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सुरजेवाला ने ढींगरा आयोग पर साधा निशाना, लगाए गंभीर आरोप
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 01 Jul 2016 10:54 PM IST
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randeep surjewala
- फोटो : file photo
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कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील की जांच कर रहे ढींगरा आयोग पर सवालिया निशान लगाते हुए गंभीर आरोप लगाए। वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील केस की जांच कर रही ढींगरा आयोग के बहाने कांग्रेस ने एक बार फिर हरियाणा की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।
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कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आयोग के गठन के औचित्य पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जस्टिस ढींगरा के ट्रस्ट ने गिफ्ट में गुड़गांव की जमीन आखिर क्यों ली। हरियाणा सरकार से पूछा है कि पेवर ब्लॉक और रास्ते के लिए 95 लाख क्यों मंजूर किए गए। उन्होंने मांग की है कि जस्टिस ढींगरा अपने दायित्व से तौबा कर लें या फिर सरकार आयोग को खारिज कर दे।
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आयोग की ओर से लैंड डील मामले की रिपोर्ट सौंपने के मामले में बार-बार मोहलत मांगने के मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि अगर सरकार चाहे तो इस मामले की न्यायिक जांच पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जज से करवा सकती है। सुरजेवाला ने शुक्रवार को यहां प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दी। कहा कि आरएसएस और भाजपा के शीर्ष नेताओं के इशारे पर बदनीयती के तहत ढींगरा आयोग का गठन किया गया।
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छह की बजाय क्यों दी गई आठ हफ्ते की मोहलत: सुरजेवाला ने बताया कि साल 1981 से 2016 के बीच अलग-अलग सरकारों की ओर से कु़ल 33697.57 एकड़ भूमि के सीएलयू दिए गए। इनमें से करीब 10 हजार एकड़ मात्र गुड़गांव में हैं। इनमें से केवल 63 एकड़ भूमि के लिए जारी लाइसेंस के मामले की जांच के आदेश दिए गए, जो पूर्वाग्रह को दर्शाता है। लाइसेंस कानून और नियम के तहत स्काई लाइट अस्पताल (रॉबर्ड वाड्रा की है) उसे भी दिया गया था। कहा कि बार -बार आयोग की रिपोर्ट सरकार को सौंपने की मियाद बढ़ाने की मांग इस पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े करता है। जनता जानना चाहती है कि 30 जून को रिपोर्ट सौंपने के लिए पूरी तैयारी करने के बाद भी आखिरकार जस्टिस ढींगरा ने क्यों यू-टर्न ले लिया। इतना ही नहीं सरकार ने छह हफ्ते की बजाय क्यों आठ सप्ताह का वक्त दिया।
गोपाल सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट पर साधा निशाना सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा की तमाम समाजसेवी संस्थाओं को दरकिनार कर जस्टिस एसएन ढींगरा की गोपाल सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट को आखिरकार गुड़गांव में भूमि उपहार स्वरूप क्यों और कैसे दी गई। भूमि पर पेवर ब्लॉक बनाने और इसे मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए हरियाणा सरकार ने आठ दिसंबर, 2015 को एचआरडीए फंड से 95 लाख रुपये से अधिक की राशि मंजूर की। जटौला गांव में जहां एक ओर रेलवे स्टेशन के लिए जमीन की मांग को लेकर ग्रामीण अपनी बात उठा रहे हैं, वहीं ट्रस्ट को उपहार में जमीन देना ग्रामीणों को बेहद खट कर हा है। इससे स्पष्ट है कि चेरिटेबल ट्रस्ट और जस्टिस एसएन ढींगरा ने सत्ता और पोजीशन का लाभ लिया। यह उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने के लिए काफी है।