Punjab: कपूरथला में 3 दर्जन गावों में बाढ़ जैसे हालात, पीयू ने स्थगित की परीक्षा, गांव कालू वाला में भरा पानी
मोगा जिले के गांव भलूर में बारिश के पानी के कारण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क टूट गई। सड़क टूटने से मोगा और फरीदकोट के लोगों का आपसी लिंक टूट गया है। वहीं करीब गांवों का संपर्क भी कट गया है।
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पंजाब में भीषण बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। दो दिन से लगातार हो रही बारिश से लोहियां और सुल्तानपुर लोधी इलाके में बाढ़ जैसे हालात हैं। तीन दर्जन से अधिक गांवों की करीब 25 हजार धान की फसल पानी में डूब गई है। इस गंभीर स्थिति का जायजा लेने के लिए पर्यावरणविद् और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने गिद्दड़पिंडी और जानियां चाहल का दौरा किया।
कैबिनेट मंत्री बलकार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाढ़ का पहले ही प्रबंधन करने के लिए उनकी ड्यूटी संत सीचेवाल की मदद के लिए लगाई है। इसीलिए वह आज गिद्दड़पिंडी और अन्य इलाकों का दौरा करने आए थे। उन्होंने लोगों को भरोसा दिया कि सरकार लोगों के साथ खड़ी है।
इससे पहले संत बलबीर सिंह सीचेवाल को गांव किल्लीवाड़ा, गिद्दड़पिंडी, भरोआणा के किसानों ने बताया कि पानी की निकासी के लिए बनी पुलियां लोगों ने बंद कर दी हैं। भरोआणा में तो मंड के कुछ लोगों ने जल निकासी के लिए बनाए गए गेट को भी खोलने से मना कर दिया है। इससे हजारों एकड़ फसल डूब सकती है।
गिद्दड़पिंडी के सरपंच कुलवंत सिंह ने कहा कि 2019 में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। अब सतलुज नदी में पानी लगातार बढ़ रहा है और खेतों में पहले से ही पानी भरा है लेकिन कई लोग पानी निकालने में बाधा बन रहे हैं। बाढ़ रोकथाम कमेटी के अध्यक्ष कुलविंदर सिंह ने कैबिनेट मंत्री बलकार सिंह और डिप्टी कमिश्नर विशेष सारंगल को बताया कि वर्ष 2020 और 2021 में संत बलबीर सिंह सीचेवाल के नेतृत्व में रेलवे पुल के नीचे से मिट्टी निकालकर गिद्दड़पिंडी को बाढ़ से बचाया गया था। इस बार हालात पहले से भी ज्यादा खराब हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भरोआणा में पानी की निकासी को बाधित किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लोगों ने बताया कि कुतबीवाल, गिद्दड़पिंडी, वाड़ा जोध सिंह, किल्लीवाड़ा, वाटावाली कलां, वाटावाली खुर्द, सेखां मंगा, नल्ल, मंडला, भरोआणा समेत तीन दर्जन से अधिक गांवों की 25 हजार एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई है।
लोगों ने बताया कि अगर दो-तीन दिनों तक खेतों से पानी नहीं निकला तो धान की फसल बर्बाद हो जाएगी। डीसी जालंधर विशेष सारंगल और डीसी कपूरथला कैप्टन करनैल सिंह ने अपने-अपने जिलों के सभी अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर खेतों से पानी निकालने का निर्देश दिया है।
गांव भलूर में बारिश से सड़क टूटी
उधर, मोगा जिले के गांव भलूर में बारिश के पानी के कारण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क टूट गई। सड़क टूटने से मोगा और फरीदकोट के लोगों का आपसी लिंक टूट गया है। वहीं करीब गांवों का संपर्क भी कट गया है। मौके पर लोगों ने बताया कि शनिवार शाम चार बजे के करीब तेज बारिश के कारण पानी बहुत ज्यादा होने के कारण सड़क टूट गई। बताया जा रहा है कि सड़क टूटने से करीब 2500 एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। किसानों ने सरकार से मुआवजा की मांग की है।
पटियाला में बाढ़ जैसे हालात, पीयू ने परीक्षाएं कीं स्थगित
पंजाबी यूनिवर्सिटी ने सोमवार को होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी है। यूनिवर्सिटी कंट्रोलर (परीक्षा) दफ्तर से जारी पत्र के अनुसार पंजाब में बाढ़ के खतरे के मद्देनजर जारी अलर्ट व कुछ प्रबंधकीय कारणों के चलते सोमवार को होने वाली परीक्षा स्थगित की गई है। पत्र के मुताबिक पीयू की ओर से संशोधित डेटशीट यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। गौरतलब है कि पटियाला में बाढ़ जैसे हालात बने हैं। पटियाला की लाइफ लाइन कहे जानी वाली बड़ी नदी में पानी खतरे के निशान के नजदीक पहुंचने के कारण पास के इलाकों में रहने वाले लोगों को घरों को खाली करने का आदेश जारी किया गया है।
सतलुज नदी का पानी सीमांत गांव कालू वाला में भरा
फिरोजपुर जिले में हुसैनीवाला बार्डर से सटे टापू कालू वाला में सतलुज नदी का पानी भर गया है। यहां के बाशिंदे अपना सामान लेकर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हो चुके हैं। पाकिस्तान का कसूर नाला भी उफान पर है। उसका पानी भी नदी में आ रहा है। कालू वाला में धान व सब्जी की फसल डूब चुकी है।मलकीत सिंह और गुरदेव सिंह ने बताया कि उनके गांव कालू वाला को सतलुज नदी तीनों तरफ से नुकसान पहुंचाती है। पाकिस्तान से आ रहा पानी उन्हें भयभीत कर रहा है। खेतों में तीन फुट पानी भर चुका है। अरबी, मिर्च के अलावा अन्य सब्जी की फसल डूब चुकी है। किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है। मलकीत ने बताया कि कालू वाला के लोग अपना सामान लेकर अभी से सुरक्षित जगहों पर जाना शुरू हो गए हैं।
रात के समय गांव में और पानी भरने की संभावना है। अभी तक उनके गांव में न तो जिला प्रशासन और न कोई सियासी नेता उनकी सुध लेने पहुंचा है। ग्रामीण रेशम सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन उन्हें खानपान की सामग्री के अलावा रहने का प्रबंध करे। कुछ लोग अभी गांव में बैठे हैं ताकि नदी का पानी कम हो जाए।