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नेत्रदान करने में पंजाबी अव्वल, और अब लेने वालों की तलाश, 27 साल में 5 हजार को मिली रोशनी
Sun, 03 Feb 2019 09:35 AM IST
खुशबू गोयल
वरिन्दर राणा, अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
वरिन्दर राणा, अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 03 Feb 2019 09:35 AM IST
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नेत्रदान
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दान चाहे अन्न का हो, रक्त का हो या फिर मानव अंग का हो, पंजाबियों का कोई सानी नहीं हैं। अब पुर्नजोत आई बैंक पंजाबियों की दान की प्रवृति में नया आयाम स्थापित करने जा रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते है कि पुनर्जोत आई बैंक में पंजाबी इतना नेत्रदान कर रहे हैं। अब आई बैंक के पास नेत्र लेने वालों की कमी महसूस होने लगी है।
इसलिए आई बैंक की तरफ से पंजाब के साथ लगते हरियाणा, हिमाचल, यूपी, उतराखंड के लोगों को अपील करनी पड़ी है, कि वह यहां आकर नेत्र लगवाए। इस काम के लिए बैंक की तरफ से कोई पैसा भी नहीं लिया जाता है। यानी सब कुछ फ्री हैं यहां। यहां बता दे कि यूपी से लोगों ने यहां आना शुरू कर दिया है, कई लोग सफल ट्रांसप्लांट के बाद अपने घरों को लौट चुके है।
साल 1992 से शुरू की पहल
यहां बता दे कि पुनर्जोत आई लुधियाना के फाउंडर डॉक्टर रमेश ने नेत्रदान की लहर को साल 1992 से शुरू किया था। उस समय पंजाब का माहौल कुछ अशांत था, लेकिन वह अपनी सहयोगियों के साथ लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करते रहे। अभी तक पुनर्जोत आई बैंक को 6800 लोग अपने नेत्रदान कर चुके हैं। इसमें 5 हजार लोगों को नेत्र ट्रांसप्लांट हो भी चुके हैं।
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अभी आई बैंक में हर महीने लगभग 40 नेत्र पहुंचते हैं। हालात ये हैं कि नेत्र लगाने के लिए लोगों की कमी पड़ रही है। इसलिए वह किसी तरह अन्य पड़ोसी प्रदेशों में लोगों को यह अपील भेज रहे हैं कि वह उनके आई बैंक से संपर्क कर नेत्र ले सकते हैं। क्योंकि आई बैंक में दान किए गए नेत्र को 5 दिन तक ही रखा जा सकता है। इस समय इनका ट्रांसप्लांट होना जरूरी है। अन्यथा किसी के दान किए गए नेत्र खराब हो सकते हैं।
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इसलिए आई बैंक की तरफ से पंजाब के साथ लगते हरियाणा, हिमाचल, यूपी, उतराखंड के लोगों को अपील करनी पड़ी है, कि वह यहां आकर नेत्र लगवाए। इस काम के लिए बैंक की तरफ से कोई पैसा भी नहीं लिया जाता है। यानी सब कुछ फ्री हैं यहां। यहां बता दे कि यूपी से लोगों ने यहां आना शुरू कर दिया है, कई लोग सफल ट्रांसप्लांट के बाद अपने घरों को लौट चुके है।
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साल 1992 से शुरू की पहल
यहां बता दे कि पुनर्जोत आई लुधियाना के फाउंडर डॉक्टर रमेश ने नेत्रदान की लहर को साल 1992 से शुरू किया था। उस समय पंजाब का माहौल कुछ अशांत था, लेकिन वह अपनी सहयोगियों के साथ लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करते रहे। अभी तक पुनर्जोत आई बैंक को 6800 लोग अपने नेत्रदान कर चुके हैं। इसमें 5 हजार लोगों को नेत्र ट्रांसप्लांट हो भी चुके हैं।
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अभी आई बैंक में हर महीने लगभग 40 नेत्र पहुंचते हैं। हालात ये हैं कि नेत्र लगाने के लिए लोगों की कमी पड़ रही है। इसलिए वह किसी तरह अन्य पड़ोसी प्रदेशों में लोगों को यह अपील भेज रहे हैं कि वह उनके आई बैंक से संपर्क कर नेत्र ले सकते हैं। क्योंकि आई बैंक में दान किए गए नेत्र को 5 दिन तक ही रखा जा सकता है। इस समय इनका ट्रांसप्लांट होना जरूरी है। अन्यथा किसी के दान किए गए नेत्र खराब हो सकते हैं।
70 फीसदी नेत्र होते हैं ट्रांसप्लांट
यहां बता दे कि अगर आई बैंक में 100 नेत्र पहुंचते है, तो उसमें 70 फीसदी ट्रांसप्लांट होते हैं। इसका कारण है कि आई बैंक में नेत्र पहुंचने पर उनके 5 टेस्ट होते हैं। एड्स, ब्लड कैंसर, हेपेटाइटिस बी और सी, ब्लड इंफेक्शन शामिल हैं। टेस्ट के दौरान अगर किसी नेत्र में यह बीमारी सामने आ जाती है, तो उसे ट्रांसप्लांट नहीं किया जाता है। डॉक्टर रमेश बताते हैं कि जांच के दौरान दान किए नेत्र में ऐसा कुछ आ जाए तो उन्हें नहीं लगाया जा सकता है। क्योंकि यह बीमारी दूसरे व्यक्ति को लग सकती है।
यूपी में डेढ़ लाख तक मांगा पैसा
मेरा 13 साल का बेटा काफी समय पहले सड़क पर खेल रहा था। अचानक हवा के झोंके से उसके आंखों में मिट्टी गिर गई। बेटे ने अपनी आंखों में मसल दिया नतीजा यह निकला कि उसकी आंखों में इंफेक्शन हो गया। इलाज के लिए उसे अलीगढ़ के अस्पताल में लेकर गए। उसकी आंखों में इंफेक्शन इतना बढ़ गया कि आंखों में मवाद बन गया। 3 महीने इलाज के बाद पता चला कि उसकी आंखें खराब हो चुकी हैं। यूपी में पता किया कि कहीं से नेत्र मिल जाए, तो पता चला कि इसका खर्च डेढ़ लाख रुपये तक का है। आखिरकार लुधियाना पुनर्जोत आई बैंक का पता चला। अब वह बेटे को लेकर यहां पहुंची हूं।
-बिमला देवी, सिकंदराबाद (यूपी)।
हमारे आई बैंक में हर महीने लगभग 40 नेत्र पहुंच रहे है। लेकिन पंजाब से उनकी मांग लगातार कम होती जा रही है। अभी हमारे बैंक में तीन नेत्र पड़े है, लेकिन कोई लगाने वाला नहीं है। 5 दिन से ज्यादा दान किए नेत्र को रखना संभव नहीं है। इस समस्या के समाधान के लिए अब हम पड़ोसी प्रदेश हिमाचल, हरियाणा, उत्तराखंड और यूपी में किसी तरह लोगों से संपर्क कर रहे हैं कि वह यहां आकर नेत्र लगवाए। नेत्र ट्रांसप्लांट हमारी सोसाइटी की तरफ से मुफ्त में किया जाता है।
- डॉ. रमेश, डायरेक्टर पुनर्जोत आई बैंक।
यूपी में डेढ़ लाख तक मांगा पैसा
मेरा 13 साल का बेटा काफी समय पहले सड़क पर खेल रहा था। अचानक हवा के झोंके से उसके आंखों में मिट्टी गिर गई। बेटे ने अपनी आंखों में मसल दिया नतीजा यह निकला कि उसकी आंखों में इंफेक्शन हो गया। इलाज के लिए उसे अलीगढ़ के अस्पताल में लेकर गए। उसकी आंखों में इंफेक्शन इतना बढ़ गया कि आंखों में मवाद बन गया। 3 महीने इलाज के बाद पता चला कि उसकी आंखें खराब हो चुकी हैं। यूपी में पता किया कि कहीं से नेत्र मिल जाए, तो पता चला कि इसका खर्च डेढ़ लाख रुपये तक का है। आखिरकार लुधियाना पुनर्जोत आई बैंक का पता चला। अब वह बेटे को लेकर यहां पहुंची हूं।
-बिमला देवी, सिकंदराबाद (यूपी)।
हमारे आई बैंक में हर महीने लगभग 40 नेत्र पहुंच रहे है। लेकिन पंजाब से उनकी मांग लगातार कम होती जा रही है। अभी हमारे बैंक में तीन नेत्र पड़े है, लेकिन कोई लगाने वाला नहीं है। 5 दिन से ज्यादा दान किए नेत्र को रखना संभव नहीं है। इस समस्या के समाधान के लिए अब हम पड़ोसी प्रदेश हिमाचल, हरियाणा, उत्तराखंड और यूपी में किसी तरह लोगों से संपर्क कर रहे हैं कि वह यहां आकर नेत्र लगवाए। नेत्र ट्रांसप्लांट हमारी सोसाइटी की तरफ से मुफ्त में किया जाता है।
- डॉ. रमेश, डायरेक्टर पुनर्जोत आई बैंक।