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Chandigarh News: पंजाब का इतिहास तीन जिल्दों में समेटा, भगवंत मान ने किया लोकार्पण
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1980 पृष्ठों और 33 अध्यायों वाले ग्रंथ में पंजाब की संस्कृति, संघर्ष और लोक चेतना का दस्तावेज
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में तीन जिल्दों वाले ग्रंथ पंजाब का इतिहास का लोकार्पण किया। पंजाब कला परिषद की ओर से संपादित एवं प्रकाशित इस ग्रंथ में 1980 पृष्ठ और 33 अध्याय हैं। समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इंदु बंगा ने की। परिषद के अध्यक्ष स्वर्णजीत सवी ने बताया कि आठ महीने के परिश्रम से तैयार ग्रंथ में पंजाबी विद्वानों की रचनाएं शामिल हैं। संपादक डॉ. अकाल अमृत कौर ने कहा कि इसमें पंजाब की मिट्टी, नदियों, कृषि, भाषा, साहित्य, धर्म, संस्कृति, प्रवास, कला और संगीत को ऐतिहासिक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाबी केवल भाषा नहीं, बल्कि पंजाब की आत्मा है। इतिहास सिर्फ अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान में भी लगातार बनता है। हर व्यक्ति अपने कार्यों से आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास का हिस्सा बनता है। उन्होंने परिषद और विद्वानों को बधाई दी। चिंतक अमरजीत सिंह ग्रेवाल ने इसे इतिहास को नए दृष्टिकोण से देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इतिहासकार डॉ. गुरिंदर सिंह मान और सुभाष परिहार ने भी प्रयास की सराहना की। समारोह में भाषा विभाग के निदेशक जसवंत सिंह जफर सहित लेखक, इतिहासकार और विद्वान मौजूद रहे।
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चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में तीन जिल्दों वाले ग्रंथ पंजाब का इतिहास का लोकार्पण किया। पंजाब कला परिषद की ओर से संपादित एवं प्रकाशित इस ग्रंथ में 1980 पृष्ठ और 33 अध्याय हैं। समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इंदु बंगा ने की। परिषद के अध्यक्ष स्वर्णजीत सवी ने बताया कि आठ महीने के परिश्रम से तैयार ग्रंथ में पंजाबी विद्वानों की रचनाएं शामिल हैं। संपादक डॉ. अकाल अमृत कौर ने कहा कि इसमें पंजाब की मिट्टी, नदियों, कृषि, भाषा, साहित्य, धर्म, संस्कृति, प्रवास, कला और संगीत को ऐतिहासिक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाबी केवल भाषा नहीं, बल्कि पंजाब की आत्मा है। इतिहास सिर्फ अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान में भी लगातार बनता है। हर व्यक्ति अपने कार्यों से आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास का हिस्सा बनता है। उन्होंने परिषद और विद्वानों को बधाई दी। चिंतक अमरजीत सिंह ग्रेवाल ने इसे इतिहास को नए दृष्टिकोण से देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इतिहासकार डॉ. गुरिंदर सिंह मान और सुभाष परिहार ने भी प्रयास की सराहना की। समारोह में भाषा विभाग के निदेशक जसवंत सिंह जफर सहित लेखक, इतिहासकार और विद्वान मौजूद रहे।
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