादा अच्छी स्थिति में नहीं रहेगी।
. बीते चुनाव के मुकाबले टिकट के दावेदारों की संख्या कई गुना घट गई है, कई हलकों में कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार पार्टी छोड़ गए?
- दावेदार कम होने की बात केवल आंकड़े भर है, जो वास्तविकता से परे है। संख्या की बात ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण है कि कौन सा उम्मीदवार जीत सकता है।
. कैथल में आपके परिवार से तीसरी बार तो आप दूसरी बार चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, क्या मुद्दे रहेंगे इस बार?
- जिले को शिक्षा, संसाधन, विकास, निजी क्षेत्र में खेती से जुड़े उद्योग एवं व्यवसाय का हब बनाना ही मुख्य लक्ष्य है। बीते दस साल में किए विकास के बल पर जनता के बीच जाएंगे।