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फ्रांस से राफेल लाने वालों में कुंजपुरा सैनिक स्कूल का पूर्व छात्र भी, जानें- कौन हैं विंग कमांडर मनीष
Wed, 29 Jul 2020 09:16 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 29 Jul 2020 09:16 PM IST
सार
- सेना से रिटायर्ड पिता के बेटे विंग कमांडर मनीष कुमार 2000 में हुए थे पासआउट
- स्कूल और जिले के लोगों में वायुसेना के इस जांबाज की काबिलियत पर खुशी
- उपलब्धि : एनडीए के परीक्षा परिणाम में भी रहा मनीष का देश में तीसरा स्थान
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जांबाज विंग कमांडर मनीष कुमार
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विस्तार
पांच राफेल विमानों की पहली खेप को फ्रांस से भारत लाने वालों में भारतीय वायुसेना के जांबाज विंग कमांडर मनीष कुमार भी शामिल हैं जो कि करनाल के सैनिक स्कूल कुंजपुरा के पूर्व छात्र रहे हैं। अंबाला एयरबेस में विंग कमांडर मनीष द्वारा राफेल की लैंडिंग कराने से सैनिक स्कूल के साथ-साथ जिले में खुशी और गर्व है। यह सैनिक स्कूल हरियाणा के अंबाला से करीब 80 किलोमीटर दूर करनाल के कुंजपुरा में है।
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मनीष मूलरूप से यूपी के बलिया जिले के बकवा गांव निवासी हैं। उन्होंने 1993 में सैनिक स्कूल कुंजपुरा में दाखिला लिया था और 2000 में पास आउट हुए थे। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर एनडीए की परीक्षा पास की और वायुसेना में भर्ती हुए।
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सेना से रिटायर्ड हैं पिता, एनडीए परीक्षा में बेटे का तीसरा स्थान
सैनिक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार विंग कमांडर मनीष कुमार में बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। वे शुरू से ही पढ़ाई में काफी तेज थे, इसलिए एडमिशन के कुछ समय बाद से ही शिक्षकों के चहेते बन गए। पिता मदन सिंह सेना में हवलदार पद से रिटायर्ड हैं। पिता से प्रेरित होकर ही उन्होंने सेना में जाने का मन बनाया। बॉक्सिंग में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। एनडीए की परीक्षा परिणाम में भारत में तीसरे स्थान पर आने का गौरव भी उन्हीं के नाम है।
जगुआर के पायलट, फाइटर स्ट्राइक लीडर उपलब्धि
सैनिक स्कूल कुंजपुरा के लाइब्रेरियन सुरेंद्र सांगवान के अनुसार, मनीष कुमार अब तक जामनगर, अंबाला और गोरखपुर में पोस्टेड रहे हैं। जगुआर के पायलट होने के अलावा फाइटर स्ट्राइक लीडर की उपलब्धि भी उनके नाम है। उनकी काबिलियत को देखते हुए ही राफेल की कमान सौंपी गई है।