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देखिए राम रहीम के जेल जाने का साइड इफेक्ट, किसी ने सोचा न होगा
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
Updated Fri, 01 Sep 2017 12:16 AM IST
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राम रहीम को साध्वी रेप केस में सजा
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साध्वी रेप केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम के 20 साल के लिए जेल जाने का साइड इफेक्ट देखने को मिला, वो भी ऐसा किसी ने सोचा न होगा। बाबा के कारनामों के बाद सिर्फ गुरु ही नहीं, उनका अखबार, डेरा और 560 प्रोडक्ट वाला सौदा चारों बंद है। सीबीआई कोर्ट में बाबा को दोषी ठहराने के बाद पंचकूला में फैली हिंसा के नतीजन कुरुक्षेत्र के 11 डेरों पर प्रशासन का ताला लगने के बाद बंद हैं।
सोमवार को 20 साल की सजा के बाद गुरमीत राम रहीम रोहतक जेल में बंद हैं और एमएसजी 560 से अधिक प्रोडक्ट वाले आउटलेट पर सौदे की बिक्री लगभग बंद हो चुकी है। एमएसजी प्रोडक्ट के डीलरों की मानें तो यह हालात सिर्फ कुरुक्षेत्र ही नहीं, बल्कि तमाम जगहों के हैं। जहां कल तक डेरे अनुयायियों के खौफ के चलते सड़कों पर अघोषित कर्फ्यू जैसे हालत थे, वहीं बाबा के जेल जाने के बाद अब स्थिति बिलकुल उलट हो चुकी है।
डेरे के अनुयायी पहचान छुपाने में भलाई समझ रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा के ज्यादातर अनुयायी अंडर ग्राउंड हो चुके हैं। गुरु के अलावा सैकड़ों अनुयायी अलग-अलग जेलों में बंद हैं। जेल में बंद और फरार अनेक अनुयायियों पर देशद्रोह और दूसरी गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज है। इन हालात में जो प्रमुख डेरा समर्थक अभी जेल या पुलिस प्रशासन के रडार से दूर हैं, वे डेरा से जुड़ी अपनी पहचान को छुपाने में ही भलाई समझ रहे हैं।
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ये बात डेरा संगत भी समझ चुकी है कि जब उनके पिताजी (गुरमीत राम रहीम) इस हालत में है तो उनके संरक्षण में तमाम तरह की गतिविधियों में शामिल बच्चों पर अगर कार्रवाई की गाज गिरी तो उन्हें कौन बचाने आएगा।
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सोमवार को 20 साल की सजा के बाद गुरमीत राम रहीम रोहतक जेल में बंद हैं और एमएसजी 560 से अधिक प्रोडक्ट वाले आउटलेट पर सौदे की बिक्री लगभग बंद हो चुकी है। एमएसजी प्रोडक्ट के डीलरों की मानें तो यह हालात सिर्फ कुरुक्षेत्र ही नहीं, बल्कि तमाम जगहों के हैं। जहां कल तक डेरे अनुयायियों के खौफ के चलते सड़कों पर अघोषित कर्फ्यू जैसे हालत थे, वहीं बाबा के जेल जाने के बाद अब स्थिति बिलकुल उलट हो चुकी है।
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डेरे के अनुयायी पहचान छुपाने में भलाई समझ रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा के ज्यादातर अनुयायी अंडर ग्राउंड हो चुके हैं। गुरु के अलावा सैकड़ों अनुयायी अलग-अलग जेलों में बंद हैं। जेल में बंद और फरार अनेक अनुयायियों पर देशद्रोह और दूसरी गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज है। इन हालात में जो प्रमुख डेरा समर्थक अभी जेल या पुलिस प्रशासन के रडार से दूर हैं, वे डेरा से जुड़ी अपनी पहचान को छुपाने में ही भलाई समझ रहे हैं।
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ये बात डेरा संगत भी समझ चुकी है कि जब उनके पिताजी (गुरमीत राम रहीम) इस हालत में है तो उनके संरक्षण में तमाम तरह की गतिविधियों में शामिल बच्चों पर अगर कार्रवाई की गाज गिरी तो उन्हें कौन बचाने आएगा।
कई अनुयायी सब बेचकर डेरा में परमानेंट रहने लगे थे
Ram Rahim
एक खास बात ये भी है कि कुरुक्षेत्र सहित आसपास इलाकों में ऐसे कई लोग हैं जो कई कई साल पहले अपनी जमीनें बेच कर सिरसा डेरे में ही परमानेंट डेरा जमा चुके थे। एक दिन पहले सिरसा डेरा खाली कराये जाने के बाद ऐसे अनुयायी चौतरफा संकट में घिर चुके हैं, क्योंकि आर्थिक क्षति के साथ सबसे बड़ी समस्या बच्चों की पढ़ाई की खड़ी हो चुकी हैं, क्योंकि इनके बच्चे सिरसा डेरे के ही स्कूल कालेजों में पढ़ रहे थे।
सबसे बड़ी समस्या उन डेरा अनुयायियों को भी हो रही है जो कि गांवों में अपनी बेशकीमती उपजाऊ भूमि बेच कर सिरसा डेरा में परिवार सहित रहने लगे थे। इनके लिए अब रोजगार का संकट भी खड़ा हो चुका है। डेरे के कुछ अनुयायियों से बात की गई तो इनमें से किसी ने बताया कि वे एक दशक पहले ही डेरा सच्चा सौदा से नाता तोड़ चुके हैं, जबकि कइयों ने दो टूक यही कहा कि उनका डेरे से कोई संबंध नहीं है।
इनमें कई ऐसे कट्टर डेरा समर्थक भी शामिल हैं ,जिनका ये भी कहना है कि वह तो कभी कभार अपने मित्रों या किसी रिश्तेदार के साथ ही एक आध बार डेरे में गए थे। यहां बता दें कि डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों पहली पहचान उनके गले में उनके गुरु का एक नंबर के कटआऊट वाला लाकेट होता था। एक दूसरे से मिलने के दौरान वे अभिवादन के तौर पर सबसे पहले धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा का उद्घोष करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। बताया गया है कि अधिकांश अनुयायी अपने घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से गुरमीत राम रहीम की फोटो के साथ गले में पहना लाकेट इन्होंने उतार फैंका है।
सबसे बड़ी समस्या उन डेरा अनुयायियों को भी हो रही है जो कि गांवों में अपनी बेशकीमती उपजाऊ भूमि बेच कर सिरसा डेरा में परिवार सहित रहने लगे थे। इनके लिए अब रोजगार का संकट भी खड़ा हो चुका है। डेरे के कुछ अनुयायियों से बात की गई तो इनमें से किसी ने बताया कि वे एक दशक पहले ही डेरा सच्चा सौदा से नाता तोड़ चुके हैं, जबकि कइयों ने दो टूक यही कहा कि उनका डेरे से कोई संबंध नहीं है।
इनमें कई ऐसे कट्टर डेरा समर्थक भी शामिल हैं ,जिनका ये भी कहना है कि वह तो कभी कभार अपने मित्रों या किसी रिश्तेदार के साथ ही एक आध बार डेरे में गए थे। यहां बता दें कि डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों पहली पहचान उनके गले में उनके गुरु का एक नंबर के कटआऊट वाला लाकेट होता था। एक दूसरे से मिलने के दौरान वे अभिवादन के तौर पर सबसे पहले धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा का उद्घोष करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। बताया गया है कि अधिकांश अनुयायी अपने घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से गुरमीत राम रहीम की फोटो के साथ गले में पहना लाकेट इन्होंने उतार फैंका है।
560 प्रोडक्ट में से 90 प्रतिशत नहीं बिक रहा सौदा
राम रहीम
- फोटो : file photo
कुरुक्षेत्र सलारपुर रोड गीता ज्ञान संस्थानम कार्यालय के साथ स्थित एमएसजी के मेन डीलर जिंदल बदर्स ने बताया कि दो माह पहले वह डीलरशिप छोड़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि अभी जो स्टाक पड़ा था वह उसे ही निकाल रहे हैं। बाबा पर फैसला आने से पहले जहां प्रतिदिन डेढ़ लाख से ज्यादा की सेल थी वहीं, अब यह सेल सिर्फ 15 से 25 हजार पर आकर टिक गई है। उन्होंने बताया कि अब कुरुक्षेत्र में उनके अलावा चार डीलरों के और आउटलेट हैं,इनके अलावा मार्केट की अन्य प्राईवेट दुकानों पर भी एमएसजी के 500 से ज्यादा प्रोडक्ट बिक्री के लिये उपलब्ध हैं, लेकिन बिक्री लगभग बंद है।
बाबा के चक्कर में फंसे, लेकिन बुजुर्ग की सीख से बचे
कुरुक्षेत्र के निकटवर्ती एक गांव में डेरा सच्चा सौदा का एक अनुयायी परिवार काफी विचित्र स्थिति से गुजर रहा है। यह परिवार अपनी 11 एकड़ उपजाऊ खेती की भूमि बेचकर डेरा प्रमुख की शरण में चला गया था। हालांकि इस परिवार के एक बुजुर्ग के कहने पर इन्होंने पैतृक गांव के घर और दो एकड़ भूमि को छोड़ कर शेष जमीन बेचकर सिरसा डेरे में रहने लगे थे। एक दिन पहले जब डेरा खाली कराया तो यह परिवार वापिस घर लौट आया है। इनके गांव के लोगों का कहना है कि अगर बाबा के चक्कर में सारी जमीन और घर बेचकर सिरसा चले गये होते तो आज बुजुर्ग मां के कहने से बची दो एकड़ भूमि और सिर छुपाने का आसरा वो घर भी नहीं बचता।
एजेंट को समाचार पत्र न बांटने के निर्देश
बुधवार को प्रशासन ने डेरा से संचालित व प्रकाशित डेरा के मुखपत्र सच कहूं के प्रसार पर रोक लगा दी है। इस समाचार पत्र को वितरित करने वाले एजेंटों को पुलिस ने निर्देश दिए हैं कि इस समाचार पत्र को किसी सूरत में न बांटा जाए और समाचारपत्र के बंडलों को पुलिस थाने में पहुंचाया जाए। ऐसा माना जा रहा है कि डेरा के समाचारपत्र में डेरा प्रमुख को निर्दोष बताया जा रहा है और पुलिस, सरकार व मीडिया के खिलाफ जमकर जहर उगला जा रहा है।
पुलिस को अंदेशा है कि इस समाचारपत्र की खबरें पढ़कर डेराप्रेमी सरकार, प्रशासन के खिलाफ भड़क सकते हैं और कानून व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। लाडवा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर निर्मल कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इस समाचारपत्र के एजेंट को यह समाचारपत्र वितरित करने से मना किया गया है ताकि क्षेत्र में शांति भंग न हो।
बाबा के चक्कर में फंसे, लेकिन बुजुर्ग की सीख से बचे
कुरुक्षेत्र के निकटवर्ती एक गांव में डेरा सच्चा सौदा का एक अनुयायी परिवार काफी विचित्र स्थिति से गुजर रहा है। यह परिवार अपनी 11 एकड़ उपजाऊ खेती की भूमि बेचकर डेरा प्रमुख की शरण में चला गया था। हालांकि इस परिवार के एक बुजुर्ग के कहने पर इन्होंने पैतृक गांव के घर और दो एकड़ भूमि को छोड़ कर शेष जमीन बेचकर सिरसा डेरे में रहने लगे थे। एक दिन पहले जब डेरा खाली कराया तो यह परिवार वापिस घर लौट आया है। इनके गांव के लोगों का कहना है कि अगर बाबा के चक्कर में सारी जमीन और घर बेचकर सिरसा चले गये होते तो आज बुजुर्ग मां के कहने से बची दो एकड़ भूमि और सिर छुपाने का आसरा वो घर भी नहीं बचता।
एजेंट को समाचार पत्र न बांटने के निर्देश
बुधवार को प्रशासन ने डेरा से संचालित व प्रकाशित डेरा के मुखपत्र सच कहूं के प्रसार पर रोक लगा दी है। इस समाचार पत्र को वितरित करने वाले एजेंटों को पुलिस ने निर्देश दिए हैं कि इस समाचार पत्र को किसी सूरत में न बांटा जाए और समाचारपत्र के बंडलों को पुलिस थाने में पहुंचाया जाए। ऐसा माना जा रहा है कि डेरा के समाचारपत्र में डेरा प्रमुख को निर्दोष बताया जा रहा है और पुलिस, सरकार व मीडिया के खिलाफ जमकर जहर उगला जा रहा है।
पुलिस को अंदेशा है कि इस समाचारपत्र की खबरें पढ़कर डेराप्रेमी सरकार, प्रशासन के खिलाफ भड़क सकते हैं और कानून व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। लाडवा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर निर्मल कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इस समाचारपत्र के एजेंट को यह समाचारपत्र वितरित करने से मना किया गया है ताकि क्षेत्र में शांति भंग न हो।