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राहुल के सामने धरने पर बैठी महिला कांग्रेस

Fri, 17 Oct 2014 05:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 17 Oct 2014 05:45 PM IST
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rahul gandhi at chandigarh: difficulties for punjab woman congress head

नव-नियुक्त पंजाब महिला कांग्रेस प्रधान किट्टू गरेवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नियुक्ति के बाद से उनके खिलाफ लगातार स्वर मुखर हो रहे हैं।

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अब पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी उनकी नियुक्ति की जांच की बात कही है। राहुल के कार्यक्रम के दौरान महिला कांग्रेस वर्कर भी पहुंचीं, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। उन्होंने बाहर रोष प्रदर्शन किया।
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फतेहजंग बाजवा ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह शाम को राहुल के साथ मुलाकात करवाएंगे। वर्करों ने नारेबाजी बंद कर दी, लेकिन गेट से नहीं हटीं।

वर्करों की बात सुन राहुल गांधी भी हैरान

rahul gandhi at chandigarh: difficulties for punjab woman congress head

मीटिंग खत्म होने के बाद अंबिका सोनी ने उन्हें अंदर बुलवाया। फिर सह प्रभारी हरीश चौधरी उन्हें राहुल से मिलाने ले गए। वर्करों ने राहुल से कहा कि वह पैराशूट सिस्टम बंद करने की बात कर रहे हैं और ऐसे लोगों को पद दिए जा रहे हैं।

किट्टू गरेवाल पार्टी की प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं। 2012 विधानसभा चुनाव में वह पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ आजाद चुनाव लड़ी थीं।

जिस पर राहुल काफी हैरान हुए। राहुल ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। वे इसकी जांच कराएंगे, जिसके बाद वर्करों ने राहत की सांस ली।

कांग्रेसियों को एकजुटता का पाठ पढ़ाया

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दो गुटों में बंटे पंजाब के कांग्रेसियों को पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एकजुटता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस ही कांग्रेस को हराती है, वरना हमें कोई हरा नहीं सकता।

साथ ही आगाह किया कि अगर अब भी इकट्ठे होकर नहीं चले तो फिर विपक्ष में ही बैठोगे। राहुल ने वीरवार को कांग्रेस भवन में तीन बैठकों को संबोधित किया। हर बैठक में उनका संबोधन और तेवर श्रोताओं के मुताबिक रहे। सबसे अहम बैठक सूबे के सीनियर नेताओं की थी।

इसमें प्रदेश कमेटी के पदाधिकारी, पूर्व प्रदेश प्रधान, एआईसीसी मेंबर, मौजूदा और पूर्व विधायक और सांसद शामिल हुए। सूबे में कांग्रेस को मजबूत करने का दारोमदार इन्हीं लोगों पर है। मंच पर राहुल के साथ दोनों दिग्गज, प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा और लोकसभा में उप नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह बैठे थे तो नीचे दोनों के समर्थक मौजूद थे।

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लगातार हार और फूट का दर्द भी झलका

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बाजवा और कैप्टन दोनों दिग्गजों की मौजूदगी में ही राहुल ने उनके समर्थकों को साफ शब्दों में संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में एकता की जरूरत है, संगठन को मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

आठ मिनट के भाषण के दौरान पंजाब में लगातार हार और फूट का दर्द भी झलका। उन्होंने कहा कि नशे, किसानों, वर्करों पर परचे जैसे कई मुद्दे हैं, जिन्हें सदन से सड़क तक उठाया जाना चाहिए। इसी मीटिंग के दौरान राहुल ने यह भी साफ किया कि सरकार बनने पर वर्करों की सुनवाई नहीं होती।

उन्होंने कहा कि सीएम बनने के बाद वर्करों को कोई पूछता तक नहीं है। राहुल ने सीनियर्स को यह भी साफ कर दिया कि कोई विधायक हो या सांसद, उसे संगठनात्मक मीटिंग में आना ही पड़ेगा। इस मीटिंग में मंच पर पंद्रह लोगों को बिठाया गया था, जिनमें पूर्व प्रधान, सांसद व अन्य बड़े नेता शामिल थे।

बाजवा के खिलाफ बोलने से बचे कैप्टन

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ज्यादातर विधायक कैप्टन गुट के हैं, लेकिन इस मीटिंग में किसी को बोलने का मौका नहीं दिया गया। राहुल की क्लास का असर तुरंत ही नजर आया।

मीटिंग के बाद बाहर निकलने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह, अपने धुर विरोधी प्रताप बाजवा के खिलाफ बोलने से बचते रहे। उनके समर्थकों का आरोप था कि मीटिंग में सिर्फ बाजवा समर्थकों को ही बोलने दिया गया।

कैप्टन ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। मीटिंग के बारे में पूछने पर भी उन्होंने इतना ही कहा कि इस बारे में पीपीसीसी ही ब्रीफ करेगी।

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