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राजयोगिनी दादी जानकी ने लॉन्च किया महिला सशक्तिकरण अभियान, 58 बहनें बन गईं सजनियां
Mon, 09 Mar 2020 02:33 PM IST
खुशबू गोयल
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 09 Mar 2020 02:33 PM IST
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राजयोगिनी दादी जानकी
- फोटो : अमर उजाला
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सेक्टर-34 के प्रदर्शनी ग्राउंड में ब्रह्माकुमारी संस्था की ओर से भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में 58 ब्रह्माकुमारी बने शिव की सजनियां बनी। समर्पण करने वाली ब्रह्माकुमारी बहनें दुल्हन की तरह सजकर मंच पर उपस्थित थीं। इन बहनों ने समर्पण की प्रतिज्ञा ली। बहनों की समर्पण प्रतिज्ञा के बाद उनके माता पिता ने भी समर्पण करने की प्रतिज्ञा ली। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
कार्यक्रम में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजन गुप्ता, मेयर राजबाला मलिक, मेजर जरनल एमएस कांडल, अमर सिंह चौधरी, हरजिंदर कौर, भाजपा पूर्व प्रधान संजय टंडन विशेष अतिथियों के रूप में उपस्थित हुए। राजयोगिनी दादी रतन मोहिनी, ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी चक्रधारी दीदी, नार्थ जोन के डायरेक्टर भ्राता अमीर चंद, चंडीगढ़ सर्कल की डायरेक्टर बीके उत्तरा दीदी भी मंच पर मौजूद रहे। मंच का संचालन बी के अनीता दीदी ने किया।
58 कुमारियों का मानव कल्याण हेतु ईश्वर समर्पण
चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व जम्मू कश्मीर से आई 58 ब्रह्माकुमारी बहनों ने अपना संपूर्ण जीवन संस्था के साथ समर्पित रूप से जुड़ कर जन व समाज कल्याण के लिए अर्पित करने लिए शपथ ली। शपथ के साथ परमात्मा शिव की प्रतिमा को वरमाला पहनाई। ये सभी बहनें 5 वर्षों से अधिक समय विभिन्न सेवाकेंद्रों पर संस्था के नियमों का पालन करते हुए बिता चुकी हैं। इन समर्पित बहिनों के माता पिता ने भी सहर्ष अपनी कन्याओं के समर्पण पर अपनी स्वीकृति दी। इनके अतिरिक्त 100 से अधिक उन बहिनों ने भी शपथ ली जो आने वाले समय में अपना जीवन प्रभु अर्पण करेंगी।
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कार्यक्रम में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजन गुप्ता, मेयर राजबाला मलिक, मेजर जरनल एमएस कांडल, अमर सिंह चौधरी, हरजिंदर कौर, भाजपा पूर्व प्रधान संजय टंडन विशेष अतिथियों के रूप में उपस्थित हुए। राजयोगिनी दादी रतन मोहिनी, ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी चक्रधारी दीदी, नार्थ जोन के डायरेक्टर भ्राता अमीर चंद, चंडीगढ़ सर्कल की डायरेक्टर बीके उत्तरा दीदी भी मंच पर मौजूद रहे। मंच का संचालन बी के अनीता दीदी ने किया।
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58 कुमारियों का मानव कल्याण हेतु ईश्वर समर्पण
चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व जम्मू कश्मीर से आई 58 ब्रह्माकुमारी बहनों ने अपना संपूर्ण जीवन संस्था के साथ समर्पित रूप से जुड़ कर जन व समाज कल्याण के लिए अर्पित करने लिए शपथ ली। शपथ के साथ परमात्मा शिव की प्रतिमा को वरमाला पहनाई। ये सभी बहनें 5 वर्षों से अधिक समय विभिन्न सेवाकेंद्रों पर संस्था के नियमों का पालन करते हुए बिता चुकी हैं। इन समर्पित बहिनों के माता पिता ने भी सहर्ष अपनी कन्याओं के समर्पण पर अपनी स्वीकृति दी। इनके अतिरिक्त 100 से अधिक उन बहिनों ने भी शपथ ली जो आने वाले समय में अपना जीवन प्रभु अर्पण करेंगी।
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महिला सशक्तिकरण का आधार उनकी योग्यता व संस्कार
ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी चक्रधारी दीदी ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी चक्रधारी दीदी संस्था के महिला विभाग की चेयरपर्सन के साथ ही रूश में संस्था के सेवाकेंद्रों की डायरेक्टर भी है। उन्होंने अपने विचार रखे। चक्रधारी दीदी ने कहा कि आज हम सब समझते हैं कि यूएनओ ने 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में घोषित किया जिसके पीछे मूलरूप से 3 सूत्र थे। थे।
समता, प्रगति एवं शांति। बाहरी परिवर्तन से पहले सबसे बड़ा परिवर्तन हमें स्वयं में लाना है। उसके लिए हमें अपने ही अंदर झांकना होगा और अपने नैतिक और सामाजिक को बेहतर बनाना होगा। बडे़ सुंदर उदाहरण से उन्होंने बताया कि जैसा व्यवहार एक मां अपनी बेटी से करती है, सास के रूप में वैसा ही व्यवहार उसे अपनी बहू से भी करना चाहिए।
यही बात बहू को भी समझनी होगी। मां बाप को ही ये संस्कार बेटी को देने होगे तभी शादियों में स्थिरता, शांति व प्रेम पनपेगा। शिक्षा का संस्कार बहुत जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर लड़की अपने परिवार की आर्थिक रूप से भी मदद कर सके। हमें महिलाओं का मूल्यांकन उसकी योग्यता व संस्कारों से करना चाहिए न कि धन से।
समता, प्रगति एवं शांति। बाहरी परिवर्तन से पहले सबसे बड़ा परिवर्तन हमें स्वयं में लाना है। उसके लिए हमें अपने ही अंदर झांकना होगा और अपने नैतिक और सामाजिक को बेहतर बनाना होगा। बडे़ सुंदर उदाहरण से उन्होंने बताया कि जैसा व्यवहार एक मां अपनी बेटी से करती है, सास के रूप में वैसा ही व्यवहार उसे अपनी बहू से भी करना चाहिए।
यही बात बहू को भी समझनी होगी। मां बाप को ही ये संस्कार बेटी को देने होगे तभी शादियों में स्थिरता, शांति व प्रेम पनपेगा। शिक्षा का संस्कार बहुत जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर लड़की अपने परिवार की आर्थिक रूप से भी मदद कर सके। हमें महिलाओं का मूल्यांकन उसकी योग्यता व संस्कारों से करना चाहिए न कि धन से।
नवसमर्पित बनों के त्याग के संकल्प की सराहना की...
चक्रधारी दीदी ने नव समर्पित ब्रह्माकुमारी बहिनों के त्याग के संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन बहिनों ने अपना समय, श्वास व संकल्प को समाज सुधार व मानव कल्याण के लिए अर्पित करने का जो फैसला लिया है वह किसी बलिदान से कम नहीं है। परमपिता षिव ने स्वयं इनको वर लिया है और यह सौभाग्य जन्मों जन्मों की तपस्या का ही फल हो सकता है। उन्होंने इन कन्याओं के माता पिता को विषेश रूप से धन्यवाद व बधाई दी।
दुनिया निश्चत बदलेगी, शुभ बोलते रहें और बढ़ते रहें
ब्रह्माकुमारी संस्था की सह प्रशासिका दादी रतन मोहिनी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। वे प्रेरणा देते हुए ओम् शांति के वास्तविक अर्थ को अपने हृदय में सहज रूप में स्थित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि परमात्मा अपने वचन हमें गुप्त रूप में सुनाते हैं और उनके महावाक्यों को यदि हम अपने जीवन में वास्तविकता में उतार लें तो स्वयं के अंदर सर्व शक्तियों का अनुभव करेंगे। उसकी याद में रहते हुए ही हम सब कर्म करेंगे तो हमारे भीतर शांति, प्रेम व सद्भावना बनी रहेगी।
दुनिया निश्चत बदलेगी, शुभ बोलते रहें और बढ़ते रहें
ब्रह्माकुमारी संस्था की सह प्रशासिका दादी रतन मोहिनी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। वे प्रेरणा देते हुए ओम् शांति के वास्तविक अर्थ को अपने हृदय में सहज रूप में स्थित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि परमात्मा अपने वचन हमें गुप्त रूप में सुनाते हैं और उनके महावाक्यों को यदि हम अपने जीवन में वास्तविकता में उतार लें तो स्वयं के अंदर सर्व शक्तियों का अनुभव करेंगे। उसकी याद में रहते हुए ही हम सब कर्म करेंगे तो हमारे भीतर शांति, प्रेम व सद्भावना बनी रहेगी।