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रेल घूस कांडः बंसल के भांजे सहित 10 पर आरोप तय
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 08 Mar 2014 09:33 AM IST
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अदालत ने 12 करोड़ रुपये के रेलवे रिश्वत मामले में पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला, रेलवे बोर्ड के निलंबित सदस्य महेश कुमार सहित 10 लोगों को भ्रष्टाचार व आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप मे प्रथम दृष्ट्या दोषी माना है।
अदालत ने सभी के खिलाफ अभियोग तय करते हुए कहा कि इन सभी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। मामले की सुनवाई 11 मार्च को होगी।
सीबीआई का आरोप है कि पूरा मामला रेलवे बोर्ड के सदस्य एवं अभियुक्त महेश को सदस्य (इलेक्ट्रिकल) बनाने के लिए रचा गया।
पटियाला हाउस स्थित सीबीआई की विशेष न्यायाधीश स्वर्णा कांता शर्मा ने अपने 63 पृष्ठों के अपने आदेश में माना कि सभी अभियुक्तों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाने के पर्याप्त साक्ष्य हैं।
ये हैं आरोपी
बंसल के भांजे विजय सिंगला, रेलवे बोर्ड के सदस्य महेश कुमार, रेलवे को उपकरण सप्लाई करने वाले बंगलूरू के व्यवसायी नारायण राव मंजूनाथ व उसके सहयोगी पीवी मुरली व वेणुगोपाल, राहुल यादव, समीर संधीर, संदीप गोयल (पंचकूला का व्यावसायी), अजय गर्ग (निवासी चंडीगढ़) व सुशील ढागा (निवासी फरीदाबाद)।
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आरोप पत्र के मजबूत तर्क
सीबीआई ने आरोपपत्र में तर्क रखा कि पंचकूला के व्यवसायी संदीप गोयल ने महेश कुमार को आश्वासन दिया कि वह उसे सदस्य इलैक्ट्रिकल बनवा देगा। इसके लिए 10 करोड़ रुपये बतौर रिश्वत देनी होगी।
पांच करोड़ रुपये काम से पहले व पांच करोड़ रुपये काम होने के बाद। महेश कुमार उक्त पद के अलावा पश्चिमी रेलवे के महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार भी अपने पास रखना चाहता था। संदीप ने इसके लिए दो करोड़ रुपये अलग से मांगे और सौदा 12 करोड़ में तय हुआ।
इसके बाद महेश कुमार ने मंजू नाथ को दो करोड़ रुपये का प्रबंध करने को कहा लेकिन वे 90 लाख रुपये का ही प्रबंध कर पाए। यह राशि धर्मेंद्र और विवेक दिल्ली से चंडीगढ़ कार में लेकर गए।
सीबीआई का दावा है कि इसमें से 89 लाख 68 हजार रुपये विजय सिंगला के दफ्तर से नगद बरामद किए गए। उसके बाद महेश को मुंबई और मंजू नाथ को बंगलूरू से गिरफ्तार किया गया।
जज ने क्या कहा-
देश में घूसखोरी अप्रत्याशित ऊंचाई पर पहुंच चुकी है, यह मामला अपना लक्ष्य पाने के लिए बेहद सधे हुए अंदाज में घूस देने को उजागर करता है।
यह बताने की जरूरत नहीं कि घूसखोर लोगों के न केवल तरीके बदल रहे हैं बल्कि वह खुद भी पुराने मामलों से सबक लेकर ज्यादा सतर्क व गोपनीय होते जा रहे हैं।
-स्वर्णा कांता शर्मा, विशेष न्यायाधीश, सीबीआई कोर्ट, पटियाला हाउस, दिल्ली
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अदालत ने सभी के खिलाफ अभियोग तय करते हुए कहा कि इन सभी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। मामले की सुनवाई 11 मार्च को होगी।
सीबीआई का आरोप है कि पूरा मामला रेलवे बोर्ड के सदस्य एवं अभियुक्त महेश को सदस्य (इलेक्ट्रिकल) बनाने के लिए रचा गया।
पटियाला हाउस स्थित सीबीआई की विशेष न्यायाधीश स्वर्णा कांता शर्मा ने अपने 63 पृष्ठों के अपने आदेश में माना कि सभी अभियुक्तों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाने के पर्याप्त साक्ष्य हैं।
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ये हैं आरोपी
बंसल के भांजे विजय सिंगला, रेलवे बोर्ड के सदस्य महेश कुमार, रेलवे को उपकरण सप्लाई करने वाले बंगलूरू के व्यवसायी नारायण राव मंजूनाथ व उसके सहयोगी पीवी मुरली व वेणुगोपाल, राहुल यादव, समीर संधीर, संदीप गोयल (पंचकूला का व्यावसायी), अजय गर्ग (निवासी चंडीगढ़) व सुशील ढागा (निवासी फरीदाबाद)।
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आरोप पत्र के मजबूत तर्क
सीबीआई ने आरोपपत्र में तर्क रखा कि पंचकूला के व्यवसायी संदीप गोयल ने महेश कुमार को आश्वासन दिया कि वह उसे सदस्य इलैक्ट्रिकल बनवा देगा। इसके लिए 10 करोड़ रुपये बतौर रिश्वत देनी होगी।
पांच करोड़ रुपये काम से पहले व पांच करोड़ रुपये काम होने के बाद। महेश कुमार उक्त पद के अलावा पश्चिमी रेलवे के महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार भी अपने पास रखना चाहता था। संदीप ने इसके लिए दो करोड़ रुपये अलग से मांगे और सौदा 12 करोड़ में तय हुआ।
इसके बाद महेश कुमार ने मंजू नाथ को दो करोड़ रुपये का प्रबंध करने को कहा लेकिन वे 90 लाख रुपये का ही प्रबंध कर पाए। यह राशि धर्मेंद्र और विवेक दिल्ली से चंडीगढ़ कार में लेकर गए।
सीबीआई का दावा है कि इसमें से 89 लाख 68 हजार रुपये विजय सिंगला के दफ्तर से नगद बरामद किए गए। उसके बाद महेश को मुंबई और मंजू नाथ को बंगलूरू से गिरफ्तार किया गया।
जज ने क्या कहा-
देश में घूसखोरी अप्रत्याशित ऊंचाई पर पहुंच चुकी है, यह मामला अपना लक्ष्य पाने के लिए बेहद सधे हुए अंदाज में घूस देने को उजागर करता है।
यह बताने की जरूरत नहीं कि घूसखोर लोगों के न केवल तरीके बदल रहे हैं बल्कि वह खुद भी पुराने मामलों से सबक लेकर ज्यादा सतर्क व गोपनीय होते जा रहे हैं।
-स्वर्णा कांता शर्मा, विशेष न्यायाधीश, सीबीआई कोर्ट, पटियाला हाउस, दिल्ली