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पूर्व फौजियों के सामने राहुल ने खेला ट्रंप कार्ड

Tue, 25 Feb 2014 02:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 25 Feb 2014 02:15 PM IST
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rahul gandhi in chandigarh meet to former soldier

पूर्व फौजियों से रूबरू हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि ‘वन रैंक, वन पेंशन’ जैसे फैसले दिमाग से नहीं दिल से होते हैं।  राहुल गांधी ने बताया कि 25 साल से यह अहम मांग इसलिए पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि सरकारें इसके नफे-नुकसान में उलझी रहीं। उन्होंने भरोसा दिया कि भविष्य में भी उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाएगा।

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फैसला प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष का, मैंने थोड़ी मदद की है...

rahul gandhi in chandigarh meet to former soldier

राहुल ने पूर्व फौजियों से कहा,‘‘मैंने पार्टी प्रेसिडेंट और प्रधानमंत्री से कहा कि फौजी जब बॉर्डर पर होते हैं, तो दिल से काम करते हैं। जिंदगी बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं। तब पार्टी प्रेसिडेंट (सोनिया गांधी) ने कहा कि तुम सही बोल रहे हो, यही करना चाहिए। यह फैसला प्रधानमंत्री और पार्टी प्रेसिडेंट का है, मैंने थोड़ी मदद की है। उन्हें भी बधाई देना चाहता हूं।’’

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पूर्व फौजियों से राहुल ने दोहराया मदद का वादा

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राहुल ने बताया कि वह राजस्थान बॉर्डर पर एक फौजी से जानकारी ले रहे थे। वहां एल्युमीनियम का एक शेड था। उन्होंने फौजी से पूछा कि गर्मी में भी यहां रहते हो। तो जवाब मिला कि पक जाते हैं, पर यहीं खड़े होते हैं। उत्तराखंड में आपदा आई, जान किसने बचाई, आर्मी और एयरफोर्स ने। जहां आपकी जरूरत होती है, आप करते हो। 25 साल पुराना निर्णय अब हो गया, इससे 23 लाख लोगों को फायदा होगा। आखिर में राहुल ने कहा कि वादा करना आसान होता है, कोई भी वादा कर सकता हूं। पर 5-10-15 सालों में आपको दिखेगा, जहां भी मदद कर सकता हूं, करूंगा।

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कांग्रेस उपाध्यक्ष की सादगी ने किया पूर्व फौजियों को कायल

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राहुल गांधी ने अपनी सादगी से पूर्व फौजियों को कायल कर दिया। शाम 6.47 बजे राहुल समागम स्थल पहुंचे। पहली कतार से उन्होंने शुरुआत की और एक-एक पूर्व फौजी से मिलना शुरू किया। आयोजकों को भी उम्मीद नहीं थी कि वह पूरे पंडाल में बैठे एक-एक पूर्व फौजी की सीट तक जाकर उनसे मिलेंगे। 16 मिनट बाद वह स्टेज पर पहुंचे। उनका संबोधन भी संक्षिप्त रहा। सिर्फ छह मिनट में राहुल ने अपनी बात रखी। उन्होंने यह भी भरोसा दिया कि भविष्य में भी पूर्व फौजियों की मांगें पूरी की जाएंगी।

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