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Hindi News ›   Chandigarh ›   Question on speed of ED stenographer 17 pages drafted in 35 minutes Minister Sanjeev Arora arrest Highcourt

ईडी के स्टेनो की स्पीड क्या है?: 35 मिनट में तैयार किए 17 पेज, जिनके आधार पर धरे गए मंत्री संजीव अरोड़ा

Fri, 15 May 2026 10:32 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 15 May 2026 10:32 AM IST
सार

पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के चंडीगढ़ स्थित आवास पर ईडी ने दबिश दी थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।अब अरोड़ा ने हाईकोर्ट में इस पर सवाल उठाया है। 

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Question on speed of ED stenographer 17 pages drafted in 35 minutes Minister Sanjeev Arora arrest Highcourt
संजीव अरोड़ा - फोटो : संवाद/फाइल

विस्तार

पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने अपनी गिरफ्तारी और रिमांड की वैधता पर बड़ा सांविधानिक सवाल खड़ा किया है। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि उन्हें एक खतरनाक अपराधी की तरह पेश किया जा रहा है जबकि न तो उनका भगोड़े जैसा कोई आचरण है और न ही साक्ष्य से छेड़छाड़ की वास्तविक संभावना।
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उन्होंने ईडी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें गिरफ्तारी का आधार 17 पन्नों में दिया गया और हैरत की बात यह है कि यह पन्ने केवल 35 मिनट में तैयार किए गए थे। शायद ईडी के पास दुनिया का सर्वश्रेष्ठ स्टेनो था। चीफ जस्टिस की अदालत में उसके वकील ने कहा कि अरोड़ा को सुबह 7 बजे से ही प्रभावी रूप से हिरासत में रखा गया लेकिन औपचारिक गिरफ्तारी शाम 4 बजे दर्शाकर सांविधानिक सुरक्षा उपायों को कमजोर करने की कोशिश की गई।
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मंत्री अरोड़ा बोले-मैं कोई अपराधी नहीं हूं

याची ने कहा कि मैं एक मंत्री हूं और संबंधित लेनदेन 2023-24 का है, जब मैं केवल कारोबारी था। मैं कोई सीमा पार से जुड़ा व्यक्ति या अवैध कारोबार में शामिल अपराधी नहीं हूं। उन्होंने दलील दी कि कंपनी के रिकाॅर्ड पहले ही एजेंसी के कब्जे में हैं। वह राजनीति में आने के बाद कंपनी के निदेशक भी नहीं रहे, फिर भी उन्हें ऐसे पेश किया जा रहा है मानो वे साक्ष्य मिटा देंगे या फरार हो जाएंगे।

बचाव पक्ष ने दावा किया कि 9 मई को सुबह 7 बजे ईडी टीम अरोड़ा के सरकारी आवास पर पहुंची और उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। याची ने कहा कि जिस क्षण किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित होती है, वही उसकी वास्तविक गिरफ्तारी का समय है। ऐसे में जांच एजेंसी अपनी सुविधा से बाद का समय दर्ज कर सांविधानिक अधिकारों विशेषकर अनुच्छेद 21 और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी को निष्प्रभावी नहीं कर सकती।

सुनवाई के दौरान सबसे अधिक ध्यान इस प्रश्न पर गया कि दोपहर 3:25 बजे बयान दर्ज करने के बाद केवल 35 मिनट में 17 पृष्ठों का विस्तृत गिरफ्तारी का आधार कैसे तैयार हो गया। वकील ने इसे पूर्व-टाइप, पूर्व-रिकाॅर्डेड और योजनाबद्ध दस्तावेज करार देते हुए अदालत से कहा कि देश का सर्वश्रेष्ठ स्टेनोग्राफर भी इतने कम समय में ऐसा दस्तावेज तैयार नहीं कर सकता।
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